जौन एलिया का जीवन परिचय, शायरी, संघर्ष और रोचक तथ्य | Jaun Elia Biography in Hindi

मोहब्बत, तन्हाई, दर्द, बगावत और ज़िंदगी की गहरी सच्चाइयाँ शब्दों में पिरोने वाला जादूगर “जौन एलिया“. उर्दू शेर और शायरी के इस महारथी की Fan Following बहुत तगड़ी है.
Social Media पर इनका लिखा हुआ कंटेंट सदाबहार ट्रेंडिंग रहता है. ज़िंदगी में अगर किसीने सच्चा प्यार किया है, किसी को खोया है, किसी ख़ास को पाया है, तो Jaun Elia की Poetry… और शेर-शायरी ज़रूर पढ़नी चाहिए.
इस लेख में हम उनके के जीवन, साहित्यिक सफर, निजी लाइफ, प्रसिद्ध शायरी और उनसे जुड़े बहुत से रोचक तथ्यों के बारे में संक्षिप्त में जानेंगे, तो आइए सफ़र शुरू करें… (Jaun Elia Biography in Hindi)
”
दिल-ए-बर्बाद को आबाद किया है मैंने…
आज मुद्दत के बाद तुम्हे याद किया है मैंने…
जौन एलिया कौन थे?
ज़माना कहता है जौन एलिया एक प्रसिद्ध उर्दू शायर, लेखक, दार्शनिक और विद्वान थे, लेकिन उन्हें पढ़ने वाले कहते हैं कि वे कोई फरिश्ते थे… प्रेम, करुणा और त्याग जैसी पवित्र भावनाओं को शब्दों में पिरो कर आम लोगों का मार्गदर्शन करने वाले एक… “ऐंजल“
उर्दू साहित्य के यह महारथी समाज, इंसानी रिश्तों, अकेलेपन और जीवन के दर्शन को सटीकता से समझाते थे. उनकी शायरी केवल प्रेम और आकर्षण तक सिमित नहीं थी.
जन्म और प्रारंभिक जीवन

लगभग हर आयु के लोगों के दिलों में राज करने वाले जौन एलिया भारतीय थे. उनका जन्म 14 दिसंबर 1931 को उत्तर प्रदेश (India) के अमरोहा में हुआ था. बड़ी छोटी उम्र में ही उन्हें शेर और शायरी में मन लग गया, उनके परिवार की विरासत भी इसी पेशे से रही. अभयास में भी वे अव्वल थे.
शिक्षा और भाषाओं का ज्ञान
जौन एलिया हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, अरबी, फ़ारसी सहित कईं भाषाओँ का ज्ञान रखते थे. दर्शन, इतिहास, धर्म और साहित्य जैसे विषयों को जैसे उन्होंने सिद्ध कर लिया था, उनकी रचनाओं से पता चलता है कि वे आला दर्जे के पोएट रहे हैं.
पाकिस्तान चले जाने का फैसला
भारत के विभाजन के कुछ वर्षों बाद जौन एलिया पाकिस्तान रहने चले गए, उनकी सोच और शायरी दोनों पर इसका गहरा प्रभाव दिखा, ऐसा करने का कारण जो भी हो, लेकिन उनके चाहने वाले दुनियां के हर कोने में मौजूद है.
Jaun Elia ने कब की शायरी की शुरुआत
लिखना तो उन्होंने बचपन से शुरू कर दिया, लेकिन उनकी पहली Book बहुत समय बाद रिलीजी हुई, पर उनका क्लास ही ऐसा है कि Top उर्दू शायरों में उनका नाम आज शुमार है.
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नहीं दुनियां को परवाह हमारी…
तो हम दुनियां की परवाह क्यूं करें…
जौन एलिया की शायरी इतनी पॉपुलर क्यूँ !
उनकी शायरी में दर्द, मोहब्बत, तन्हाई, आत्मचिंतन और विद्रोह का मनमोहक मिश्रण मिलता है. वे मुश्किल हालात और मन की भावनाओं को सरल शब्दों में बैठाने का हुनर रखते थे. यही कारण है कि वे लगभग हर एक ऐज के लोगों को, बड़ी आसानी से प्रभावित कर देते हैं.
निजी जीवन
जौन एलिया का निजी जीवन उठापटक से भरा रहा. ववैवाहिक जीवन में उन्होंने खूब कष्ट सहे. उनके रिश्तों के संघर्षों का दर्द, अकेलापन और करूणा उनकी शायरी से साफ़ झलकते हैं. इस High Value Poet ने अपने जीवनकाल में शायद, यानी, गुमान, लेकिन और गोया जैसी किताबों की रचना की है.
जौन एलिया की विरासत
आज जौन एलिया केवल एक शायर नहीं बल्कि एक मुकम्मल सोच बन चुके हैं. वे दुनियाँ से जा चुके, लेकिन उनके शब्द आज भी लोगों की धड़कनों को बढ़ाने का काम करते हैं. समय बीतने के साथ उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है. जो लोग सीधे मुह अपने एहसास बयां नहीं कर पाते, वे Jaun की शायरियों का सहारा ले लेते हैं.

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सताने मनाने तक तो ठीक था…
मगर रुलाना ज़रूरी था क्या…?
निष्कर्ष
भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग बहुत अकेले पड़ जाते हैं. दुनियां की भीड़ तो है, लेकिन सब को मन की बातें बताना भी मुमकिन कहाँ होता है?
ऐसे हालात में जौन एलिया और इनके जैसे शायरों की बातें दिल को सुकून के 2 पल दे जाती है,
लोगों को ऐसा लगता है मानो, उनसे मन की बात हो रही, जिसे देख कर कभी दुनियाँ रंगीन नज़र आती थी.
दुनियाँ के मेले में बहुत से लोग मिलते हैं, फिर बिछड़ जाते हैं. जब भी ऐसे किसी ख़ास कि याद सताए तो जौन एलिया की रचनाएँ अवश्य पढ़नी चाहिए.
जौन एलिया के कहे Top 10 Quotes
1.
ना-उमीदी की उँगली पकड़े हुए
हम बहुत दूर तक आ गए हैं…
विस्तार : कईं बार अंधकार होते हुए भी, मन में आस होती है, की सब सही हो जाएगा, इन्सान लंबे अर्से तक कोशशि करता रहता है.
2.
मैं भी बहुत अजीब हूँ, इतना अजीब हूँ कि बस
ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं!
विस्तार : किसी लक्ष्य की चाह में इन्सान खुद की अहेमियत खो देता है, लेकिन इच्छाशस्क्ति इतनी तीव्र होती है कि स्वयं के नुकसान का अफ़सोस भी नहीं होता.
3.
बहुत नज़दीक आती जा रही हो
बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या?
विस्तार : हर इन्सान का एक बर्ताव होता है, उसमें अचानक आया बदलाव सामान्य नहीं होता.
4.
तुम जब आओगी तो खोया हुआ पाओगी मुझे
मेरी तन्हाई में ख़्वाबों के सिवा कुछ भी नहीं…
विस्तार : यहाँ व्यक्ति के गहरे प्रेम में होने की बात कही गई है, जो वास्तविक दुनियां से दूर तन्हा ख्वाबों में डूबा हुआ है.
5.
कौन इस घर की देख-भाल करे
रोज़ एक चीज़ टूट जाती है!
विस्तार : कईं बार हम एक मसला ठीक करें, तो दूसरा खड़ा हो जाता है, इसी बात पर poet उदासीनता दर्शा रहा है.

6.
मुझको तो कोई टोकता भी नहीं
यानी मैं कुछ ग़लत नहीं करता?
विस्तार : यहाँ शायर घोर अकेलेपन की बात कर रहा है, क्यों की गलतियां करना इन्सान का स्वभाव है, पर कोई टोकने वाला साथ नहीं.
7.
नया इक रिश्ता पैदा क्यों करें हम?
बिछड़ना है तो झगड़ा क्यों करें हम?
विस्तार : जाने वाले अचानक नहीं जाते, पहले मन से जा चुके होते हैं, तो फिर गुस्सा किस बात का.
8.
हम जो अब के बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें।
विस्तार : एक बार रिश्ते में आई खटास आसानी से नहीं जाती, बेहतर है संभल कर निभाएं.
9.
शर्मिंदा हूँ कि उसने मुझे भूल जाने को कहा
और मैं अब तक उसे याद किए बैठा हूँ!
विस्तार : प्रीत और आत्मसम्मान का कोई मेल नहीं, इन्सान अक्सर इस भाव में बे हया बन जाता है, मोह के धागे आसानी से नहीं छूटते.
10.
उस से मिलना तो ख़ैर क्या होगा
दिल ही मान जाए तो बड़ी बात है!
विस्तार : अब व्यक्ति को अपने प्रियतम से मिलने की कोई आस नहीं, बस दिल इस बात को मान जाए उतना ही काफी हो.
”
मैं तुम्हारे दम से ही ज़िंदा हूँ…
मर ही जाऊं जो तुमसे फुरसत हो..
QNA (जौन एलिया की Life Story)
Q – जौन एलिया कहाँ के रहनेवाले थे?
A – वे उत्तर प्रदेश (India) के अमरोहा में रहते थे, फिर पाकिस्तान चले गए.
Q – Jaun Elia किस लिए मशूहर थे? क्या करते थे?
A – वे एक प्रसिद्ध उर्दू शायर, दार्शनिक और लेखक थे.
Q – जौन एलिया कब जन्मे थे? कब उनकी मौत हुई?
A – जन्म: 14 दिसंबर 1931 (अमरोहा, उत्तर प्रदेश, भारत) और मृत्यु: 8 नवंबर 2002 (कराची, पाकिस्तान).
Q – Jaun Elia ने कब शायरी शुरू की?
A – जब वे केवल 8 साल के थे.
Q – उर्दू शायर जौन एलिया कैसी सोच रखते थे?
A – वे कट्टर मार्क्सवादी-कम्युनिस्ट थे, उन्हें भारत-पाक विभाजन पसंद नहीं आया था, पर 1957 में पाकिस्तान गए.
Q – Jaun Elia का वैवाहिक जीवन कैसा रहा?
A – वर्ष 1970 में लेखिका ज़ाहिदा हिना से उनका विवाह हुआ और 1992 में वे अलग हो गए.
Q – Jaun Elia की पहली किताब या संग्रह कब प्रकाशित हुआ?
A – कृति का नाम था “शायद” (वर्ष 1989 में लगभग 58-60 वर्ष की आयु में प्रकाशित हुआ).
Q – जौन एलिया की पहली Book इतनी लेट क्यों प्रकाशित हुई थी?
A – वे आमिर खान के जैसे परफेक्शनिस्ट स्वभाव के थे और उन्हें शोहरत के प्रति ख़ास लगाव नहीं था, तो उदासीनता के चलते वे बहुत लेट पॉपुलर हुए.
Q – जौन एलिया के मुशायरे का अंदाज कैसा था?
A – अपने बालों में हाथ फेरना और सीधे दर्शकों से संवाद करना उनकी पहचान थी.
Q – खालिद अहमद अंसारी कौन थे, उन्होंने क्या किया?
A – जौन एलिया के निधन के बाद खालिद अहमद अंसारी ने उनकी अप्रकाशित रचनाएँ संकलित कीं थी.
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