१५ अगस्त : स्वतंत्रता दिवस

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Independence Day 15 August Essay in Hindi

ज़रा याद करो कुर्बानी…

आजादी कहें या स्वतंत्रता ये ऐसा शब्द है जिसमें पूरा आसमान समाया है। आजादी एक स्वाभाविक भाव है या यूँ कहें कि आजादी की चाहत मनुष्य को ही नहीं जीव-जन्तु और वनस्पतियों में भी होती है। सदियों से भारत अंग्रेजों की दासता में था, उनके अत्याचार से जन-जन त्रस्त था। खुली फिजा में सांस लेने को बेचैन भारत में आजादी का पहला बिगुल 1857 में बजा किन्तु कुछ कारणों से हम गुलामी के बंधन से मुक्त नही हो सके। वास्तव में आजादी का संघर्ष तब अधिक हो गया जब बाल गंगाधर तिलक ने कहा कि “स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है”।

अनेक क्रांतिकारियों और देशभक्तों के प्रयास तथा बलिदान से आजादी की गौरव गाथा लिखी गई है। यदि बीज को भी धरती में दबा दें तो वो धूप तथा हवा की चाहत में धरती से बाहर आ जाता है क्योंकि स्वतंत्रता जीवन का वरदान है। व्यक्ति को पराधीनता में चाहे कितना भी सुख प्राप्त हो किन्तु उसे वो आन्नद नही मिलता जो स्वतंत्रता में कष्ट उठाने पर भी मिल जाता है। तभी तो कहा गया है कि

पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं।

जिस देश में चंद्रशेखर, भगत सिंह, राजगुरू, सुभाष चन्द्र, खुदिराम बोस, रामप्रसाद बिस्मिल जैसे क्रान्तिकारी तथा गाँधी, तिलक, पटेल, नेहरु, जैसे देशभकत मौजूद हों उस देश को गुलाम कौन रख सकता था। आखिर देशभक्तों के महत्वपूर्ण योगदान से 14 अगस्त की अर्धरात्री को अंग्रेजों की दासता एवं अत्याचार से हमें आजादी प्राप्त हुई थी। ये आजादी अमूल्य है क्योंकि इस आजादी में हमारे असंख्य भाई-बन्धुओं का संघर्ष, त्याग तथा बलिदान समाहित है। ये आजादी हमें उपहार में नही मिली है। वंदे मातरम् और इंकलाब जिंदाबाद की गर्जना करते हुए अनेक वीर देशभक्त फांसी के फंदे पर झूल गए। 13 अप्रैल 1919 को जलियाँवाला हत्याकांड, वो रक्त रंजित भूमि आज भी देश-भक्त नर-नारियों के बलिदान की गवाही दे रही है।

आजादी अपने साथ कई जिम्मेदारियां भी लाती है, हम सभी को जिसका ईमानदारी से निर्वाह करना चाहिए किन्तु क्या आज हम 66 वर्षों बाद भी आजादी की वास्तिवकता को समझकर उसका सम्मान कर रहे है? आलम तो ये है कि यदि स्कूलों तथा सरकारी दफ्तरों में 15 अगस्त न मनाया जाए और उस दिन छुट्टी न की जाए तो लोगों को याद भी न रहे कि स्वतंत्रता दिवस हमारा राष्ट्रीय त्योहार है जो हमारी जिंदगी के सबसे अहम् दिनों में से एक है ।

एक सर्वे के अनुसार ये पता चला कि आज के युवा को स्वतंत्रता के बारे में सबसे ज्यादा जानकारी फिल्मों के माध्यम से मिलती है और दूसरे नम्बर पर स्कूल की किताबों से जिसे सिर्फ मनोरंजन या जानकारी ही समझता है। उसकी अहमियत को समझने में सक्षम नही है। ट्विटर और फेसबुक पर खुद को अपडेट करके और आर्थिक आजादी को ही वास्तिक आजादी समझ रहा है। वेलेंटाइन डे को स्वतंत्रता दिवस से भी बङे पर्व के रूप में मनाया जा रहा है।

आज हम जिस खुली फिजा में सांस ले रहे हैं वो हमारे पूर्वजों के बलिदान और त्याग का परिणाम है। हमारी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि मुश्किलों से मिली आजादी की रुह को समझें। आजादी के दिन तिरंगे के रंगो का अनोखा अनुभव महसूस करें इस पर्व को भी आजद भारत के जन्मदिवस के रूप में पूरे दिल से उत्साह के साथ मनाएं। स्वतंत्रता का मतलब केवल सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता न होकर एक वादे का भी निर्वाह करना है कि हम अपने देश को विकास की ऊँचाइयों तक ले जायेंगें। भारत की गरिमा और सम्मान को सदैव अपने से बढकर समझेगें। रविन्द्र नाथ टैगोर की कविताओं से कलम को विराम देते हैं।

हो चित्त जहाँ भय-शून्य, माथ हो उन्नत
हो ज्ञान जहाँ पर मुक्त, खुला यह जग हो
घर की दीवारें बने न कोई कारा
हो जहाँ सत्य ही स्रोत सभी शब्दों का
हो लगन ठीक से ही सब कुछ करने की
हों नहीं रूढ़ियाँ रचती कोई मरुथल
पाये न सूखने इस विवेक की धारा
हो सदा विचारों ,कर्मों की गतो फलती
बातें हों सारी सोची और विचारी
हे पिता मुक्त वह स्वर्ग रचाओ हममें
बस उसी स्वर्ग में जागे देश हमारा।

स्वतंत्रता दिवस के पावन पर्व पर सभी पाठकों को हार्दिक बधाई।

जय भारत

अनिता शर्मा

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27 thoughts on “१५ अगस्त : स्वतंत्रता दिवस

  1. prakash dhidhi

    Anita ji good work aise hi aap aur lekh prakashit kar logo me rastrahit ki bhawna jagane ka prayaas karte rahiye .
    And best of luck

    Reply
  2. Atul Rathor

    aapka lekh hazaro me se ek hai…..
    aur
    mujhe aapke speech ki ye line bahut hi achhi lagi ki…..
    यदि स्कूलों तथा सरकारी दफ्तरों में 15 अगस्त न मनाया जाए
    और
    उस दिन छुट्टी न की जाए
    तो
    लोगों को याद भी न रहे कि स्वतंत्रता दिवस हमारा राष्ट्रीय त्योहार है
    जो हमारी जिंदगी के सबसे अहम् दिनों में से एक है ।

    i think it is a best line of this topic.

    thank u very much……Anita ji.

    Reply
  3. Dr Sagi Rajkumar Varma

    Aap ka lekh bahut prernadai hai. Aajaadi sampurna vishva ka mul hai. Iske aabhaav me jindgi jeene yogya nahi raha paati hai. Amoolya balidaano se prapt Bharat ki aajaadi aaj bhrashtaachaar aur politico-criminal nexus ke kaaran phir ek baar khatre me padti nazar aa rahi hai. Ise samjhna aur iske liye samay rahate kaargar kadam har naagrik ko uthaana padega. Tabhi Bharat Bharat rah paayega nahi to India kahlaayega.

    Reply
    1. sonu kapil

      when i read this i feel so good that some people are left in india who thought about our previous freedom & our freedom struggler ….
      happy independence day

      Reply
  4. samreen

    hai evryone i cnt speak R properly but i needs to give a speech in my college so please give me a best speech in hindi as soon as possible with less R words

    Reply
  5. vaibhav sharma

    Aapka bahut bahut dhanyawad ANITA JI mujhe mere school me bolne ke liye aise hi prabhaavdar speech chihye thi….thank you so much

    Reply
  6. Mohd .Islam saifi

    Anita ji mafi chahta hu. shayad appko savtantrata divas ke bare mai poori jankari nahi hai . Desh ko Azad karane mai moulana abdul kalam Azad ,Ashfaq ullah khan ,or bahut se aise hee desh bhakt hue hai. jinka app ne ziker hi nahi kiya.pleese logoo ko sahee jankary dijeaga jo sab ko achhe lage . mafee chahta hu.

    Reply
  7. प्रवीण पाण्डेय

    स्वतन्त्रता के न जाने कितने अध्यायों की याद दिलाता यह दिन।

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  8. Priyesh Beohar

    आज हमारा देश मौलिक अव्यशक्ताओं की कमी से जूझ रहा है। अमीर जादा अमीर होता जा रहा है और गरीब वोट बैंक बन के रह गया है, मध्यम वर्ग दोनों के बीच पिस रहा है। आदर्श व्यक्तिओं की कमी हो रही है, युवा वर्ग ने अपनी ही राह पकड़ रखी है। सरकार और मीडिया बिना किसी उद्देश्य के आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में हर वर्ष १५ अगस्त के दौरान हम लोग थोड़ा बहुत इतिहास को याद करते हैं। वर्तमान अधर में , भविष्य अंधकार में , बोलो जय भारत , मेरा देश महान।

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  9. Brij Bhushan Gupta , 9810360393

    Swatntrta Divas par Hardik Subhkamnayain.
    आज हम जिस खुली फिजा में सांस ले रहे हैं वो हमारे पूर्वजों के बलिदान और त्याग का परिणाम है।
    एवं स्वतंत्रता जीवन का वरदान है।
    व्यक्ति को पराधीनता में चाहे कितना भी सुख प्राप्त हो किन्तु उसे वो आन्नद नही मिलता जो स्वतंत्रता में कष्ट उठाने पर भी मिल जाता है। तभी तो कहा गया है कि
    पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं।, Bilkul sach hai.
    Swatntrta Divas par abhutpurv jankari avm lekh sarahniy hai.
    Brij Bhushan Gupta , New Delhi

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