Life is easy….ज़िन्दगी आसान है !

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 कुछ दिनों पहले मैं बस यूँ ही कुछ Ted Talks Youtube पर देख रहा था . Ted Talks में आप हर तरह के topics पर interesting talks देख सकते हैं . ऐसे ही देखते -देखते मेरी नज़र एक video पर पड़ी जिसका title था “Life is easy” , title interesting था , मैंने तुरंत उसे play कर दिया . और सचमुच ये एक बहुत ही inspiring talk थी . इसमें Thailand के एक simple से farmer, Jon Jandai की कहानी है, जिनका कहना है “Life is easy…why make it hard ? “, और  आज दुनिया भर से लोग उनसे सीखने आते हैं की लाइफ को आसान कैसे बनाया जाए . Friends, मैं उनकी इस talk से बहुत प्रभावित हूँ और इसीलिए मैं इसका text Hindi में translate कर के आप सबसे share कर रहा हूँ . I hope, मेरी तरह आप भी यहाँ से ज़रूर कुछ सीख पाएंगे .

Life is easy….ज़िन्दगी आसान है !

एक बात है जो अब मैं लोगों से हमेशा कहना चाहता हूँ . वो बात है ” life is easy …ज़िन्दगी आसान है” . ये इतनी आसान और मजेदार है … पर पहले मैं ऐसा नहीं सोचता था .

जब मैं बैंकाक में था, मैं सोचता था life कितनी hard है … कितनी complicated है .

Life is easy...why make it hard!

Life is easy…why make it hard!

मैं northeast Thailand के एक छोटे से गाँव में पैदा हुआ था . और जब मैं छोटा था, सब कुछ बहुत मजेदार और आसान था, पर जब TV आया, बहुत से लोग गाँव आये और कहने लगे, ” तुम लोग गरीब हो, तुम्हे life में success पानी चाहिए . तुम्हे success पाने के लिए Bangkok जाना चाहिए .

 तब मुझे बुरा लगा, मैं खुद को गरीब लगने लगा . इसलिए मैं बैंकाक चला गया .

मैंने बहुत मेहनत की, कम से कम हर रोज आठ घंटे, पर मैं जो खा पाता था वो बस एक बाउल noodle या fried rice या इसी तरह का कुछ और .

और जहाँ मैं रहता वो बहुत गन्दी जगह थी, एक छोटा सा room जिसमे बहुत से लोग सोते थे। । वहां बहुत गर्मी थी …

मैं खुद से बहुत सवाल करने लगा … जब मैं इतना hard work करता हूँ तो मेरी लाइफ इतनी हार्ड क्यों है ? कुछ तो गड़बड़ है, क्योंकि मैं इतनी चीजें produce करता हूँ, पर मुझे पर्याप्त नहीं मिलता … और मैंने और जानने की कोशिश की . मैंने university में पढ़ने की कोशिश की .

University में कुछ learn करना बहुत कठिन है, क्योंकि ये बहुत बोरिंग है .

और मैं university में पढ़ाये जाने वाले subjects की तरफ देखने लगा ; हर एक faculty, उनमे से ज्यादातर destructive knowledge रखते हैं . university में मेरे लिए कोई productive knowledge नहीं था . जब मैं किसी चीज की तरफ देखता हूँ, जैसे की आप architecture की पढ़ाई कर रहे हैं, इसका मतलब आप और अधिक बर्बादी करेंगे . जितना अधिक ये लोग काम करेंगे उतना अधिक पहाड़ destroy किये जाएंगे . और चाओ प्रया बेसिन की अच्छी ज़मीन और भी अधिक कंक्रीट से ढँक दी जायेगी . हम बहुत डिस्ट्रोय करते हैं .

अगर हम agriculture या इस जैसा कुछ सीखते हैं तो इसका मतलब कैसे ज़मीन को, पानी को ज़हरीला बनाना है, toxicate करना है,कैसे सब कुछ तबाह कर देना है … ये सीखते हैं …. मैं feel करता हूँ कि हम जो कुछ भी करते हैं वो कितना complicated है, कितना कठिन है. और हम हर चीज को कठिन बना देते हैं …

Life is so hard… ज़िन्दगी कितनी कठिन है … मैं हताश हो जाता .

मैंने सोचना शुरू किया, आखिर मुझे यहाँ बैंकाक में क्यों रहना है ? मैंने सोचा – जब मैं छोटा था, कोई भी आठ घंटे काम नहीं करता था, हर कोई दो घंटे काम करता था, वो भी बस साल के दो महीने, एक महीना चावल बोन के लिए और दूसरा महीना फसल काटने के लिए . बाकि free time रहता था, 10 महीना free time. इसीलिए Thailand में लोग इतने अधिक त्यौहार मनाते थे, हर महीने कोई न कोई त्यौहार . क्योंकि उनके पास इतना free time होता था ….Uh

और दिन के समय, हर कोई झपकी भी लेता था . अभी भी Laos में, अगर कोई Laos जा सके तो जाये, वहां lunch के बाद लोग झपकी लेते हैं . और उठने के बाद वे बस गप्पे लड़ाते हैं, तुम्हारा दामाद कैसा है, तुम्हारी wife कैसे है, बहु कैसी है . लोगों के पास बहुत समय है, और चूँकि उनके पास बहुत time है, उनके पास खुद के लिए भी time है .

और क्योंकि उनके पास खुद के लिए time है, उनके पास खुद को समझने का टाइम है . और जब वे खुद को समझ जाते हैं, वो देख पाते हैं कि उन्हें life में क्या चाहिए . इसलिए लोग – बहुत से लोग देख पाते हैं कि उन्हें ख़ुशी चाहिए, उन्हें प्यार चाहिए, वे अपनी life एन्जॉय करना चाहते हैं .

इसलिए लोग अपनी life में ढेर सारी beauty देखते हैं, और उसे कई तरह से express करते हैं . कुछ लोग अपने चाकू का handle बड़े खूबसूरत तरीके से carve करके, कुछ बड़े अच्छे से टोकरी की बुनाई करके . लेकिन अब कोई ऐसा नहीं करता है . कोई इस तरह का कुछ नहीं करता है . हर जगह लोग plastic use करते हैं .

इसलिए मुझे लगा यहाँ कुछ गड़बड़ है, मैं इस तरह का जीवन नहीं जी सकता . इसलिए, मैंने university छोड़ने का निश्चय किया, और गाँव वापस चला गया .

जब मैं घर गया तब मैं वैसे रहने लगा जैसे बचपन में रहता था . मैं साल में बस दो महीने काम करने लगा . मुझे चार टन चावल मिल जाते . और पूरा परिवार, 6 लोग, पूरे साल आधा टन से कम ही खाते . इसलिए हम कुछ चावल बेच देते .

फिर मैंने दो तालाब बनाये, fish ponds, हमारे पास साल भर मछलियाँ खाने को होती हैं . और हमने एक छोटा सा garden बनाया … आधे acre से भी काम . और मैं रोज़ बस 15 मिनट उस garden के रख -रखाव में लगाता हूँ . मेरे पास 30 से अधिक तरह की सब्जिया हैं . 6 लोग सारी सब्जियां नहीं खा सकते, हमारे पास market में बेचने के लिए surplus रहता है . हम वहां से भी कुछ income generate कर लेते हैं .

इसलिए मुझे लगता है, ये आसान है, मुझे सात साल बैंकाक में रहने की क्या ज़रुरत थी, इतना मेहनत करने पर भी जहाँ खाने के लिए पर्याप्त नहीं मिलता था, लेकिन यहाँ सिर्फ साल में दो महीने और रोज 15 मिनट देकर मैं 6 लोगों का पेट पाल सकता हूँ .. ये आसान है .

और उसके बाद — पहले मैं सोचता था कि मेरी तरह के बेवकूफ लोग जिन्हे स्कूल में अच्छी grades नहीं मिलती, उनके पास अपना मकान नहीं हो सकता . क्योंकि मुझसे बुद्धिमान लोग, जो हर साल class में first आते हैं, उन्हें भी एक अच्छी नौकरी मिलने के बावजूद अपना मकान करने में 30 साल लग जाते हैं . लेकिन मेरे लिए जो university की पढ़ाई नहीं कर पाया, मेरा मकान कैसे हो सकता है ? मेरे जैसे कम पढ़े -लिखे लोगों के लिए कोई उम्मीद नहीं है .

लेकिन फिर मैंने earthly buildings बनाना शुरू किया ; ये इतना आसान है . मैं रोज दो घंटे देता, सुबह 5 से 7, और तीन महीने में एक घर तैयार .

Jon Jandai Houseऔर एक दूसरा दोस्त जो class में सबसे तेज था, उसे भी घर बनाने में तीन महीने लगे, लेकिन उसे कर्ज में रहना पड़ेगा …. उसे अगले तीस साल तक कर्ज चुकाना होगा . तो उसके comparison में मेरे पास उन्तीस साल दस महीने का free time है . Yeah, इसलिए मुझे लगता है life कितनी आसान है .

मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इस तरह से घर बना पाउँगा . और अब मैं हर साल घर बनाता जा रहा हूँ, कम से कम साल में एक घर, अब मेरे पास पैसे नहीं हैं पर मेरे पास बहुत सारे घर हैं .

मेरी प्रॉब्लम है कि आज रात मैं किस घर में सोने जाऊं . :)

तो, घर कोई दिक्कत नहीं है, कोई भी घर बना सकता है . 13 साल के स्कूल जाने वाले बच्चे एक साथ ईंटे बनाते हैं …घर बनाते हैं . एक महीने बाद उनकी library तैयार . बच्चे घर बना सकते हैं, एक बूढी nun अपने लिए एक घर बना सकती है . बहुत से लोग घर बना सकते हैं . तो, ये आसान है .

अगर यकीन न हो तो जिसे घर चाहिए वो खुद try करके देख ले …

और अगली चीज है कपडे .

मैं गरीब फील करता था, मुझे लगता था मैं handsome नहीं हूँ . मैंने किसी और की तरह लगने का प्रयास किया।  एक movie star की तरह ताकि मैं अच्छा दिख सकूँ, बेहतर लग सकूँ .

मैंने एक jeans खरीदने के लिए एक महीने तक पैसे बचाये . जब मैंने उसे पहना तो मैं दाएं -बाएं घूम कर शीशे में देखने लगा . हर बार मैं देखता, पर मैं वही रहता … दुनिया की सबसे महंगी पैंट भी मुझे नहीं बदल सकती . मुझे लगा, मैं कितना पागल हूँ, मुझे इसे खरीदने की क्या ज़रुरत थी … एक महीना jeans खरीदने में लगा दिया . वो मुझे नहीं बदल सकी ..

मैं इस बारे में और सोचने लगा . हमें fashion follow करने की क्या ज़रुरत है . क्योंकि अगर हम उसे follow करते हैं तो हम कभी उसे catch नहीं कर सकते, क्योंकि हम तो follow करते हैं …इसलिए follow मत करो ।बस यहीं stay करो . जो है वो use करो …

तबसे बीस साल हो गए, मैं कभी कपडे नहीं खरीदता . मेरे पास जितने भी कपडे हैं वो औरों द्वारा छोड़े गए कपडे हैं . जब लोग मुझसे मिलने आते हैं वे बहुत से कपडे छोड़ के चले जाते हैं, उन्होंने वहां बहुत से कपडे छोड़े हुए हैं . तो अब मेरे पास टनों कपडे हैं .

और जब लोग मुझे बहुत पुराने कपडे पहने हुए देखते हैं, तो वे मुझे और कपडे दे देते हैं . अब मेरी समस्या है की मुझे अक्सर दुसरे लोगों को कपडे देने पड़ते हैं .

तो, ये आसान है .

और जब मैंने कपडे खरीदने छोड़ दिए , मुझे लगता है , ये सिर्फ कपड़ों के लिए नहीं है , ये मेरी life में और भी चीजों के बारे में है , मैंने ये जाना कि मैं जब कुछ खरीदता हूँ , तो इसलिए क्योंकि वो मुझे अच्छी लगती है या इसलिए कि मुझे उसकी ज़रुरत है .

तो अगर मैं इसलिए कुछ खरीदता हूँ क्योंकि वो मुझे अच्छी लगती है तो मैं गलत हूँ . जब मैं ऐसे सोचने लगा तो खुद को और free महसूस करने लगा .

और अंतिम चीज है , अगर मैं बीमार पड़ता हूँ तो मैं क्या करूँगा ?

शुरू में  मुझे सचमुच चिंता हुई कि मेरे पास पैसे नहीं हैं तो मैं क्या करूँगा . पर मैं और विचार करने लगा . आमतौर पर बीमारी एक आम बात है ,ये कोई बुरी बात नहीं है . बीमारी एक ऐसी चीज है जो हमें याद दिलाती है कि हमने अपनी लाइफ में कुछ गलत किया है इसलिए हम बीमार पड़े हैं .

इसलिए , जब मैं बीमार पड़ता हूँ , तो मुझे रुक कर अपने पास वापस आना होता है . और सोचना होता है कि मैंने क्या गलत किया .

तो मैंने सीखा कि पानी से कैसे खुद का उपचार किया जाए , कैसे मिटटी से खुद को ठीक किया जाए , मैंने खुद को ठीक करने के लिए बुनियादी बातें सीखीं.

तो अब जब मैं चार बेसिक चीजों के लिए खुद पर rely करता हूँ , मुझे लगता है ये कितना आसान है … मुझे आज़ाद होने जैसा कुछ feel होता है , जैसे …उह… मैं free feel करता हूँ . मैं महसूस करता हूँ कि मैं किसी चीज की ज्यादा चिंता नहीं करता , मुझमे डर कम है , मैं जो चाहूँ इस life में कर सकता हूँ .

पहले मेरे अंदर बहुत डर था , मैं कुछ नहीं कर सकता था . पर अब मैं बहुत free feel करता हूँ , मुझे लगता है मैं इस दुनिया में unique हूँ , मेरे जैसा कोई नहीं , मुझे खुद को किसी और की तरह बनाने की ज़रुरत नहीं है . मैं number 1 हूँ .

ऐसे मैंने इसे आसान बनाया , इतना हल्का …और उसके बाद , मैं सोचने लगा कि जब मैं बैंकाक में था , मुझे जीवन में कितना अंधकार नज़र आता था , मैंने सोचा कि उस समय मेरी तरह और भी कई लोग ऐसा ही सोचते होंगे .

इसलिए , हमने Ching Mai में “Pun Pun” नाम के एक जगह की शुरुआत की . इसका main aim है बीज बचाना . बीज collect करना , क्योंकि seed food है , और food life है अगर seed नहीं है तो life नहीं है . seed नहीं है तो freedom नहीं है , seed नहीं है तो happiness नहीं है . क्योंकि सीड नहीं है तो आपकी life किसी और पर निर्भर है ; क्योंकि खुद आपके पास खाने को नहीं है .

 इसलिए , seed save करना बहुत ज़रूरी है . इसलिए हम सीड सेव करने पर फोकस करते हैं . Pun Pun में यही main काम है .

और दूसरी चीज है कि ये एक learning center है-

हम खुद सीखने के लिए एक center चाहते थे , जहाँ सीख सकें कि ज़िन्दगी को आसान कैसे बनाया जाए . क्योंकि हमें हमेशा life को complicated और hard बनाना सिखाया गया है . हम इसे आसान कैसे बना सकते हैं ? ये आसान है , पर अब हम बिलकुल भी नहीं जानते कि इसे आसान कैसे बनाया जाए . क्योंकि – क्योंकि हम हमेशा इसे complicated बनाते हैं , और अब हम सीखना शुरू कर रहे हैं , और साथ रहना शुरू कर रहे हैं .

हर जगह हमें खुद को हर चीज से अलग करना सिखाया जाता है , independent होना सिखाया जाता है , ताकि हम सिर्फ पैसों पर निर्भर रह सकें . हमें एक दुसरे पर rely करने की कोई ज़रुरत नहीं हो . लेकिन अब , खुश रहने के लिए हमें  वापस आना होगा , दुबारा खुद से connect होना होगा , औरों से connect  होना होगा , हमें अपने mind  और body को वापस जोड़ना होगा .

हम खुश रह सकते हैं . Life is easy … ज़िन्दगी आसान है . और शुरू से अब तक मैंने यही सीखा है कि चार basic ज़रूरतें : रोटी , कपड़ा , मकान और दवाइयाँ हर किसी के लिए सस्ती होनी चाहिएं , यही सभ्यता है . लेकिन अगर आप इन चार चीजों को बहुत से लोगों के लिए कठिन बहुत कठिन बना देते हैं तो ये असभ्यता है . अब जब हम अपने चारों तरफ देखते हैं , हर चीज को पाना कितना कठिन है . इसलिए मुझे लगता है कि ये मानवजाति का पृथ्वी पर सबसे असभ्य युग है .

हमारे पास इतने लोग हैं जो University से पढ़ाई करके निकलते हैं , दुनिया में इतनी सारी universities हैं , दुनिया में  इतने चतुर लोग हैं . लेकिन , हमारी life कठिन और कठिन होती जा रही है . हम इसे किसके लिए कठिन बना रहे हैं ? हम अभी किसके लिए इतनी मेहनत कर रहे हैं ?

मुझे लगता है। । ओह! … ये गलत है , ये normal नहीं है . इसलिए , मैं बस normal बनना  चाहता हूँ . एक साधारण  आदमी , जानवरों के बराबर . चिड़िया अपना घोसला एक-दो दिन में बना लेती हैं . चूहा रात भर में अपना बिल बना लेता है . लेकिन , हमारे जैसे बुद्धिमान लोग अपना घर करने में तीस साल लगा देते हैं , और कई लोग तो यकीन ही नहीं कर पाते कि इस life में उनका अपना मकान हो सकता है . ये गलत है .

हम अपनी आत्मा का नाश क्यों कर देते हैं , क्यों – क्यों हम अपनी क्षमता इतनी नष्ट कर लेते हैं ? मुझे लगता है कि अब हद्द हो चुकी है कि normal life को abnormal तरीके से जिया जाए . लेकिन , लोग मुझे एब्नार्मल person की तरह देखते हैं . पागल आदमी . मैं इसकी चिंता नहीं करता , क्योंकि ये मेरी गलती नहीं है . ये उनकी गलती है , क्योंकि वे ऐसा सोचते हैं .

अब मेरी life आसान और हलकी है . यही मेरे लिए पर्याप्त है .

लोग जो सोचना चाहते हैं सोच सकते हैं . मैं अपने से बाहर की कोई चीज manage नहीं कर सकता . जो मैं कर सकता हूँ वो है अपना mind change करना , अपना माइंड manage करना . अब मेरा mind light और easy है ,यही काफी है .

अगर कोई अपनी life में choice चाहता है तो उसके पास चॉइस है . Easy होने की choice और hard होने की choice, ये आप पर depend करता है आप क्या चुनते हैं .

Thank You

Jon Jandai

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Image Courtesy : anewbreedofdragon.com , naturalbuild.wordpress.com

आखिरी सन्देश

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ऋषिकेश के एक प्रसिद्द महात्मा बहुत वृद्ध हो चले थे और उनका अंत निकट था . एक दिन उन्होंने सभी शिष्यों को बुलाया और कहा , ” प्रिय शिष्यों मेरा शरीर जीर्ण हो चुका है और अब मेरी आत्मा बार -बार मुझे इसे त्यागने को कह रही है , और मैंने निश्चय किया है कि आज के दिन जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर जाएगा तब मैं इहलोक त्याग दूंगा .”

Laghu  Katha in Hindiगुरु की वाणी सुनते ही शिष्य घबड़ा गए , शोक -विलाप करने लगे , पर गुरु जी ने सबको शांत रहने और इस अटल सत्य को स्वीकारने के लिए कहा .

कुछ देर बाद जब सब चुप हो गए तो एक शिष्य ने पुछा , ” गुरु जी , क्या आप आज हमें कोई शिक्षा नहीं देंगे ?”

“अवश्य दूंगा “, गुरु जी बोले

” मेरे निकट आओ और मेरे मुख में देखो .”

एक शिष्य निकट गया और देखने लगा।

“बताओ , मेरे मुख में क्या दिखता है , जीभ या दांत ?”

“उसमे तो बस जीभ दिखाई दे रही है .”, शिष्य बोला

फिर गुरु जी ने पुछा , “अब बताओ दोनों में पहले कौन आया था ?”

“पहले तो जीभ ही आई थी .”, एक शिष्य बोला

“अच्छा दोनों में कठोर कौन था ?”, गुरु जी ने पुनः एक प्रश्न किया .

” जी , कठोर तो दांत ही था . ” , एक शिष्य बोला .

” दांत जीभ से कम आयु का और कठोर होते हुए भी उससे पहले ही चला गया , पर विनम्र व संवेदनशील जीभ अभी भी जीवित है … शिष्यों , इस जग का यही नियम है , जो क्रूर है , कठोर है और जिसे अपने ताकत या ज्ञान का घमंड है उसका जल्द ही विनाश हो जाता है अतः तुम सब जीभ की भांति सरल ,विनम्र व प्रेमपूर्ण बनो और इस धरा को अपने सत्कर्मों से सींचो , यही मेरा आखिरी सन्देश है .”, और इन्ही शब्दों के साथ गुरु जी परलोक सिधार गए .

 —–प्रेरणादायक कहानियों का विशाल संग्रह ——

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