सर्दी-जुकाम, कफ & कोल्ड का इलाज कैसे करें?
Cough & Cold Treatment in Hindi

सर्दी से परेशान…
जुकाम विश्व में सबसे ज्यादा होने वाले संक्रामक रोगों में से एक है। अक्सर जुकाम को साधारण मानकर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता किन्तु यही जुकाम बिगड़कर निमोनिया, साइनोसाइटिस जैसी अनेक बीमारियों का सबब बन सकता है। जुकाम को नजला, Cough & Cold, Cold तथा सर्दी जुकाम नामों से भी पुकारा जाता है तथा Nasal Allergy, Allergic Rhinitis, Nasopharyngitis आदि से इसकी तुलना की जाती है।
सर्दी -जुकाम और स्वाइन फ्लू के लक्षण एक से होते हैं . अतः यह लेख अवश्य पढ़ें : स्वाइन फ्लू : लक्षण कारण बचाव व उपचार
जुकाम के कारण / Causes of Cough & Cold or Flu in Hindi:
- धूल, धूँआ, मिट्टी, प्रदुषण, बदलता मौसम आदि से एलर्जी होना
- ठन्डे से गरम या गरम से एकदम से ठन्डे में जाना
- एकदम ठंडी चीजें खा लेना
- इम्युनिटी पावर कम होना
- वायरस तथा कभी बेक्टीरिया के इन्फेक्शन होना, इत्यादि जुकाम के कारण हो सकते हैं।
- इम्युनिटी पावर कम होने एवं एलर्जन* के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होने से जुकाम बार-बार एवं लगातार रहने लगता है।
- उच्च रक्तचाप, मधुमेह, ह्रदय रोगी, बच्चे तथा वृद्ध लोग जुकाम के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं।
जुकाम के लक्षण / Symptoms of Cough & Cold or Flu in Hindi:
जुकाम के लक्षणों में
- नाक बहना या नाक बन्द होना
- छींके आना
- गले में खिच-खिच होना
- बदन दर्द
- सिर दर्द
- कभी-कभी हरारत होकर बुखार हो जाना
सामान्यतया जुकाम 5-7 दिन में ठीक हो जाता है, किन्तु कभी-कभी 2-3 हफ्ते भी लग जाते हैं।
जुकाम का प्रसार / Spread of Cough & Cold or Flu in Hindi:
छींकने आदि के द्वारा वायरस युक्त कफ की छोटी-छोटी बूँदें स्वस्थ व्यक्तियों द्वारा साँस या मुह के द्वारा अन्दर लेने से एवं नासा स्राव के वस्तुओं के सम्पर्क से जुकाम का प्रसार होता है।
सर्दी जुकाम से बचाव / Prevention of of Cough & Cold or Flu in Hindi:
- बार-बार हाथ धोना सर्दी जुकाम एवं Nasal Allergy से बचने का सर्वोत्तम उपाय माना जाता है।
- नाक एवं मुंह पर मास्क पहनना भी बेहतर उपाय है।
- भीड़-भाड़ वाली जगहों जैसे मेले आदि में जाने से बचना।
- जुकाम पीड़ित व्यक्तियों के सम्पर्क में ना आना।
- अन्य लोगों में संक्रमण ना फैले इस हेतु छींकते एवं नाक साफ करते समय रूमाल या टीश्यू पेपर का उपयोग करना।
- संक्रमित व्यक्तियों के बर्तन, बिस्तर आदि शेयर ना करना।
- पुरानी किताबें, अलमारी, कालीन आदि समय समय पर साफ करते रहना।
- सुबह बिस्तर से उठकर नंगे पैर ना चलें।
- गरम से ठंडे एवं ठंडे से गरम में एकाएक ना जाना।
- बाइक आदि चलाते समय नाक एवं मुँह पर रूमाल बांधना।
- ठंड एवं ठंडी हवा से बचना।
जुकाम में घरेलु उपाय / Home Remedies for Cough & Cold or Flu in Hindi
- जुकाम होने पर पानी, सूप आदि के रूप में पर्याप्त तरल पदार्थ लेते रहें।
- अदरक का एक छोटा टुकड़ा पानी में उबालकर उसमें चुटकी भर नमक डालकर गरारे करने से गले के दर्द, बन्द नाक, गले की खराश में तुरन्त आराम आता है।
- गरम पानी में विक्स या धारा डालकर भाप लेने से श्वांस मार्ग, गले एवं नासिका में चिपका हुआ कफ ढीला होकर बाहर निकल जाता है जिससे आराम महसूस होता है।
- पर्याप्त आराम करने से जुकाम में शीघ्र लाभ होता है।
- तुलसी, अदरक, कालीमिर्च एवं लोंग की चाय नजला ,जुकाम, सर्दी खाँसी में बहुत फायदेमंद है।
- तुलसी और अदरक का थोड़ा रस निकालकर गरम करके गुनगुना रहने पर थोड़ा शहद मिलाकर लेना फायदेमंद है।
- एक गिलास गरम ढूध में चुटकी भर हल्दी एवं सौंठ पावडर डालकर पीने से खाँसी, जुकाम में आराम मिलता है।
- 50 ग्राम भुने चने कपड़े की पोटली में बांधकर रात में तवे पर गरम करके सूंघने पर नाक खुल जाती है।जुकाम में आराम मिलता है।
- नहाने के बाद सरसों के तेल को अंगुली से नासिका में लगाना जुकाम से बचाता है।
- उपरोक्त उपायों में से जरुरत के अनुसार 1-2 उपाय काम में लें।
नजला, सर्दी जुकाम की आयुर्वेदिक चिकित्सा / Ayurvedic Cough & Cold Treatment in Hindi:
- सितोपलादि चूर्ण ½ चम्मच मात्रा में दिन में 2-3 बार शहद से चाटना खाँसी, जुकाम में तुरन्त आराम देता है।
- लक्ष्मी विलास रस की 1-1 गोली दिन में 2 या 3 बार गरम पानी से लेना फायदेमंद है।
- मुलहठी चूर्ण एक चौथाई चम्मच मात्रा में शहद के साथ 2-3 बार चाटना खाँसी ( Cough ) में तुरन्त आराम देता है।
- हर्बल चाय भी सर्दी, खाँसी, जुकाम में बहुत फायदेमंद है।
- गिलोय के काढ़े में तुलसी, कालीमिर्च, लौंग एवं शहद डालकर पीना सर्दी, जुकाम, बुखार में बहुत उपयोगी है।
- गले में खराश, खिच-खिच या खाँसी में व्योषादी वटी, लवंगादि वटी तुरन्त आराम देती है।
- इनके अलावा भी आयुर्वेद की अनेक दवाएं हैं जो Sinusitis, Tonsillitis, Allergic Rhinitis, Nasopharyngitis आदि में बहुत उपयोगी हैं किन्तु इन सबको आयुर्वेद चिकित्सक की राय से ही लेना होता है।
इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ जागरूकता के लिहाज से दी गई है। कोई भी चिकित्सा करने के पहले विशेषज्ञ की राय अवश्य लें।

Dr. Manoj Gupta
Dr.Manoj Gupta
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डॉ० मनोज गुप्ता राज्य स्तरीय आयुर्वेद के सर्वोच्च पुरस्कार धन्वंतरि पुरस्कार से सम्मानित सीनियर आयुर्वेद विशेषज्ञ हैं। आयुर्वेद एवं स्वास्थ्य लेखन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए आपको माननीय स्वास्थ्य मन्त्री तथा अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। आपके लेख राजस्थान पत्रिका, निरोगसुख जैसे प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में पब्लिश होते रहे हैं।
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*एलर्जन=एलर्जी पैदा करना वाला तत्व
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