नीम करोली बाबा की जीवनी | Neem Karoli Baba Biography Hindi

एक ऐसे संत जो प्रचार के दम पर News Papers की सुर्खियों में नहीं थे. और तब Social Media का तो चलन ही नहीं था. फिर भी गाँव देहात से ले कर बड़े देशों के मेट्रो सीटी में बसने वाले सेलेब्रिटी उनके भक्त थे.
नीम करोली बाबा भले ही आज इस जगत में नहीं, लेकिन उनमें श्रद्धा रखने वाले लोग कहते हैं कि वो आज भी मौजूद है, अपने भक्तों के दुख दूर कर रहे हैं.
बचपन : UP (भारत) के अकबरपुर के रहने वाले लक्ष्मण नारायण शर्मा बाकि बच्चों से अलग थे, जहाँ बाकि लड़के खेल-कूद में समय बिताते, तो लक्ष्मण किसी कोने में बैठ कर ध्यान लगाते.
नीम करोली बाबा का जीवन परिचय
नाम: लक्ष्मण नारायण शर्मा
प्रसिद्ध नाम: नीम करोली बाबा, महाराज-जी
जन्म: लगभग 1900/1901, उत्तर प्रदेश के अकबरपुर क्षेत्र में
निधन: 11 सितंबर 1973, वृंदावन, उत्तर प्रदेश
प्रमुख आश्रम: कैंची धाम, नैनीताल, उत्तराखंड
आराध्य: भगवान हनुमान
शिक्षा/संदेश: प्रेम, सेवा, भक्ति और मानवत
केवल 11 वर्ष की आयु में उन्होंने घर छोड़ दिया.
घर छोड़ने का कारण कोई नाराज़गी नहीं थी, ना ही कुछ सांसारिक वस्तु को पाने की लालसा, वे तो बस आध्यात्मिक यात्रा पर निकले, ऐसी यात्रा जो उन्हें आम व्यक्ति से सिद्ध पुरुष बनने के सफर पर ले गई.
कच्ची उम्र में ही उन्होंने अपने सिद्धांत बना लिए, साधना उनकी सांस बन चुकी थी और सेवा को उन्होंने अपना परम धर्म मान लिया.
विचरण : नीम करोली बाबा कुम्भ मेला में भी दीखते थे, इसके अलावा वे हिमालय की दुर्गम कंदराओं में दिनों दिन ध्यान किया करते थे.
ईश्वर को पूर्ण रूप से समर्पित होने के बाद भी महाराज – जी ने कभी यह दावा नहीं किया कि वे ईश्वर का रूप है. लोगों ने ही उन्हें इतना प्रेम दिया, की वे पूजे जाने लगे.
बाबा कभी चमत्कार की बातों को बढ़ावा नहीं देते थे, वे हमेशा परोपकार और दयाभाव की बात करते.
सेवा करने का संदेश देते थे, लेकिन फिर भी उनके आसपास होने वाली घटनाएं चमत्कार से कम नहीं होती थीं.
कैंचीधाम आश्रम की स्थापना

इस आश्रम की स्थापना 1960 में हुई. बाबा ने नैनिताल के पास एक खास जगह का चुनाव किया. उनका मत यह था कि, दो नदियों के संगम की वह जगह, तपस्या के लिए उत्तम है. आज वही जगह कैचीधाम के नाम से प्रसिद्ध है.
Apple फाउंडर स्टीव जॉब्स की आस्था
जब कैंची धाम की स्थापना हुई तो वहां पहले लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं आती थी, वहां केवल कुछ साधक, शिष्य और ग्रामीण लोगों की भीड़ रहती थी.
उसी ज़माने में करीब 1974 में स्टीव जॉब्स भारत आए. उनका मन व्याकुल था, मनचाही सफलता नहीं मिल रही थी.
उनकी मनोकामना थी की बाबा से मुकालात हो, लेकिन तब तक नीम करोली बाबा दुनियां से जा चुके थे. फिर भी स्टीव ने वहां बहुत समय बिताया,
कहा जाता है कि वहिं उन्हें… Apple ब्रांड की कल्पना हुई, और आज उसकी वैल्यू क्या है, यह आप Google कर सकते हैं.
Facebook के मालिक मार्क ज़करबर्ग का अनुभव भी अच्छा रहा, शांति और स्पष्टता चाहिए तो नीम करोली बाबा के धाम जाना चाहिए, यह सीख मार्क को Apple फाउंडर स्टीव जॉब्स ने ही दी थी. उन्होंने वैसा ही किया.
नीम करोली बाबा की सीख
बाबा कहते हैं, किसी से भी घृणा न करो, राम नाम जप करो, यथा संभव लोगों की मदद करो. मुझे मंदिरों में मत खोजना, मैं उन लोगों के दिलों में बसता हूँ जो दूसरों की सेवा करते हैं, क्षमा देने का स्वभाव रखते हैं. अकेले पड़ जाजो तो सच्चे मन से याद करना, शरीर से बाबा गए हैं, मन से नहीं.
नीम करोली बाबा के Lesser Known Facts
महाराज जी ज्ञान को बहुत सरल शब्दों में लोगों को समझाने की महारत थी.
उन्हें अपना प्रचार-प्रसार नहीं करना पड़ता था, उनके पर्चे और लोगों के अनुभव के कारण ही वे प्रसिद्ध हुए.
बाबा के उपदेश किसी ग्रन्थ से रटे-रटाये नहीं होते थे, वे तार्किक और धर्म-युक्त बात करते थे, इसी लिए उनकी बातें लोगों के दिलोँ को छू लेती थीं.
उनकी शिक्षा और करुणा एक धर्म तक सीमित नहीं थी, वे राम नाम में विश्वास रखते थे, फिर भी मुस्लिम, ईसाई और अन्य धर्मों के लोगों से भी, वैसा ही प्रेम करते थे.
भूखे को भोजन दो, प्यासे को जल और दुखी को दिलासा दो, इसी सिद्धांत पर बाबा चलते थे.
जनसेवा को वे बहुत मान देते थे, भूखे को भोजन कराना, ईश्वर को अन्न अर्पण करने जैसा है. बाबा हमेशा सादा भोजन करते, सिमित मात्रा में अन्न खाते थे.
भक्तों को तृप्त देख् कर उन्हें बहुत आनंद मिलता था, वे खुद इस बात का ध्यान देते, की उनके धाम से कोई दुखी या भुख्या न जाए.
नीम करोली बाबा को हनुमान जी का अवतार कहा जाता है. उनका जीवन, वाणी, नियम और श्रद्धा सब गुण बजरंगबली के चरित्र से मेल खाते दीखते थे.
बाबा सदैव हनुमान चालीसा पढ़ते, और कहते, मैं उन सब की मदद करने का प्रयास करता हूँ, जो सच्चे मन से मुझे पुराकते हैं.
महाराज जी जब ध्यान मग्न होते थे, तो उनके आसपास अग्नि जैसा माहौल बन जाता था, जहाँ पास रहना आम लोगों के लिए मुमकिन नहीं होता था. यह उनके तप का प्रताप था.
बाबा से यह सवाल अक्सर होता था, की क्या वे हनुमान जी हैं? तब वे मुस्कुरा कर कहते, मैं कुछ नहीं, बस यह सब बजरंगबली की कृपा है.
कहते हैं बाबा के आश्रम में जो भी गया, वो वैसा ही नहीं लौटता, उनमें सकारात्मक ऊर्जा और प्रेम का संचार हो जाता है, वहां जाने वाला व्यक्ति करुणा और सद्भावना से भर जाता है.
Neem Karoli Baba के चमत्कार

रिचर्ड एलपर्ट (हारवर्ड यूनिवर्सिटी प्रोफ़ेसर)
यह अंग्रेज प्रोफ़ेसर भारत यात्रा करता है, वह साइकेडेलिक ड्रग (Psychedelic drugs) पर रिसर्च करता था.
उसके मन में यह प्रश्न था कि LSD (Lysergic acid diethylamide) शांति पाने के लिए, अधिक तर्क संगत है, या ध्यान, ईश्वर, शांति और आस्था का महत्त्व ज्यादा है.
उसने बाबा की परीक्षा करनी चाही और उन्हें LSD की ढेर सारी गोलियां खिला दी, आम आदमी इतनी मात्रा ले कर शायद अपना संतुलन ही खो दे, पर बाबा को कुछ भी नहीं हुआ. ये देख् कर प्रोफ़ेसर चौक गया, उसने बाबा से पुछा की यह कैसे हुआ?
तब नीम करोली बाबा बोले, जो तुम खोज रहे हो, वो ध्यान में मिलेगा, इसमें नहीं.
वो प्रोफ़ेसर आज “रामदास” के नाम से प्रसिद्ध है, उन्होंने, बाबा के ज्ञान को पश्चिम में फैराया. अपने अनुभव बताए, लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया. वे किताब भी लिख चुके हैं नाम है “Be Here Now”.
उत्तराखंड में हवा में ध्यान और एक हादसा
कहा जाता है की उत्तराखंड के एक छोटे से गाँव में किसी गुफा में बाबा ध्यान में लिप्त थे, उन्होंने साफ़ कहा कि एकांत भंग न हो, लेकिन उत्सुकता में आ कर एक युवक “गोपाल” भीतर चला गया,
उसने देखा, नीम करोली बाबा हवा में थे और ध्यान मुद्रा में थे, यह देख कर वो स्तब्ध हो गया, फिर वहां एक दुर्घटना हुई, उसका सिर पत्थर से टकराया और युवक की वहिं मौत हो गई.
कहते हैं कि नीम करोली बाबा को जब यह बात पता चली, तो उन्होंने उसके माथे पर हाथ फिरा कर, उसे जीवित कर दिया था. यह आज भी उस गाँव की लोककथा है.
नीम करोली बाबा की तीर्थ यात्रा
एक बार महाराज जी पहाड़ी रास्ते से एम्बेसेडर में सवार हो कर जा रहे थे.
गाड़ी की रफ़्तार तेज थी, ड्राइवर ने संतुलन खोया, कार बस खाई में गिरने ही वाली थी, तभी तेज़ हवा कार से टकराई और गाड़ी सुरक्षित राह की और आ गई.
इस घटना से सभी कार सवार चौक गए. उन्हें यह विश्वास हो गया कि नीम करोली बाबा की कृपा के कारण ही उनकी जान बची.
चिंतित नाई पर बाबा की कृपा
एक बार एक बार्बर के पास बाबा आए. नाई इस बात से दुखी था, की उसका बेटा 1 माह से, किसी काम के चलते घर से बाहर था,
बाबा ने कहा, तेरा बेटा 2 दिन में घर लौटेगा, बेटे ने घर आते ही कहा, मैं घर वापसी के पैसे जुटाने में लगा था, तभी एक बाबा आए, पैसे हाथ में थमाए और अदृश्य हो गए, अब वे कौन थे, यह सवाल व्यर्थ था.
बाप बेटे दोनों को समझ आ गया था कि महाराज – जी की कृपा के कारण ही यह सब हो पाया था.

14 सितंबर 1973 को बाबा ने शरीर त्याग दिया
ना कोई कष्ट, ना कोई गंभीर बीमारी, बस शरीर त्याग दिया, देह तो नष्ट होने के लिए ही बनी ही, लेकिन उनके विचार, उनकी भावनाएं, सीख और उपदेश लोगों के मन में सदैव जीवित रहेंगे. कहा जाता है, उनकी चिता से कोई तेज प्रकाश बाहर निकला था.
कैची धाम जाना, वहां वीडियो शूट करना, सोशल मीडिया पर उनके बारे जानकारी बताती रिल्स सोशल मीडिया पे डालना, यह सब काफी नहीं,
अगर हकीकत में अपने जीवन में सुधार चाहिए, अपना परलोक सुधारना है, तो उनके दिए हुए सिद्धातों पर चलना चाहिए, सेवाभाव और परोपकार की राह को अपनाना चाहिए.
QNA (नीम करोली बाबा की लाइफ स्टोरी)
Q – नीम करोली बाबा का सब से प्रसिद्ध आश्रम (धाम) कौनसा है?
A – उनका सब से प्रसिद्ध आश्रम “कैंची धाम” बताया जाता है.
Q – नीम करोली बाबा की सब से प्रसिद्ध सीख क्या है?
A – उनकी सब से प्रसिद्ध सीख है…
“सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करो, भगवान को याद रखो”
Q – नीम करोली बाबा क्यूँ प्रसिद्ध हुए?
A – वे स्वभाव से अत्यंत सेवाभावी थे, साथ ही उनके चमत्कार भी भक्तों को खूब आकर्षित करते थे.
Q – नीम करोली बाबा कब जन्मे थे?
A – उनका जन्म 1900 या1901 में उत्तर प्रदेश के अकबरपुर क्षेत्र में हुआ था और जन्म से उनका नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था.
Q – नीम करोली बाबा का निधन कब हुआ था?
A – वे 11 सितंबर 1973 के दिन वृंदावन, उत्तर प्रदेश में देह त्याग कर दिए थे.
Q – नीम करोली बाबा का अन्य नाम बताएं?
A – उन्हें लोग महाराज-जी भी बुलाते हैं.
Q – नीम करोली बाबा के आश्रम कौन कौन सी प्रसिद्ध हस्तियां आ चुकी है?
A – Apple Inc. कंपनी के संस्थापक स्टीव जॉब्स और फेसबूक फाउंडर मार्क जुकरबर्ग नीम करोली बाबा के आश्रम पर विजिट कर चुके हैं.
Q – लक्ष्मण नारायण शर्मा जो नीम करोली बाबा कहे गए उनके प्रमुख आश्रम के नाम बताएं?
A – कैंची धाम, नैनीताल, और उत्तराखंड में उनके प्रमुख आश्रम है.
Q – महाराज जी उर्फ़ नीम करोली बाबा लोगों को क्या संदेश देते थे?
A – वे प्रेम, सेवा, भक्ति और मानवता की बात सिखाते थे.
Q – नीम करोली बाबा किसकी भक्ति करते हैं?
A – वे भगवान हनुमान के भक्त थे.
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अभी के टाइम Internet है, लेकिन महाराज जी के समय ये सब नहीं था, फिर भी लोग उनसे प्रभावित हुए, इसका मतलब साफ है, उनमें कुछ तो बात होगी ही, Must Visit kaichi dham