Hi friends,
आज मुझे एक बड़ी ही interesting mail मिली. इसे पढने के बाद मेरी Decision Making या निर्णय लेने की क्षमता के विषय में समझ और भी बेहतर हुई है. इसलिए मैं इसे आपके साथ भी share कर रहा हूँ. उम्मीद है आपको भी फायदा होगा. पहले मैं उस mail को आपके साथ as it is share करूँगा और अंत में मैं उससे मिलने वाली सीख को point out करूँगा.
मान लीजिये की आपके सामने एक समस्या है :
कुछ बच्चे रेलवे ट्रैक के आस पास खेल रहे हैं. इनकी उम्र 8 -10 साल के लगभग है. उनमे से तीन बच्चे एक ऐसे ट्रैक पर खेल रहे हैं जो functional है , यानी उसपे ट्रेनें आती जाती हैं, जबकि एक अकेला बच्चा उसके बगल वाले ट्रैक पर खेल रहा है जो unused है यानि बहुत समय से प्रयोग में नहीं है.
एक पैसेंजर ट्रेन तीव्र गति से functional पटरी पर आ रही है, सौभाग्य से आप ट्रैक बदलने वाली जगह पर खड़े हैं.आप ट्रेन का मार्ग बदल कर उसे unused track पर भेज सकते हैं और तीनो बच्चों की जान बचा सकते हैं. लेकिन इसके लिए आपको अकेले खेल रहे बच्चे की कुर्बानी देनी होगी. या आप उस ट्रेन को अपने मार्ग पर जाने दे सकते हैं?
ऐसी दशा में आप क्या decision लेंगे ……………. (अपना उत्तर सोचने के बाद नीचे scroll कर के जाइये )
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शायद ज्यादातर लोग ये निर्णय लें कि ट्रेन का मार्ग बदल कर उसे unused track पर भेज दिया जाये , ताकि सिर्फ एक ही बच्चे कि मौत हो और बाकी बच जाएं. शायद आप भी यही decision लें. बिलकुल, एक बच्चे की अपेक्षा अधिक बच्चों की जान बचाना ज्यादातर लोगों की समझ से एक उचित निर्णय होगा, morally और emotionally भी. पर क्या आपने ये सोचा कि जो बच्चा unused track पर खेल रहा है उसने दरअसल एक सुरक्षित जगह खेलने का निर्णय लिया है?
पर फिर भी उसकी कुर्बानी दी जा रही है क्योंकि उसके कुछ बेवकूफ दोस्त ऐसी जगह खेल रहे हैं जहाँ खतरा है . इस तरह की असमंजस की इस्थिति हमारी ज़िन्दगी में आये दिन आती रहती है. Office में, समाज में, politics में , ख़ासतौर से जहाँ democracy हो , अक्सर मुट्ठी भर सही लोगों को बहुत सारे गलत लोगों के हित के लिए बलिदान कर दिया जाता है.इस case में जो बच्चा functional track पर ना खेल के एक unused tack पर खेल रहा था उसको sacrifice कर दिया जाता है, और कोई इतना दुखी भी नहीं होता है.
महान आलोचक Leo Velski Julian जिन्होंने ये कहानी बतायी उनका कहना है कि वो ट्रेन का ट्रैक नहीं बदलेंगे क्योंकि उनका मानना है कि जो बच्चे functional track पर खेल रहे थे उन्हें अच्छी तरह पता होगा कि इस ट्रैक पर ट्रेनें आती जाती हैं , और जब वो ट्रेन का साइरन सुनते तो पटरी पर से भाग जाते …अगर ट्रेन का मार्ग बदल दिया जाये तो उस अकेले बच्चे की मौत पक्की थी क्योंकि उसे इस बात का अंदाजा ही नहीं होता की ट्रेन उस ट्रैक पर भी आ सकती है. और चूँकि वो ट्रैक use में नहीं था तो सम्भावना है कि वो सुरक्षित नहीं रहा होगा. अगर ट्रेन उस ट्रैक की तरफ मोड़ दी जाती तो शायद उसमें बैठे सैकड़ों यात्रियों की जान भी खतरे में पड़ जाती.
हम अच्छी तरह से जानते हैं कि life में हमें कई बार tough decisions लेने पड़ते हैं , लेकिन शायद हम ये नहीं realize करते कि जल्दबाजी में लिए गए decisions हमेशा सही नहीं होते.याद रखिये जरूरी नहीं है कि जो सही हो वो लोकप्रिय हो और जो लोकप्रिय हो वो सही हो .
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हम यहाँ से क्या सीख सकते हैं:
- जहाँ तक संभव हो जल्दबाजी में निर्णय ना लें. जाहिर है यदि आप सचमुच ऊपर दी गयी या उस जैसी किसी स्थिति में होंगे तो आपको तुरंत ही अपना decision लेना होगा. पर कई बार ऐसा होता है की जहाँ हम अपने निर्णय के लिए समय निकाल सकते हैं वहां भी तुरंत ही आनन्-फानन में कोई निर्णय ले लेते हैं और कहते हैं , ” जो होगा देखा जायेगा”
- कसी भी decision को लेने से पहले उस से सम्बंधित अधिक से अधिक जानकारी जुटा लें. Generally एक informed decision यूँ ही लिए गए decision से बेहतर होगा.
- जिस field से related decision आपको लेना है उसी field के किसी जानकार व्यक्ति से सलाह लेना उचित होगा.
- याद रखिये कि एक ही समस्या के कई समाधान हो सकते हैं, अक्सर हमारे दिमाग में जो पहला हल आता है हम उसी को पकड के बैठ जाते हैं, जबकि और भी कई अच्छे उपाय हो सकते हैं.
- Lateral thinking approach अपना कर एक चीज को कई angle से देखा जा सकता है, और तब एक innovative solution मिलने के chances बढ़ जाते हैं.
- कभी भी इस overconfidence में मत रहिये कि आपका decision ही best है. और भी अच्छे विकल्प हो सकते हैं.
- एक दूसरा पहलू ये भी है कि हो सकता है आपके द्वारा लिया गया decision ज्यादातर लोगों द्वारा oppose किये जाने के बावजूद एक सही decision हो .
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निवेदन :यदि आपके दिमाग में इस समस्या से सम्बंधित कुछ और interesting बातें आ रही हों तो comments के माध्यम से जरूर शेयर करें.
निवेदन : कृपया अपने comments के through बताएं की Decision Making पर आपको ये HINDI Article कैसा लगा.
यदि आपके पास English या Hindi में कोई good article, news; inspirational story या जानकारी है जो आप हमारे साथshare करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है :achhikhabar@gmail.com


Sir, It was one of the inspiring knowledge for todays Y-Gen and hopes to provide such
instances in near future also.
Best Regards
Anil
thanks Sir,Bahut achcha laga padh kar k
ओए सर-जी एक बात मेरी भी है जो जरा फंडामेंटल है आपकी इस कहानी कि तरह (मैंने इस कहानी को बचपन में पढ़ा था और अपने लिए अक्सर इस्तेमाल करता भी हू )
सर – जी मै आपकी तरह इतनी अच्छी-अच्छी बाते नहीं लिखकर लोगो को समझा सकता , पर हाँ आपके आर्टिकल्स को पढ़ कर और ये जो हिंदी में आपको मेसेज लिख रहा हू , ये भी आप के ही कारण जो एक लेख में आपने लिखा था कि कैसे हिंदी में टाइप करे | धन्यवाद सर-जी |
यहाँ पर मै एक भारतीय प्रथा के बारे में आपसे कुछ कहना चाहता हू , पहले निचे के कुछ उदाहरण देखे
(1) राम
(2) कृष्ण
(3) इन्द्र
ये सब नाम पढकर आपके मन में कैसे चित्र उभरते है ???
अब जरा दुबारा पढ़िए
(1) राम सिंह
(2) कृष्ण यादव
(3) इन्द्र प्रसाद
अब कैसे चित्र उभरते है ???…………………
तो इन टाइटल से भगवान के नाम को भी साधारण दर्जा दे देते हैं, तो अगर इंसानों के नामों के साथ इसे जोडेंगे तो उनका स्तर क्या रह जाएगा ???
जातिप्रथा भारत का अभिशाप है …. दहेज प्रथा कि जड़ इसमें छुपी है ; कैसे ???
बेटी के बाप को अपनी ही बिरादरी के लड़के से शादी करने कि मजबूरी होती है , ये बिलकुल वैसी ही स्तिथि है जब आपको कोई आवश्यक वस्तु एक ही दूकान से खरीदने कि बाध्यता होती है | जाहिर है दूकानदार आपसे मनमाना दाम तो वसूलेगा ही | ……………… दीजिए दहेज लाखो-लाख …….
सर – जी आप इसपर जयादा गौर से सोच सकते है तथा अगर आपको अच्छा लगे तो आवश्यक सुधार के साथ लोगो के सामने ला सकते है | ……bye-bye Sirji
Thanks a lot for sharing this. Bahut achcha laga padh kar.
Hi
Good Mornig Gopalji,
I am a life coach at Indore M.P. and highly appreciating your effort on this blog and would love to talk to you.
Please call me at below nos. or mail me your contact details.
Regards
Anil Gahlot
Master Mind & Life Coach,
Skype ID:-anilgahlot0902
anil0902@gmail.com,
Thanks for your appreciation. You can contact and chat with me on achhikhabar@gmail.com
Bahut Achcha Artical h
Thanks
us jagah par mai bhi us 1 bachche ko heen bachane ki koshish karta par is story mein jo tark hai uska jawab nahi…lazawaaab hai. ye story nischit taur par future mein kafi profitable hogi. thanks for this post………
Man gye boss….
keep going on.
main track to change karta hi par pahle us bachche ko agah kar deta ki is track me train aane wali hai……kyuki tin bachho ko samjhne me jyada samay lagta aur ek bachcha jaldi samjh jata kyuki wo samjhdar hoga aur wo tin bachcho ki apeksha is bachche me jyada samjhdari hogi iskaran wo hamari baat jald se jald maan jata..
waah sach me ekdam umda sikh hai.Kam hani sahne ke lie kabhi hum galat nirnay bhi le lete hain.
सचमुच बहुत ही कठिन था कोई निर्णय लेना लेकिन आपने बहुत अच्छे ढंग से सबकुछ clear किया