हजारों साल पुराना ईरान बनाम आज का संकट | Ancient vs Modern Iran Story Hindi

ईरान देश (Land of Aryans) वर्तमान समय में चर्चा का केंद्र बना हुआ है. इस राष्ट्र के लोग अपनी मेहमाननवाज़ी और अद्भुत शालीनता के लिए जाने जाते हैं.
विनम्रता और आदरभाव के लिए प्रख्यात यह लोग साहसी भी होते हैं. परिवार और मित्रता की सुरक्षा के नाम पर वे जान की बाज़ी भी लगा देते हैं.
धैर्य, साहस और आगे बढ़ने की भावना उन्हें दूसरों से अलग बनाती है. अपनी जड़ों से जुड़े रहने के बाद भी ईरानी लोग आधुनिक युग के साथ तालमेल बिठाना जानते हैं.
ईरान के पास कुदरती संपदा का अकूत खजाना है. शायद यही कारण है कि “ईरान”, जलनशील और धूर्त देशों के निशाने पर बना रहता है.
वे किसी न किसी तरह इनको तोड़ कर गैस, पेट्रोल, ऑयल और अन्य कीमती कुदरती तत्वों पर एकाधीर चाहते हैं, ताकि अपनी मोनोपॉली बना कर, दुनियां से मन चाहे दाम वसूल सकें. Tarrif और सैकड़ों सेंक्शन (प्रतिबंध) इसी काली नियत का उदहारण है.
Ancient vs Modern Iran Story Hindi यह Post ज्ञानवर्धक और रोचक होने वाला है तो चलिए Iran के इतिहास और वर्तमान पर जानकारी साझा करें.
ईरान की भौगोलिक जानकारी
यह देश बहुत से राष्ट्रों से सीमा साझा करता है. इस देश में अधिकतर शुष्क और अर्ध-शुष्क वातावरण रहता है. गर्मियां बेहद गर्म रहती हैं और वहां पहाड़ी विस्तार में विंटर सीजन में बर्फ़बारी भी हो जाती है.
सीमाएं :
- पूर्व में पाकिस्तान और अफगानिस्तान
- दक्षिण में गल्फ ऑफ़ ओमान और पर्शियन गल्फ
- उत्तर में अर्मेनिया, अजरबैजान और तुर्कमेनिस्तान
- पश्चिम में तुर्की और ईराक
पठार और पहाड़ की बात करें तो ईरान के पश्चिम में Zagros Mountains है और उत्तर में Alborz Mountains है.
दाश्त-ए-कवीर और दाश्त-ए-लूत ईरान के बड़े रेगिस्तान है. वहां की “करुण नदी” प्रसिद्ध है.
ईरान का संक्षिप्त इतिहास

यह देश पहले “पर्शिया” (Persia) के नाम से जाना जाता था. इसकी स्थापना “साइरस महान” ने लगभग 550 ईसा पूर्व में की थी. उस समय ये दुनिया के सबसे बड़े साम्राज्यों में से एक माना जाता था.
फिर ससानी साम्राज्य आया, 7वीं सदी में “अरब विजय के बाद” ईरान में धर्मांतरण का दौर चला, अरब मुस्लिम सेनाओं ने यहाँ अपना शासन बना लिया. (तब वहां से “ज़ोरास्ट्रियन धर्म” का अंत हुआ)
16वीं सदी में वहां पर सफ़वीद साम्राज्य आया, फिर वहां शिया इस्लाम धर्म आया, आज भी ईरान में बाहुल्य समाज की आस्था यही है.
1979 में Ruhollah Khomeini की अगुआई में ईरान में Islamic Revolution हुआ था.
1980–1988 तक Iran-Iraq War चला जहाँ अनगिनत बेकसूर लोग मारे गए.
फिर ईरान ने परमाणु विवाद और प्रतिबंध के कारण आर्थिक तंगी झेली, (आज भी इसी लिए युद्ध झेल रहा है)
19वीं–20वीं सदी में ईरान में United Kingdom और Russia का प्रभाव बढ़ा है, वहां की राजनीती भी बाहरी ताकतों से प्रभावित हुई है,
वर्तमान समय में एक “इस्लामिक गणराज्य” के तौरपर स्थापित इस देश के सामने बहुत सारी चुनौतियाँ है. लेकिन कुदरत की मेहर है कि इनकी जमीन कुदरती संपदा से लबरेज़ है, यही कारण है कि आज भी इस देश का वजूद ज़िंदा है.
ईरान की शक्ति और महत्वकांगशा
मध्य पूर्व का यह शक्तिशाली देश परमाणु कार्यक्रम की भी महत्वाकांक्षा रखता है. भारत, रशिया, अमेरिका, कोरिया, पाकिस्तान और कईं देश परमाणु संपन्न है.
ईरान भी चाहता है कि उनके देश पर कोई आँख उठा कर न देख् सके, इसी लिए वो परमाणु कार्यक्रम आगे बढ़ाता है, लेकिन Western Countries इसका विरोध करते हैं.
उनका यह तर्क है कि ईरान आतंक का समर्थक है. इसी लिए किसी भी कीमत पर उन्हें न्यूक्लियर पावर नहीं बनने देंगे. ईरान इन सब आरोपों को कोरा जूठ बताता है.
ईरान में महिलाओं का जीवन

इस देश में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के पास कम आजादी और अधिकार है. slamic Revolution के बाद वहां सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं को हिजाब पहनना अनिवार्य है.
वहां की महिलाएं समानता के लिए आवाज़ उठाती हैं, संघर्ष करती हैं, सड़कों पर आंदोलन भी करती हैं. संक्षिप्त में कहें तो वहां औरतों और बच्चियों के लिए पढ़ाई और तरक्की के अवसर तो है लेकिन धार्मिक कट्टरता के कारण बहुत सारी बंदिशें भी है.
Strait of Hormuz का महत्त्व
दुनियां का 20% तेल इसी समुद्री मार्ग से गुज़रता है. Saudi Arabia, Iran, Iraq, Kuwait और UAE के लिए यह मार्ग बेहद अहम है.
अगर ये रास्ता Blcok हो जाता है तो पूरी दुनियां पर असर पड़ता है, इसी लिए इसे “Oil Lifeline of the World” कहा गया है.
यह जलडमरूमध्य बहुत ही संकरा है, केवल 33 KM चौड़ाई होने के कारण इसे आसानी से चॉक किया जा सकता है. यही कारण है कि ये स्थान सैन्य या राजनीतिक तनाव का अड्डा बना रहता है.
Iran और India का बॉन्ड
इन दोनों देशों के लोग एक दूसरे को पसंद करते हैं. इस लिए नहीं की भारत में भी मुस्लिम आबादी है, कारण ये है कि सभी लोगों में अच्छा तालमेल है.
प्राचीनकाल से ही दोनों राष्ट्र के लोगों में व्यापर, कला और संस्कृति का आदान-प्रदान रहा है. भारत के लिए ईरान ऊर्जा स्रोत का अहम स्थान है.
जब की ईरान इंडिया से चावल, चाय और दवाइयाँ मंगवाता है. अमेरिका की प्रतिबंध नीतियों के कारण ईरान में महंगाई और करंसी फॉल चरम पर है फिर भी यह देश अपने अस्तित्व के लिए पड़ता-गिरता आगे बढ़ रहा है.
भारत-ईरान का भूराजनैतिक (Geopolitical) सहयोग
वर्ष 1990 के बाद इंडिया-ईरान ने मिल कर अफगान लोगों के लिए काम किए, जिसमें तालिबान के साथ तालमेल बैठा कर वहां के बाशिंदों की भलाई के काज भी शामिल है.
इसके साथ ही Chabahar Port का डेवलपमेंट भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, इसकी मदद से भारत पाकिस्तान को बायपास कर के मध्य एशिया तक अपनी पहुँच बना सकता है.
हाल के समय में मध्य-पूर्व तनाव और तेल आपूर्ति में बाधा के कारण भारत पर गहन असर पड़ा है, फिर भी कूटनीति के माध्यम से दोनों देश तालमेल बैठाने का प्रयास कर रहे हैं.
एप्सटीन फाइल और 2026 War का कनेक्शन

मीडिया रिपोट्स अनुसार Donald Trump और दुनियां के कईं बड़े बिलयनर्स के नाम इस कांड में शामिल है. जिसमें से Donald Trump बड़े किरदार बताए गए हैं.
उसके कई आपत्तिजनक विडीयो-फोटज भी वाइरल है, लेकिन उन्होंने हर बार इन बातों को नकारा है.
आम लोगों का मत है कि, अमिरिकी FBI प्रेसिडेंट की कठपुतली है. तो वहां का कानून भी पंगु बना बैठा है. आम वैश्विक धारणा है कि बच्चों के शोषण, भक्षण, महिलाओं-पुरुषों पे अत्याचार जैसे संगीन गुनाहों पर परदा डालने और उनसे ध्यान भटकाने के लिए यह “Unwanted War” दुनियां पर थोपी जा रही है.
Israil Vs Iran : कौन सही कौन गलत
Isreal कहता है कि Iran “Hezbollah” जैसे Groups
के जरिए उनपे वार करता है, तो आत्म रक्षा उनका अधिकार है. ऐसे में Iran अगर nuclear program में सफल हुआ तो, उनके वजूद पे ही खतरा हो सकता है.
इसी लिए वो Iran पर हमलावर है.
ठीक इसके उलट ईरान कहता है कि, Isreal पुरे मिडल ईस्ट में अस्थिरता फैला रहा है और पेलेस्टाइन के मामले में भी वो ही दोषी है. इस तरह वो अपनी कार्रवाई को न्यायसंगत बताता है.
इन दोनों की लड़ाई में अमेरिका “बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना” बन कर कूदता रहता है. और नतीजा बेकसूर खाड़ी देश पीट रहे हैं, क्यों की अमेरिका ने वहां मिलेट्री बेस बनाए हैं.
धार्मिक कट्टरता और हिंसा के आरोप

वर्ष1979 की “Islamic Revolution” के बाद से वहां शरिया कानून लागू हुआ. सामाजिक और निजी स्वतंत्रता का हनन हुआ, महिलाओं पर सख्त कानून लागू हुए.
United Nations और Amnesty International अनुसार वहां छोटेमोटे गुनाह पर सख्त अमानवीय सजाएं दी जाती है, अभिव्यक्ति की आज़ादी नहीं है, विरोध प्रदर्शन कुचल दिए जाते हैं.
ईरान पर कुछ सशस्त्र समूहों को समर्थन देने का आरोप भी लगे हैं, हालां की ईरान इन सब आरोपों को बेबुनियाद और जूठा बताता है.
क्या अमेरिका ईरान से जलता है !
विश्व के कुछ बड़े देशों का मत है कि, जहाँ प्राकृतिक संपदा है, अमेरिका को वहां आतंक दिख ही जाता है. फिर वो मसीहा बन कर सब ठीक करने निकल पड़ता है, जल्द ही कब्जाए देश के संसाधनों को हवा कर जाता है, वहां कठपुतली सरकार बिठाता है जो उनके इशारों पर नाचती रहे.
फिर वहां Trade के नाम पर उस लाचार देश को धीरे धीरे कंगाल करता है. वहां अपने मिलेट्री बेस बनाता है और सुरक्षा के नाम पर उनके आसपास स्थित बड़े देशों के लिए भी ख़तरा बनता है.
बात रही ईरान से जलने की तो, कईं सारे प्रतिबंध के बाद भी ईरान टूट नहीं रहा, शायद ये बात उन्हें हज़म नहीं हो रही.
Donald Trump की Tarrif वाली करतूत
भारत ईरान से व्यापार करे तो दिक्कत, रशिया से तेल ख़रीदे तो तकलीफ, मतलब ये वेस्टर्न माफिया तो चाहते हैं कि भारतीय लोग लकड़ी गोबर जलाते रहें, बैलगाड़ी घुमाते रहें या अमेरिका से महंगा तेल खरीदे और उन्हें और अमीर बनाने के लिये, गधा-मजदूरी करते रहें.
इंडियन गवर्नमेंट ने USA का यह तुगलकी फरमान नहीं माना तो Tarrif बढ़ा दिया, इंडियंस के लिए VISA के दाम बढ़ा दिए, भारतियों को वहां काम करने जाने से रोकने की धमकियाँ दी.
यहाँ तक की मोदी सरकार का तख़्ता पलट करने और USA द्वारा स्थापित सेवाओं (Gmail, GPS etc…) से भारत को वंचित कर देने की फालतू चेतावनी भी दे डाली.
इन सब के बावजूद हमारा देश अपने हित में फैसले लेता है, खुल कर किसी से दुश्मनी नहीं करता और सभी देशों से तालमेल बना कर रखता है. देश की ऐसी समझदार लीडरशिप पर हमें गर्व होना चाहिए.
क्या लाचार और “पंगु” है यूनाइटेड नेशंस !

United Nations (संयुक्त राष्ट्र) दुनिया में शांति, सुरक्षा, मानवाधिकार या अंतरराष्ट्रीय कानून की समस्या के मुद्दों पर आवाज़ उठाता है. लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहती दिखती है.
उदहारण के तौरपर Venezuela के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का अपहरण, ईरान पर थोपी गई लड़ाई और अनगिनत प्रतिबंध, अमेरिका क्यूबा कॉन्फ्लिक्ट, ग्रीनलैंड पर USA के कब्ज़े की धमकी.
यूक्रेन के कंधे पर बंदूक रख कर USA का Russa पर वार, दशकों तक अफगानिस्तान की बर्बादी, भारत को तंग करने के लिए US द्वारा पाकिस्तान को एडवांस वेपन सप्लाय करना, इन सब मुद्दों पर United Nations का “मौन व्रत” लग जाता है, क्यों की वहां अमेरिका और उनके मित्रराष्ट्र इन्वॉल्व है.
USA और Isrel से लड़ाई के बाद ईरान का भविष्य
कौन सच्चा कौन जूठा यह समय बताएगा. फ़िलहाल अमेरिका और इसराइल की सैन्य शक्ति प्रबल है. ईरान के पास भी ड्रोन और मिसाईल शक्ति है, चीन कोरिया और रशिया का सपोर्ट भी है, लेकिन कोई बड़ा देश उड़ता तीर नहीं लेगा.
ऊपर से अब तो मिडल ईस्ट की बाकि कंट्रीज (क़तर, UAE, Etc…) पर भी ईरान ने हमला किया है तो वहां भी कुछ असंतोष होगा.
ऐसे में ईरान के लिए अब यह अस्तित्व की लड़ाई “All In” जैसा मामला है, इस लिए गरीबी, आंतरिक मन मोटाव, महंगाई, और ज्यादा प्रतिबंध इस तरह की परिस्थिति पेश आ सकती है. दूसरी तरफ अमेरिका और इजराइल के लिए ईरान सख़्त चुनौती बना हुआ है, जैसे “सांप के मुह में छछुंदर” न निगलते बात बन रही ना ही उगलते.
QNA (Iran Ka Itihas Aur Vartmaan)
Q – पहले ईरान का नाम क्या हुआ करता था?
A – ईरान पूर्वकाल में पर्शिया के नाम से जाना जाता था.
Q – ईरान में Oil की खोज कब हुई?
A – वर्ष 1908 में यह खोज हुई, जिस कारण ईरान आर्थिक रूप से सक्षम बना.
Q – ईरान की प्राचीन सभ्यता का नाम बताएं?
A – Elamite Civilization ईरान की प्राचीन सभ्यता कही जाती है.
Q – ईरान पर यूनान का आक्रमण किसने किया?
A – ऐतिहासिक तथ्यों अनुसार Alexander the Great ने ईरान पर पहला हमला किया था.
Q – ईरान-इराक युद्ध कब हुआ?
A – इन दोनों देशों में वर्ष 1980 से 1988 तक लड़ाई चली, फिर दोनों ने शांति की राह चुनी.
Q – सस्सानियन काल की खासियत बताएं?
A – Zoroastrianism धर्म मानने वाला, यह ईरान का आखिरी प्राचीन साम्राज्य था.
Q – ईरान का धर्मांतरण कब हुआ?
A – कहा जाता है कि 7वीं सदी में अरबों ने ईरान पर आक्रमण किया और फिर इस्लाम का प्रसार हुआ.
Q – वर्ष 1979 ईरान के लिए क्यूँ खास साल है?
A – इस साल Iranian Revolution हुआ था, जिससे ईरान में राजशाही का ख़ात्मा हुआ.
Q – ईरान की वर्तमान साशन व्यवस्था बताएं?
A – वर्तमान समय में ईरान पूरी तरह से इस्लामिक राष्ट्र बन चूका है.
Q – Iran का अर्थ क्या होता है?
A – इसका मतलब है “Land of Aryans” (आर्यन्स की भूमि).
Q – मंगोलों ने ईरान पर कब हमला किया?
A – यह हमला 13वीं शताब्दी में Genghis Khan की लीडरशिप में किया गया था.
Q – Timur कौन था?
A – वह एक वेहशी सम्राट था, जिसने ईरान में तबाही मचाई थी.
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