अलौकिक रक्षा बंधन
(एक आध्यात्मिक प्रेरणादायक कहानी)

रक्षाबंधन का पावन पर्व था। सोनाली ने बड़े प्रेम से अपने भाई राहुल की कलाई पर राखी बाँधी और मुस्कुराते हुए कहा,
“भैया, वादा कीजिए कि आप हमेशा मेरी रक्षा करेंगे।”
राहुल ने तुरंत कहा, “ज़रूर, यह मेरा वचन है।“
फिर सोनाली ने मुस्कुराते हुए पूछा, “लेकिन भैया, आपकी रक्षा कौन करेगा?”
राहुल हँसकर बोला, “तुम करोगी।” दोनों हँस पड़े।
राखी बाँधने के बाद दोनों घूमने निकल गए। राहुल बाइक चला रहा था।
दोनो त्योहार की उमंग उत्साह में थे। राहुल काफी तीव्र गति से ड्राइविंग कर रहा था।
(Alaukik rakshabandhan story hindi)
मगर अचानक ही उसने देखा सामने से तेज़ गति से एक बस आ रही है।
राहुल घबरा गया और मन ही मन भगवान को याद करने लगा।
ड्राइवर ने समय रहते ब्रेक लगा दिए और एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। दोनों बाल-बाल बच गए।
दोनों ने एक साथ ऊपर देखकर कहा, “थैंक गॉड!”
फिर दोनों ने एक-दूसरे की ओर देखा और मन में एक ही प्रश्न उठा—
” हम अपनी ही रक्षा नहीं कर सकते हैं तो फिर अपनों की रक्षा कैसे करेंगे?”
तभी उनकी नज़र सामने लगे एक बोर्ड पर पड़ी
—”प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय।“
उत्सुकतावश वे अंदर चले गए और वहाँ दीदी को पूरी घटना सुनाई।

दीदी मुस्कुराकर बोलीं, “आज परमात्मा ने आपको एक सुंदर संदेश दिया है।
रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम और पवित्र संबंध का प्रतीक नहीं है. बल्कि इसका अलौकिक महत्त्व भी है ।
वास्तव में हम सबका सच्चा रक्षक परमात्मा है। लेकिन परमात्मा भी उसकी रक्षा करते हैं,
जो स्वयं विकारों और बुराइयों से अपनी रक्षा करते हैं।
जब आत्मा पवित्र बन जाती है, तो उसका पवित्र आभामंडल (ऑरा) उसके लिए सुरक्षा-कवच बन जाता है
जिसके भीतर कोई भी नकारात्मक वस्तु, घटना या ऊर्जा प्रवेश नहीं कर सकती।” ।”
राहुल और सोनाली, दीदी की बातें बड़े ध्यान से सुन रहे थे।
फिर दीदी ने राहुल से कहा, “आज प्रतिज्ञा करो कि अपनी बहन की तरह हर नारी का सम्मान करोगे।”
दीदी ने सोनाली से कहा, “और तुम संकल्प करो कि जैसी शुभ भावना अपने भाई के लिए रखती हो, वैसी ही विश्व की हर आत्मा के प्रति रखोगी।”
अंत में दीदी ने दोनों से कहा, “आज परमात्मा से भी एक प्रतिज्ञा करो कि जीवनभर विकारों और बुराइयों से दूर रहोगे।

दीदी ने आगे समझाते हुए कहा जब हम अपने एक-एक संकल्प, बोल और कर्म को परमात्मा की श्रीमत के प्रमाण श्रेष्ठ करते हैं,
सदा स्वयं प्रति और सर्व प्रति शुभ और कल्याणकारी भावना रखते हैं,
विश्व की हर आत्मा के लिए मंगल कामना करते है, तो परमात्मा भी हमारी रक्षा का दायित्व अपने ऊपर ले लेते हैं।
इसलिए इस रहस्य को समझते हुए रक्षाबंधन को लौकिक के साथ-साथ अलौकिक रीति से भी मनाना चाहिए ।”
शिक्षा:
रक्षाबंधन का सच्चा अर्थ केवल एक-दूसरे की रक्षा का वचन देना नहीं,
बल्कि परमात्मा की श्रीमत पर चलकर अपने चरित्र, विचार और संस्कारों की रक्षा करना है।
यही सच्ची सुरक्षा है और यही परमात्मा की छत्रछाया प्राप्त करने का मार्ग है।
धन्यवाद

Name: Rima Gujral
Place: Delhi
Age: 59 years
Education: Master’s in CCE
Occupation: Retired Administrative Officer, OICL (VRS)
Email id : radheyrima1967@gmail.com
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