कुछ करने का सबसे अच्छा समय कब है ?

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दो-तीन दिन पहले मैं इंटरनेट पे कुछ खोज रहा था , तभी मेरी नज़र एक ब्लॉग पर पड़ी , जिसका नाम है :  Better Life Coaching Blog. मैंने यूँही कुछ पोस्ट्स पढ़ीं और मुझे वे बहुत अच्छी लगीं, सचमुच यह एक content rich blog है । फिर मैंने ऑथर को जानना चाहा , ऊपर लिखा था , About Darren, मैंने क्लिक किया, उनके बारे में और इस blog के बारे में पढ़ा , and I liked it.

Darren Poke एक experienced life coach हैं, वह अपनी वाइफ Karen और तीन बच्चों के साथ मेलबोर्न , ऑस्ट्रेलिया , में रहते हैं , और  Advantage Resumes and Career Services नाम की एक कंपनी चलाते हैं।

मैंने अगले दिन ही उन्हें एक मेल लिखकर परमिशन मांगी कि मैं उनका कुछ कंटेंट Hindi  में  translate करके अपने रीडर्स के साथ share  करना चाहता हूँ , जवाब आया —” आप कर सकते हैं। ”  मैंने डैरेन को थैंक्स किया और आज उन्ही की एक छोटी सी पोस्ट आपसे शेयर कर रहा हूँ :

कुछ करने का सबसे अच्छा समय कब है ?

Best Time To Act In Hindiपिछले कई सालों में मैंने बहुत से लोगों को कोच किया है।

और हर सेशन के अंत में मैं उनसे पूछता हूँ कि वे कब अपने goals achieve करने के लिए एक्शन लेंगे।

अलग-अलग उत्तर आते हैं।

कुछ कहते हैं , ” तुरंत”

कुछ अगले हफ्ते या महीने की कोई तारीख बताते हैं।

कुछ  hesitate करते हैं और कोई कमिटमेंट नहीं देते।

मैंने ये सीखा है-

जो लोग तुरंत एक्शन लेते हैं उनका successful होने का chance  उनसे कहीं ज्यादा होता है जो wait करते हैं.

अगर आपके पास कोई आईडिया है , या आप सोच रहे हैं कि कुछ करना है, तो बस कर डालिये।

एक्ट कीजिये , वो करिये जो करना चाहते हैं।

और उसे अभी कीजिये।

 नहीं मैं हर एक विचार के पीछे भागने के लिए नहीं कह रहा।

आप हर एक आने वाली thought पर एक्ट करने की ना सोचें , ऐसा करना तो हवा में उड़ रहे पेपर के टुकड़े के पीछे भागने जैसा हुआ। ये बेहद ज़रूरी है कि आप disciplined और focused रहें।

लेकिन कई बार वो समय आता है जब आप जानते हैं कि क्या करना सही होगा।

आप जानते हैं कि आपको अब आगे क्या करना चाहिए।

उन क्षणों में  , संकोच मत करिये , उसे कल पर मत टालिए।

क्योंकि कुछ करने का सबसे अच्छा समय “अब” है।

-——-पर्सनल डेवलपमेंट आर्टिकल्स———-

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गेंहू के दाने

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एक समय की बात है जब श्रावस्ती नगर के एक छोटे से गाँव में अमरसेन नामक व्यक्ति रहता था। अमरसेन बड़ा होशियार था, उसके चार पुत्र थे जिनके विवाह हो चुके थे और सब अपना जीवन जैसे-तैसे निर्वाह कर रहे थे परन्तु समय के साथ-साथ अब अमरसेन वृद्ध हो चला था ! पत्नी के स्वर्गवास के बाद उसने सोचा कि अब तक के संग्रहित धन और Inspirational Story in Hindiबची हुई संपत्ती का उत्तराधिकारी किसे बनाया जाये ? ये निर्णय लेने के लिए उसने चारो बेटों को उनकी पत्नियों के साथ बुलाया और एक-एक करके गेहूं के पाँच दानें दिए और कहा कि मै तीरथ पर जा रहा हूँ और चार साल बाद लौटूंगा और जो भी इन दानों की सही हिफाजत करके मुझे लौटाएगा तिजोरी की चाबियाँ और मेरी सारी संपत्ती उसे ही मिलेगी, इतना कहकर अमरसेन वहां से चला गया।

पहले बहु-बेटे ने सोचा बुड्ढा सठिया गया है चार साल तक कौन याद रखता है हम तो बड़े हैं तो धन पर पहला हक़ हमारा ही है। ऐसा सोचकर उन्होंने गेहूं के दानें फेक दिये।

दूसरे ने सोचा की संभालना तो मुश्किल है यदि हम इन्हे खा लें तो शायद उनको अच्छा लगे और लौटने के बाद हमें आशीर्वाद देदे और कहे की तुम्हारा मंगल इसी में छुपा था और सारी संपत्ती हमारी हो जाएगी यह सोचकर उन्होंने वो पाँच दानें खा लिये।

तीसरे ने सोचा हम रोज पूजा पाठ तो करते ही हैं और अपने मंदिर में जैसे ठाकुरजी को सँभालते हैं, वैसे ही ये गेहूं भी संभाल लेंगे और उनके आने के बाद लौटा देंगे।

चौथे बहु- बेटे ने समझदारी से सोचा और पाचों दानो को एक एक कर जमीन में बो दिया और देखते-देखते वे पौधे बड़े हो गये और कुछ गेहूं ऊग आये फिर उन्होंने उन्हें भी बो दिया इस तरह हर वर्ष गेहूं की बढ़ोतरी होती गई पाँच दानें पाँच बोरी, पच्चीस बोरी,और पचासों बोरियों में बदल गए।

चार साल बाद जब अमरसेन वापस आया तो सबकी कहानी सुनी और जब वो चौथे बहु-बेटों के पास गया तो बेटा बोला , ” पिताजी , आपने जो पांच दाने दिए थे अब वे गेंहूँ की पचास बोरियों में बदल चुके हैं, हमने उन्हें संभल कर गोदाम में रख दिया है, उनपर आप ही का हक़ है। ” यह देख अमरसेन ने फ़ौरन तिजोरी की चाबियाँ सबसे छोटे बहु-बेटे को सौंप दी और कहा, तुम ही लोग मेरी संपत्ति के असल हक़दार हो।

इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि मिली हुई जिम्मेदारी को अच्छी तरह से निभाना चाहिए और मौजूद संसाधनो, चाहे वो कितने कम ही क्यों न हों, का सही उपयोग करना चाहिए। गेंहूँ के पांच दाने एक प्रतीक हैं , जो समझाते हैं कि कैसे छोटी से छोटी शुरआत करके उसे एक बड़ा रूप दिया जा सकता है।

Pawan_Jiधन्यवाद्

पवन झंवर
मेन रोड,भंडारा. महाराष्ट्र  , Email : pwnjhawar@gmail.com

पवन जी एक व्यवसायी हैं और अपनी गारमेंट शॉप चलाते हैं। उन्हें म्यूजिक और मैडिटेशन का भी शौक है.

We are grateful to Mr. Pawan for sharing this inspirational Hindi story teaching us to bear our responsibilities and use the resources in proper manner.

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