कहीं आपकी डिग्री आपके सपने तो नहीं तोड़ रही ?

Posted on by

Make Your Dreams Come True

Don't let your degree suppress your dreams !

कहीं  आपकी  डिग्री  आपके  सपने  तो  नहीं  तोड़  रही ?

इस  article का  title आपको  थोडा  अटपटा  लग  सकता  है . क्योंकि  generally इंसान  बड़ी-बड़ी डिग्रीयां   लेकर  तो  बड़े  बड़े  सपने  पूरे  करता  है , कोई  MBBS की  degree लेकर  Doctor बनने  का  सपना  तो  कोई  Engineering की  degree लेकर  Engineer बनने  का सपना , और मैं इन्ही के द्वारा सपने टूटने की बात कर रहा हूँ!!

मेरा  सवाल  ये  है  कि  आज  आप  जो  हैं,  क्या  आपने  ही  वो  बनने  का  सपना  देखा  था  या  आपको  जबरदस्ती  वो  सपना  दिखाया  गया  था ??

मैं  एक  middle class family से  हूँ  और  बचपन  से  मेरे  मित्र -यार  भी  ऐसे  ही  परिवारों  से  रहे  हैं ; और  ज्यादातर  लोग  जो  इस  blog को  पढ़ते  हैं  वो  भी  ऐसे  ही  परिवारों  से  होते  हैं ….शायद  आप  भी . ऐसे  घरों  में  पढाई -लिखी  को  विशेष  महत्त्व  दिया  जाता  है , अक्सर  parents यही  expect करते  हैं  कि उनके  बच्चे  Engineer/ Doctor बने . और  ये  बात  बच्चे  के  दिमाग  में  इतनी  बैठा  दी  जाति  है  कि वही  उसका  सपना  बन  जाता  है . इस  process में  कई  बच्चे  सचमुच  उस  सपने  को  अपना  बना  लेते  हैं  और  इसी  क्षेत्र  में  आगे  चल  कर  बड़े  बड़े  काम  करते  हैं .पर  समस्या  वहां  आती  है  जब  आपके  mature होने  के  साथ  साथ  आपके  अपने  सपने  जन्म  लेने  लगते  हैं …ऐसे  सपने  जिसका  उस  पढ़ाई  लिखी  से  कोई  सीधा  वास्ता  नहीं  होता . For example: Computer Engineering कि  पढ़ाई करके  किसी  अच्छी  IT company में  काम  करने  वाला  बंदा  अपना  Restaurant खोलने  का  सपना  देख  सकता  है , कोई  MBA करके   किसी  multinational company में  काम  करने   की  बजाये  किसी  NGO में   काम  करने  की  सोच  सकता  है , कोई  Doctor किसी  हॉस्पिटल  में  operation करने  की  बजाये  Artist बनने का dream देख सकता है.

पर  अधिकतर  लोग  ऐसे  कदम  नहीं  उठा  पाते  क्योंकि  उनका  उनकी  degree उनके  सामने  आ  जाती  है , उनके  मन  में  कुछ ऐसे  विचार  आ  सकते  हैं :

“ मैंने  तो  Engineering की  है , इतनी  अच्छी  नौकरी  कर  रहा  हूँ , अब  इस  field को  छोड़  कर  Restaurant खोलूँगा  तो  लोग  क्या  कहेंगे .”

“ अगर  मैंने  Artist बनने  के  बारे  में  किसी  से  बोला  तो  लोग  मुझे पागल  समझेंगे . .मेरी  पढ़ाई  में  इतने  पैसे लगे  हैं  …इतना  वक़्त  लगा  है …it’s not possible to change my profession.”

और वो लोग  खुद  को   समझा  लेते  हैं   की  जो  होता  है  अच्छा  होता  है , मेरी  किस्मत  में  यही  करना  लिखा  था …etc.

ज्यादातर  लोग  परिस्थितियों  से  समझौता  क्यों  कर  लेते  हैं ?

क्योंकि  ये  करना  आसान  होता  है …इसके  लिए  कोई  risk नहीं  उठाना  पड़ता ,खुद  को  comfort zone से  नहीं  निकलना  पड़ता …, इसके  लिए  हिम्मत   नहीं  चाहिए  होती  और  साथ  ही  आप  दुनिया  की   नजरो   में  एक  normal इंसान  बने  रहते  हैं .

अगर आप उन ज्यादातर लोगों में नहीं हैं तो बहुत अच्छी  बात है ,आप अपने दिल की आवाज़ सुनकर सचमुच अपने और सोसाइटी के लिए अच्छा काम कर रहे हैं.और यदि आप उनमे से हैं जो अपने  दिल की आवाज़ को दबा कर बैठे हों तो आपको सोचना होगा!!!!

सिर्फ अपने past decisions को सही ठहराने के लिए आप कब तक  गलत future decisions लेते रहेंगे? जो डिग्री आपको आज़ाद करने की बजाये बांधे उसका भला क्या काम? और ऐसा भी नहीं है कि आप जो नया काम करने की सोच रहे हैं वहां आपका पिछला ज्ञान बिलकुल ही काम ना आये.  वो भले आप  directly ना use कर पाएं, पर किसी भी उच्च शिक्षा को हासिल करने में आपके brain का जो development होता है और आपका जो outlook broad होता है वो हर एक काम में आपकी मदद करेगा.

अपने चेहरे पर किसी और का मुखौटा लगा कर ज़िंदा तो रहा जा सकता है पर जिया नहीं जा सकता, एक fulfilling life जीने के लिए आपको अपने मन का काम चुनना होगा., कुछ ऐसे ही जैसा Harsha Bhogle ने , IIM Ahmedabad से  MBA करने  के  बाद  कुछ साल corporate world में काम तो किया पर खुद को अपने दिल की आवाज़ सुनने से नहीं रोक पाए और एक जाने-माने cricket commentator बन गए. Chetan Bhagat भी IIT और IIM से पढ़ाई करने के बाद एक author हैं. Samir Soni , University of California, Los Angeles से  Economics. की पढाई करने के बाद as an Investment Banker काम करते थे पर आज वो acting की दुनिया में नयी ऊँचाइयाँ छू रहे हैं.

और आपको 3 Idiots का Farhaan (Madhavan ) तो याद होगा ही . उसने अपने पिता की इच्छा पूरी करते हुए Engineering तो कर ली पर Rancho की motivation ने finally उसे अपने दिल का काम करने की हिम्मत दे डाली और वो एक renowned wild life photographer बन गया.

इस movie की तरह असल ज़िन्दगी में भी आपके parents तभी सबसे ज्यादा खुश होते हैं जब आप खुद सबसे ज्यादा खुश होते हैं. और आप तभी सचमुच खुश और संतुष्ट हो सकते हैं जब आप अपने दिल की सुने.

दोस्तों जब आप सचमुच किसी चीज को पूरी शक्ति से चाहते हैं तो  Law of Attraction अपना काम करने लगता है,भले शुरू में कोई आपका साथ ना दे पर यदि आप determined हैं तो धीरे-धीरे लोग आपको support करने लगते हैं  और आपके सामने ऐसी opportunities आने लगती हैं जिसके बारे में आपने कभी सोचा भी नहीं होता.

सपने देखना और उन्हें साकार करना सिर्फ आपको inner satisfaction ही नहीं देता बल्कि long term में financially भी ये कहीं अच्छा निर्णय साबित होता है. मैंने जो भी examples ऊपर लिए हैं , ये सभी लोग शायद नौकरी करके इतने पैसे नहीं कम पाते जितना वो अपने दिल का काम करते हुए कमा पा रहे हैं.

यदि  आप भी किसी trap में फंसे हैं और अपनी degree का बोझ ढो रहे हैं तो उस बोझ  को उतार फेंकिये,दोस्तों , Steve Jobs  की कही ये बातें याद रखिये:

“ आपका समय सीमित है, इसलिए इसे किसी और की जिंदगी जी कर व्यर्थ मत कीजिये. बेकार की सोच में मत फंसिए,अपनी जिंदगी को दूसरों के हिसाब से मत चलाइए. औरों के विचारों के शोर में अपनी अंदर की आवाज़ को, अपने intuition को मत डूबने दीजिए.

आपका काम आपकी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा होगा, और truly-satisfied होने का एक ही तरीका है की आप वो करें जिसे आप सच-मुच एक बड़ा काम  समझते हों. और बड़ा काम करने का एक ही तरीका है की आप वो करें जो करना आप enjoy करते हों.

उम्मीद है ये बातें मेरी तरह आपको भी अपना दिल की सुनने की प्रेरणा देंगी.

All the best! May all your dreams come true .

—————————————————————–

निवेदन : यदि  यह  लेख  आपके लिए लाभप्रद रहा हो तो कृपया  कृपया  comment के  माध्यम  से  मुझे ज़रूर बताएं.और इसे अपने Facebook friends  के साथ ज़रूर share करें .

यदि आपके पास English या Hindi में कोई good article,  inspirational story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है:achhikhabar@gmail.com.पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!

50 thoughts on “कहीं आपकी डिग्री आपके सपने तो नहीं तोड़ रही ?

  1. keshav dev

    dear gopal ji aap to asi khabar se rubaru karate hai ki jinda to jinda
    murde mai bhi jan aa jay gopal ji meri jindgi to ek kati pantang ki tarh hai jiska
    pata nhi kab kese konsi direction mai entring karegi fir bhi apki khabren sunkar
    essa lagta hai ki mano ek new jindgi mil rhi hai.

    Reply
  2. anupam kaushik

    hello sir , main sirf yahi kehna chahunga ki aapne jo kuch bhi likha h ,use padhne ke bad mujhe aisa lag raha hai jaise ki ye sab kuch maine hi likha h.aur mujhe ye jankar bahut khusi bhi ho rahi h ki koi h jo meri hi tarah sochta h .

    Reply
    1. Anonymous

      bahut hi motive kiya hai is thought main bhi samaj ke dar se apne man ki avaj nahi sunta tha pr thanks mera hausla aur badh gya in thoughts se thanks

      Reply
  3. saritasharma

    sir it is a very good and inspirating story i am also passing through a time in which my degree is trapping me i have a diploma in special education for mentally retarted children but i do not want to do any type of salary job in this field and i have not thinked about doing a salary job in this field inspite my financial condition is also not so good i like your thought because you say that we have to do what our heart says and yes my heart is saying me that instead of doing a job i have to open a NGO but sir my problem is i have made the NGO registered but i do not have land or so much money that i can construct my NGO but my dream is to open a NGO and i am confused how to do it and i think that it is my dream it will be completed or not please give me guidelines please reply me and i am sure that if u will give me guidelines i will complete my dream and i will be gratefull to you all my life

    Reply
    1. Gopal Mishra Post author

      Hi Sarita,
      It is good to go for your dreams, but remember Big dreams take Time to complete. And as always you have mouths to fill and bills to pay. Therefore, it is advisable to get a job in the beginning and keep on working towards your goal. Specially in your case, because an NGO need to establish itself before it can get grants and projects. And believe me more than a physical infrastructure you need to have good plans and a will to execute them. All the best. :)

      Reply
  4. manoj jatav

    wawwwwww
    very inspirational
    becoz last year i left my medical study becozthere i feel that i’m only a machine
    not a human so i did that.
    and now i’m do wihch i want a lot of 15 years
    manoj
    thanks

    Reply
  5. Monika Jain

    Really Liked This Post…….sirf zindgi jeene aur use apni marzi se jeene mein bahut antar hota hai…aur bachpan mein sach mein pata nahin chal pata ki ham kya karne ke liye bane hai…thnx for sharing this post :)

    Reply
  6. rohit sahai

    what you said is absolutely right……………………..but sometimes fear of failure and responsibilities in a middle class family makes you’ dont let your heart open ‘……………..but in all your examples one thing i have noticed except Steve jobs…………we need to be good enough in” profession they started with” to take care of our responsibilities and never let our dreams die………….because life gives you enough time…………..all we need to do is value the time.

    Reply
  7. sudhir

    very-very inspirational article for youth.
    most of our youngesters are not aware of such life making thoughts because of narrowness of our traditional educational system. we need something to do to popularise such article at grass root level where 80% of our youth waste their life.

    Reply
  8. Jyoti Mishra

    hello Gopal
    thanks 4 visiting me n giving me the opportunity to land here.
    Really loved the concept of your blog. Posts full of inspiration n great messages. Read few old posts too.

    Fantastic read !!
    Following u, n looking forward to new posts.
    Hope to c u more :)

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published.

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>