अंधा घोड़ा
शहर के नज़दीक बने एक farm house में दो घोड़े रहते थे. दूर से देखने पर वो दोनों बिलकुल एक जैसे दीखते थे , पर पास जाने पर पता चलता था कि उनमे से एक घोड़ा अँधा है. पर अंधे होने के बावजूद farm के मालिक ने उसे वहां से निकाला नहीं था बल्कि उसे और भी अधिक सुरक्षा और आराम के साथ रखा था. अगर कोई थोडा और ध्यान देता तो उसे ये भी पता चलता कि मालिक ने दूसरे घोड़े के गले में एक घंटी बाँध रखी थी, जिसकी आवाज़ सुनकर अँधा घोड़ा उसके पास पहुंच जाता और उसके पीछे-पीछे बाड़े में घूमता. घंटी वाला घोड़ा भी अपने अंधे मित्र की परेशानी समझता, वह बीच-बीच में पीछे मुड़कर देखता और इस बात को सुनिश्चित करता कि कहीं वो रास्ते से भटक ना जाए. वह ये भी सुनिश्चित करता कि उसका मित्र सुरक्षित; वापस अपने स्थान पर पहुच जाए, और उसके बाद ही वो अपनी जगह की ओर बढ़ता.

दोस्तों, बाड़े के मालिक की तरह ही भगवान हमें बस इसलिए नहीं छोड़ देते कि हमारे अन्दर कोई दोष या कमियां हैं. वो हमारा ख्याल रखते हैं और हमें जब भी ज़रुरत होती है तो किसी ना किसी को हमारी मदद के लिए भेज देते हैं. कभी-कभी हम वो अंधे घोड़े होते हैं, जो भगवान द्वारा बांधी गयी घंटी की मदद से अपनी परेशानियों से पार पाते हैं तो कभी हम अपने गले में बंधी घंटी द्वारा दूसरों को रास्ता दिखाने के काम आते हैं.
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Note: The inspirational story shared here is not my original creation, I have read it before and I am just providing the Hindi version of the same.

Zabardaast
very nice sir
jai hind
उस सच्चिदानंद की अनुकम्पा के बिना हमारा जीवन अधूरा है और बुद्धिजीवी होने के कारण हमारा यह पूरा दायित्त्व बनता है कि हम उस परमात्मा की सृजित सृष्टि को सुन्दर बनाये रखने में अपना यथासंभव योगदान सदा बनाये रखें |
आभार
रजनी सडाना
संकेतों से प्रकृति बोलती..
REALY GREAT……GUYS GOD IS ALWAYS WITH US…..
BELIVE IN GOD…..UR PARENTS ARE YOUR GOD…….
THIS ARTICLE WAS REALLY VRY GOOD…..
thanxx……..
Bilkul Sahi story hai, hum sabhi bhagwan ne banaye huye hain, mein sirf ek baat kehna chahta hoon ki agar koi bhi insaan gold ki Brick mein se agar 1 chhota sa part bhi todega toh vo Gold hi hoga, bhale hi uss Brick ke hazaron tukde kar diye jayen aur har tukda bhi Gold hi hoga na ki Iron, ussi tarah hum bhi bhagwan ke hi tukde hain,aur hum bhi bhagwan ke banaye huye gold ki tarah hain. par hamari halat pata nahi kyun ekdum garibon aur bhikhriyon jaisi ho gayi hai, jaise hi mandir jaate hain, puja toh koi nahi karta jaate hi bhagwan se vo cheeje mangna start kar dete hain, jo ki bekar hain, kabhi bhi koi bhagwan se bhakti nahi mangta……….
बिल्कुल सही
हम कभी-कभी आँख होते हुए भी अंधे और कान होते हुए भी बहरे हो जाते हैं .
Excellent, Bahut Gyanvardhak………..
It’s really true.