किशोरअवस्था में माँ-बाप से नहीं बनती तो… बच्चे “सावधान” !

बाल्यकाल जीवन का सर्वोत्तम समय होता है. इस उम्र में करियर, पैसा, शादी, फ्यूचर प्लैनिंग, महंगाई, अमीरी, गरीबी किसी भी समस्या की चिंता नहीं होती. खाना-पीना तो बिन मांनगे मिलता है, खिलौना चाहिए तो ज़िद पकड़ ली, लाड़ बेशुमार और पढाई की टेंशन भी ना के बराबर.
लेकिन इसके बाद ज़िंदगी नई करवट लेती है, इन्सान दुनियांदारी को समझने की राह पर “पहला कदम” रखता है, उम्र के इस पड़ाव को “Teen Age” कहेंगे. आइए Teen agers ki mistakes पर 10 IMP पॉइंट्स जान लेते हैं, ताकि उम्र गुज़रने के बाद पछताना ना पड़े.
1. तेवर में उफान और बागीपन
बच्चा कितना भी बड़ा हो जाए. माँ-बाप के लिए वो नन्हा-मुन्ना या नन्ही-मुन्नी ही रहती है, ऐसे में पेरेंट्स चाहते हैं, की उनके बच्चे ऐसी गलतियों से तौबा करे, जो उन्होंने की है. लेकिन Young Kinds इसे अनचाहा दखल करार देते हैं.
उन्हें पेरेंट्स का यह बर्ताव तानाशाही लगता है. स्कूल में Cool Attitude और Technology का ज्ञान थोड़ा-बहुत घमंड भी लाता है, अब माँ-बाप Old Fashion या गंवार भी मेहसूस हो सकते हैं.
बच्चे पहले तो ऐसी स्थिति में विवाद करेंगे, बात न बनी तो दूरियां बना लेंगे, अधिकतर मामलों में “किशोर बच्चे” अपनी इस हरकत पर, 25-30 की उम्र में अफ़सोस करते पाए जाते हैं.
2. सीखने से बेरुखी, या खौफ़ खाना

एजूकेशन सब के दिमाग में नहीं घुसती. कुछ बच्चे पढ़ाकू हो सकते हैं. कुछ Students कला या खेल में पारंगत हो सकते हैं. लेकिन हमारे समाज का System ऐसा है, की Basic Education जरुरी है.
इस उम्र में नकल भी भारी पड़ती है. दोस्त को 500 Rs पॉकेट मनी मिले तो मुझे भी चाहिए. पड़ौस के बच्चे ने फलां-फलां स्ट्रीम चुनी तो मैं भी उसी राह जाऊं, या फिर जब पढाई समझ नहीं आती तो, एक्जाम में चोरी-चकारी या पढाई ही अधूरी छोड़ देना.
जिस दोस्त की देखादेखी माँ-बाप से अधिक खर्च कराया है, उनके और अपने पेरेंट्स की इनकम और लाइफ-स्टाइल पर भी एक नज़र डालें.
3. गुज़रा कल लौट कर आता नहीं , पछतावा जल्द जाता नहीं
खेल-कूद ज़रूरी है, वैसे ही पढ़ाई जरुरी है. जब आप बड़े हो रहे हैं, माँ-बाप की जिम्मेदारी है, की वो आपका अच्छा पालन-पोषण करे.
लेकिन जब उनकी उम्र हो जाए, हाथ पैर सुन्न पड़ने लगे, तब आपको (बच्चों को) कमान संभालनी होगी. लेकिन इस लायक तभी बन पाओगे, जब अपने समय का सही इस्तमाल करोगे. skill बनाओगे, Career बनाओगे.
पेरेंट्स मरने तक मेहनत करते रहें, उन्हें कोई आराम ही न मिले, वो समाज में सिर उठा कर कह न सकें, की हमारे बच्चे अब सबकुछ संभाल रहे हैं, तो जिंदगी बेकार है.
4. कुए के मेंढक बनना, बदलाव से असहज होना

कुछ लोगों का group बहुत छोटा होता है, वे जल्द लोगों से घुलते-मिलते नहीं हैं. इसी कारण उनका growth मुश्किल होगा, अगर बचपन से ही आप ऐसे nature के रहेंगे, तो life बहुत hard होगी.
सोशल होना एक उपयोगी art है. अगर ये आपमें नहीं है तो इसे एक सब्जेक्ट मान कर सीखें. अन्तर्मुखी होने में कोई बुराई नहीं है. लेकिन यह कोई बहुत उपयोगी अवस्था भी नहीं है. जो दीखता है वो बिकता है, जिसके अच्छे कॉंटॅक्ट होते हैं उनके काम जल्द बनते हैं.
5. दिमाग का ढक्कन टाईट, खोलने का मन भी नहीं !
motivational content देखते पढ़ते हो, तो मालूम होगा, नई शुरुआत किसी भी उम्र में कर सकते हैं. तो चॉइस अब आपकी है, के किशोर अवस्था से सीखना शुरू करोगे, या उम्र बीतने के बाद स्ट्रग्ल का प्लान है.
हाँ में हाँ मिलाने वाले से बेहतर है तर्क देने वाला. चापलूस तो ठग लेगा, बात काटने वाला या तर्क देने वाला ही अलग view दिखा सकता हैं.
इस लिए openion देने वालों की इज्ज़त करें, उनका मत समझें, अगर मामला मतलब का ना लगे तो, आगे बढ़ जाएं. निष्कर्ष यह है कि, सुनने और विश्लेषण करने की कला पर काम करें.
6. पहले पैसा हाथ का मैल, फिर पैसा पेड़ पे नहीं उगता

ऊपर बताई दोनों बातें आप सब ने सुनी होगी. छोटी उम्र में पैसे की कीमत समझ नहीं आती, क्यूँ की normally कमाने के लिए पसीना जो नहीं पड़ता, तब सपने भी बड़े होते हैं, तो दिल खोल कर खर्च भी किया जाता है.
कपड़े, जूते, फोन, पार्टी, गिफ्ट, ट्रिप्स और ना जाने क्या क्या शौख… माना यह सब जरुरी होगा, लेकिन एक लिमिट के बाहर ये सब बर्बादी ला सकता है.
शरीर की बर्बादी, मानसिक स्थिति की बर्बादी, आर्थिक तंगी वगेरह… वगेरह…
और ऐसी आदतों से रेप्यूटेशन भी डेमेज हो सकती है. तो cool बनने के चक्कर में इतना भी उड़ाऊ नहीं बनना चाहिए, की आपकी आदतें, आपके future plans पर भारी पड़ जाए.
7. असल दौलत “सेहत” और “ज्ञान” की अनदेखी
20 हजार की जीन्स, 3 हजार के जूते, 1 हज़ार के चश्मे और वॉलेट में 500 वाली ढेर सारी पत्तियां.
Max teen agers ये सब पा कर खुद को बहुत सुखी और सुरक्षित मेहसूस करते होंगे, याद रखना, ये छलावा है, 6 महीने 1 साल में, यह सब बनावटी चीजें अपनी चमक खो देगी.
क्या यह फ़ालतू चीजें आपको रोड़ पर 3 मवालियों से पीटने से बचा सकती हैं? नहीं… क्या ये सजावटी चीजें आपको किसी करप्ट पुलिसवाले या ठग की जालसाज़ी से बचने का ज्ञान दे पाएंगी? नहीं.
अरे ये सब छोड़िए, अगर रास्ते में किसी अड़ियल सांढ़ या खूंखार कुत्ते से भागना पड़ा तो…? आप अपना ये स्टाइल दिखा कर उसे रोक सकोगे? नहीं !
तो क्या काम आएगा? “आपका शरीर” जो मजबूत होना चाहिए, “आपका दिमाग” जो शार्प होना चाइये, “आप का ज्ञान” जो सामने पड़ने वाली हर मुसीबत की खटिया खड़ी कर सके, फिर चाहे वो Problem इन्सान हो या जानवर.
8. गलत माहौल में फंस के रह जाना = 0 Growth
15-16 साल का सचिन पाकिस्तान जा कर क्रिकेट में इतिहास रच देता है. इसके लिए 4 साल की उम्र से क्रिकेट खेलना शुरू किया. वैभव सूर्यवंशी 13 साल की उम्र में IPL में इंटरनेशनल बौलेर्स की बैंड बजा रहा है, उसने भी नन्ही उम्र से अपना करियर शुरू किया होगा.
बात यहाँ skill level की नहीं, तैयारी की है. जो आपका goal है, जो आपको learn करना है, उस क्षेत्र से जुड़ा आपका group नहीं है, आप उस माहौल में समय नहीं बिता रहे हो, तो ख़ाख आपका करियर बनेगा !
जो बच्चे कुछ बड़ी सिद्धि प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें हमेशा अपने intrest और goal से जुड़े फिल्ड के successful लोगों के बीछ समय बिताना चाहिए.
उसमें भी अधिक समय खुद से ज्यादा होशियर लोगों के संपर्क में रहें, ताकि growth होता रहे.
9. गलत पचड़ों में बुरी तरह फंस जाना

मौजशौख और उससे जुड़े साइड-इफेक्ट की बात हम ऊपर कर चुके, उसे दोहराने की जरुरत नहीं. लेकिन teen age में इन्सान की body में बदलाव आते हैं, बहुत कुछ जानने और महसूस करने की इच्छाएं उत्पन्न होती है.
इसमें कोई बुराई नहीं है, ये सब नार्मल है, लेकिन इन चीजों में फंस कर रह जाना बेवकूफ़ी है. याद रखना, दुनियां एक मंडी के समान है, अगर आपका करियर और हेल्थ सही होगा तो “बगल में पार्टनर…” आपकी इच्छा से बढ़ कर खड़ा होगा, लेकिन खुद को गलत आदतों में खर्च किया तो… हर मामले में कम पड़ जाओगे. लोग मोलभाव कर के ही रिश्ता जोड़ते हैं, फिर चाहे दोस्ती हो या शादी.
Internet का युग है, संवेदनशील कंटेंट को सोशल मीडिया पर 100% इग्नोर करना मुश्किल होगा, लेकिन उसे हफ्ते के हिसाब से 1-2 दिन या उससे कम कंज्यूम किया जाए तो बहुत सी productive चीजों में आपका ध्यान लग सकता है.
किशोर बच्चों को यहाँ पर समझना यह है कि, पूरी उम्र पड़ी है, कुछ भागे नहीं जा रहा, सब कुछ करें लेकिन लिमिट जरूर लगाएं.
10. भय पर ध्यान लगाना, विश्वास कम करना
अँधेरे पर focus करो, वो बढ़ता जाएगा, उजाले पर ध्यान लगाओ सब साफ़ दिखने लगेगा. 99% प्रोब्लेम्स इन्सान के दिमाग में होती है. जो समय के साथ साथ अपने आप नष्ट हो सकतीं है.
जीवन का दूसरा नाम ही problem है. तो सारी मुसीबतें ख़त्म हो जाए इसी दुआएं भी मत मांगा करो, उनसे लड़ने का और राह निकालने का हौसला बनाओ. कुछ काम शुरू करो तब विश्वास करो, की सफलता मिलेगी. गलतियां भी करो तो repeat मत करो, हर बार नई गलती करो.
teen age में मन चंचल होता है, एक जगह ठहरता नहीं, तो ध्यान करो, सुनना सीखो, बड़ों को इज्जत दो, ज्ञान मिलेगा.
Most imp : दिमाग के द्वार खोल कर खुद को यह अच्छे से समझा लो, तुम्हारी बढ़िया income और अच्छा behaviour ही समाज और परिवार में इज्ज़त दिला सकेंगे. “बाकी सब मोह माया है“.
Read Also :
- कैसे बना मैं World’s Youngest CEO
- अधूरापन ज़रूरी है जीने के लिए …………
- तीन कहानियाँ- जो बदल सकती हैं आपकी ज़िन्दगी !
- आप भी हैं Intelligent !!!!!!!
- करोड़पति बनना है तो नौकरी छोडिये…….
- क्षमा करना क्यों है ज़रूरी?
- जीवन में लक्ष्य का होना ज़रूरी क्यों है ?
- 7 Habits जो बना सकती हैं आपको Super Successful
- स्वयं से प्रेम करें …………
- कैसे जलाये रखें अपने अन्दर की चिंगारी को- Chetan Bhagat
- 20 मिनट में जानें अपने जीवन का उद्देश्य
- कैसे डालें सुबह जल्दी उठने की आदत
- क्या है आपका सबसे महान गुण ?
Didyou like “किशोरअवस्था में माँ-बाप से नहीं बनती तो… बच्चे “सावधान” ! | Teen agers ki mistakes” यह पोस्ट आपको कैसा लगा ? Please share your comments.
यदि आपके पास Hindi में कोई article, inspirational story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: achhikhabar@gmail.com.पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks

bahu hi achi knowledge apne share ki hai mujhe achi lgi aage bhi share krte rahe
This article highlights teenage mistakes in a very relatable and thoughtful way. I appreciate how it encourages self awareness, better decision making, and personal growth without sounding overly critical. The practical lessons shared here can truly help young people build confidence, avoid common pitfalls, and create a more positive and successful future for themselves.
आजकल Teenagers गलती नहीं, जल्दी फैसले ज्यादा लेते हैं। इस article ने reality बहुत simple तरीके से समझाई। हर student और parent को एक बार जरूर पढ़ना चाहिए। thanks for sharing it 💐
Great insights shared in this blog.
AchhiKhabar is an amazing motivational website with inspiring Hindi articles and positive thoughts. The content is meaningful, easy to understand, and encourages readers to stay motivated and focused in life daily.