Mulla Nasruddin Stories in Hindi
मुल्ला नसरुदीन के किस्से
माना जाता है कि मुल्ला नसरुदीन तुर्की में रहने वाला एक बुद्धिमान दार्शनिक था जिसे उसके किस्से कहानियों के लिए जाना जाता था. ओशो अक्सर अपने उपदेशों में मुल्ला के कहानी किस्सों का ज़िक्र किया करते थे.

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Mulla Nasruddin Story 1: मुल्ला का प्रवचन
एक बार मुल्ला नसरुदीन को प्रवचन देने के लिए आमंत्रित किया गया . मुल्ला समय से पहुंचे और स्टेज पर चढ़ गए , “ क्या आप जानते हैं मैं क्या बताने वाला हूँ ? मुल्ला ने पूछा .
“नहीं ” बैठे हुए लोगों ने जवाब दिया .
यह सुन मुल्ला नाराज़ हो गए ,” जिन लोगों को ये भी नहीं पता कि मैं क्या बोलने वाला हूँ मेरी उनके सामने बोलने की कोई इच्छा नहीं है . “ और ऐसा कह कर वो चले गए .
उपस्थित लोगों को थोड़ी शर्मिंदगी हुई और उन्होंने अगले दिन फिर से मुल्ला नसरुदीन को बुलावा भेज .
इस बार भी मुल्ला ने वही प्रश्न दोहराया , “ क्या आप जानते हैं मैं क्या बताने वाला हूँ ?”
“हाँ ”, कोरस में उत्तर आया .
“बहुत अच्छे जब आप पहले से ही जानते हैं तो भला दुबारा बता कर मैं आपका समय क्यों बर्वाद करूँ ”, और ऐसा खेते हुए मुल्ला वहां से निकल गए .
अब लोग थोडा क्रोधित हो उठे , और उन्होंने एक बार फिर मुल्ला को आमंत्रित किया .
इस बार भी मुल्ला ने वही प्रश्न किया , “क्या आप जानते हैं मैं क्या बताने वाला हूँ ?”
इस बार सभी ने पहले से योजना बना रखी थी इसलिए आधे लोगों ने “हाँ ” और आधे लोगों ने “ना ” में उत्तर दिया .
“ ठीक है जो आधे लोग जानते हैं कि मैं क्या बताने वाला हूँ वो बाकी के आधे लोगों को बता दें .”
फिर कभी किसी ने मुल्ला को नहीं बुलाया !
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Mulla Nasruddin Story 2: मुल्ला बने कम्युनिस्ट
एक बार खबर फैली की मुल्ला नसरुदीन कम्युनिस्ट बन गए हैं . जो भी सुनता उसे आश्चर्य होता क्योंकि सभी जानते थे की मुल्ला अपनी चीजों को लेकर कितने पोजेसिव हैं .
जब उनके परम मित्र ने ये खबर सुनी तो वो तुरंत मुल्ला के पास पहुंचा .
मित्र : “ मुल्ला क्या तुम जानते हो कम्युनिज्म का मतलब क्या है ?”
मुल्ला : “हाँ , मुझे पता है .”
मित्र : “ क्या तुम्हे पता है अगर तुम्हारे पास दो कार है और किसी के पास एक भी नहीं तो तुम्हे अपनी एक कार देनी पड़ेगी ”
मुल्ला : “ हाँ , और मैं अपनी इच्छा से देने के लिए तैयार हूँ .”
मित्र : “ अगर तुम्हारे पास दो बंगले हैं और किसी के पास एक भी नहीं तो तुम्हे अपना एक बंगला देना होगा ?”
मुल्ला : “ हाँ , और मैं पूरी तरह से देने को तैयार हूँ .”
मित्र :” और तुम जानते हो अगर तुम्हारे पास दो गधे हैं और किसी के पास एक भी नहीं तो तुम्हे अपना एक गधा देना पड़ेगा ?”
मुल्ला : “ नहीं , मैं इस बात से मतलब नहीं रखता , मैं नहीं दे सकता , मैं बिलकुल भी ऐसा नहीं कर सकता .”
मित्र : “ पर क्यों , यहाँ भी तो वही तर्क लागू होता है ?”
मुल्ला : “ क्योंकि मेरे पास कार और बंगले तो नहीं हैं , पर दो गधे ज़रूर हैं .”
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Mulla Nasruddin Story 3: मुल्ला और पड़ोसी
एक पड़ोसी मुल्ला नसरुद्दीन के द्वार पर पहुंचा . मुल्ला उससे मिलने बाहर निकले .
“ मुल्ला क्या तुम आज के लिए अपना गधा मुझे दे सकते हो , मुझे कुछ सामान दूसरे शहर पहुंचाना है ? ”
मुल्ला उसे अपना गधा नहीं देना चाहते थे , पर साफ़ -साफ़ मन करने से पड़ोसी को ठेस पहुँचती इसलिए उन्होंने झूठ कह दिया , “ मुझे माफ़ करना मैंने तो आज सुबह ही अपना गधा किसी उर को दे दिया है .”
मुल्ला ने अभी अपनी बात पूरी भी नहीं की थी कि अन्दर से ढेंचू-ढेंचू की आवाज़ आने लगी .
“ लेकिन मुल्ला , गधा तो अन्दर बंधा चिल्ला रहा है .”, पड़ोसी ने चौकते हुए कहा .
“ तुम किस पर यकीन करते हो .”, मुल्ला बिना घबराए बोले , “ गधे पर या अपने मुल्ला पर ?”
पडोसी चुप – चाप वापस चला गया .
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hame yah kahaniaya bahut accha laga yadi hamare paas koi acchi se kahania ho to hum aapko jarur denge
javab nhi mulla ji ki kahaniyo ka mulla ji ke jaisa comedians koi nhi
agar mulla ji kahaniyan pade to dukh mein bhi hansi aathi hai.
mull g tushi toh great joker ho
mulla pagal ke sath battmij bhi tha use koi accha sabak sikhane wala milna chahiye
Mian ji mein ek se ek intelligent log hue hain utna kisi dharm mein nahi, mullah sahab is great.
I like mulla nasruddin’s storeis its funny.
bahut mast story laga…
i like mullanasrudin funny storys
Mulla nasruddin vastav main ek majakyia insaan h