Swami Vivekananda Life in Hindi (History & Biography)
महान प्रेरणा स्रोत – स्वामी विवेकानंद की जीवनी व इतिहास

युवाओं के आदर्श स्वामी विवेकानंद
भारतीय संस्कृति को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने वाले महापुरुष स्वामी विवेकानंद जी का जन्म 12 जनवरी 1863 को सूर्योदय से 6 मिनट पूर्व 6 बजकर 33 मिनट 33 सेकेन्ड पर हुआ। भुवनेश्वरी देवी के विश्वविजयी पुत्र का स्वागत मंगल शंख बजाकर मंगल ध्वनी से किया गया। ऐसी महान विभूती के जन्म से भारत माता भी गौरवान्वित हुईं।
- Related: उर्जा से भर देने वाले स्वामी विवेकानंद के अनमोल विचारों का संग्रह ; YouTube Version यहाँ देखें
बालक की आकृति एवं रूप बहुत कुछ उनके सन्यासी पितामह दुर्गादास की तरह था। परिवार के लोगों ने बालक का नाम दुर्गादास रखने की इच्छा प्रकट की, किन्तु माता द्वारा देखे स्वपन के आधार पर बालक का नाम वीरेश्वर रखा गया। प्यार से लोग ‘बिले’ कह कर बुलाते थे। हिन्दू मान्यता के अनुसार संतान के दो नाम होते हैं, एक राशी का एवं दूसरा जन साधारण में प्रचलित नाम, तो अन्नप्रासन के शुभ अवसर पर बालक का नाम नरेन्द्र नाथ रखा गया।
नरेन्द्र की बुद्धी बचपन से ही तेज थी।बचपन में नरेन्द्र बहुत नटखट थे। भय, फटकार या धमकी का असर उन पर नहीं होता था। तो माता भुवनेश्वरी देवी ने अदभुत उपाय सोचा, नरेन्द्र का अशिष्ट आचरण जब बढ जाता तो, वो शिव-शिव कह कर उनके ऊपर जल डाल देतीं। बालक नरेन्द्र एकदम शान्त हो जाते। इसमे संदेह नही की बालक नरेन्द्र शिव का ही रूप थे।
माँ के मुहँ से रामायण – महाभारत के किस्से सुनना नरेन्द्र को बहुत अच्छा लगता था। बालयावस्था में नरेन्द्र नाथ को गाड़ी पर घूमना बहुत पसन्द था। जब कोई पूछता बड़े हो कर क्या बनोगे तो मासूमियत से कहते कोचवान बनूँगा।

पाश्चात्य सभ्यता में विश्वास रखने वाले पिता विश्वनाथ दत्त अपने पुत्र को अंग्रेजी शिक्षा देकर पाश्चातय सभ्यता में रंगना चाहते थे। किन्तु नियती ने तो कुछ खास प्रयोजन हेतु बालक को अवतरित किया था।
ये कहना अतिश्योक्ती न होगा कि भारतीय संस्कृती को विश्वस्तर पर पहचान दिलाने का श्रेय अगर किसी को जाता है तो वो हैं स्वामी विवेकानंद। व्यायाम, कुश्ती, क्रिकेट आदी में नरेन्द्र की विशेष रूची थी। कभी-कभी मित्रों के साथ हास-परिहास में भी भाग लेते। जनरल असेम्बली कॉलेज के अध्यक्ष विलयम हेस्टी का कहना था कि –
नरेन्द्रनाथ दर्शन शास्त्र के अतिउत्तम छात्र हैं। जर्मनी और इग्लैण्ड के सारे विश्वविद्यालयों में नरेन्द्रनाथ जैसा मेधावी छात्र नहीं है।
नरेन्द्र के चरित्र में जो भी महान है, वो उनकी सुशिक्षित एवं विचारशील माता की शिक्षा का ही परिणाम है। उनके अन्दर बचपन से ही परमात्मा को पाने की चाह थी। डेकार्ट का अंहवाद, डार्विन का विकासवाद, स्पेंसर के अद्वेतवाद को सुनकर नरेन्द्रनाथ सत्य को पाने का लिये व्याकुल हो उठते थे।
अपने इसी उद्देश्य की पूर्ती हेतु वे ब्रह्मसमाज में गये किन्तु वहाँ उनका चित्त शान्त न हुआ। रामकृष्ण परमहंस की तारीफ सुनकर नरेन्द्र उनसे तर्क के उद्देश्य से उनके पास गये किन्तु उनके विचारों से प्रभावित हो कर उन्हे गुरू मान लिया। परमहसं की कृपा से उन्हे आत्म साक्षात्कार हुआ। नरेन्द्र परमहंस के प्रिय शिष्यों में से सर्वोपरि थे। 25 वर्ष की उम्र में नरेन्द्र ने गेरुवावस्त्र धारण कर सन्यास ले लिया और विश्व भ्रमण को निकल पड़े।
1893 में वह शिकागो विश्व धर्म परिषद में भारत के प्रतीनिधी बनकर गये किन्तु उस समय यूरोप में भारतीयों को हीन दृष्टी से देखते थे। लेकिन उगते सूरज को कौन रोक पाया है, वहाँ लोगों के विरोध के बावजूद एक प्रोफेसर के प्रयास से स्वामी जी को बोलने का अवसर मिला।
स्वामी जी ने (“Sisters and Brothers of America“) बहनों एवं भाईयों कहकर श्रोताओं को संबोधित किया। स्वामी जी के मुख से ये शब्द सुनकर करतल ध्वनी से उनका स्वागत हुआ। श्रोता उनको मंत्र मुग्ध सुनते रहे निर्धारित समय कब बीत गया पता ही न चला। अध्यक्ष गिबन्स के अनुरोध पर स्वामी जी आगे बोलना शुरू किये तथा 20 मिनट से अधिक बोले। उनसे अभिभूत हो हज़ारों लोग उनके शिष्य बन गये। आलम ये था कि जब कभी सभा में शोर होता तो उन्हे स्वामी जी के भाषण सुनने का प्रलोभन दिया जाता सारी जनता शान्त हो जाती।
अपने व्यख्यान से स्वामी जी ने सिद्ध कर दिया कि हिन्दु धर्म भी श्रेष्ठ है, उसमें सभी धर्मों समाहित करने की क्षमता है। इस अदभुत सन्यासी ने सात समंदर पार भारतीय संसकृती की ध्वजा को फैराया।
- Related: स्वामी जी का प्रसिद्द भाषण यहाँ पढ़ें और यहाँ सुनें
Listen to Swami Vivekananda’s Chicago Speech Video in Hindi on Youtube
39 वर्ष के संक्षिप्त जीवन काल में स्वामी जी ने जो अदभुत कार्य किये हैं, वो आने वाली पीढ़ियों को मार्ग दर्शन करते रहेंगे। 4 जुलाई 1902 को स्वामी जी का अलौकिक शरीर परमात्मा मे विलीन हो गया।
स्वामी जी का आदर्श-
उठो जागो और तब तक न रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।
अनेक युवाओं के लिये प्रेरणा स्रोत है। स्वामी विवेकानंद जी का जन्मदिन राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। उनकी शिक्षा में सर्वोपरी शिक्षा है –“मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है।”
अनिता शर्मा
YouTube Channel: Anita Sharma Visit for Educational & Inspirational Videos (2 Mn Views)
Blog: रौशन सवेरा
E-mail Id: voiceforblind@gmail.com
अनिता जी दृष्टिबाधित लोगों की सेवा में तत्पर हैं। उनके बारे में अधिक जानने के लिए पढ़ें – नेत्रहीन लोगों के जीवन में प्रकाश बिखेरती अनिता शर्मा और उनसे जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
स्वमी जी से सम्बंधित इन लेखों को अवश्य पढ़ें:
- स्वामी विवेकानंद के अनमोल विचार
- स्वामी विवेकानंद के जीवन के 3 प्रेरक प्रसंग
- स्वामी विवेकानंद का प्रसिद्द शिकागो भाषण
- स्वामी विवेकानंद और राष्ट्रवाद : स्वामी विवेकानंद पुण्यतिथि पर विशेष
- डरो मत ! स्वामी विवेकानंद प्रेरक प्रसंग
- शिष्टाचार – स्वामी विवेकानंद के जीवन का एक प्रेरक प्रसंग
- प्रेरक प्रसंग : नरेन्द्र की हिम्मत तथा करुणा
- युवा शक्ति के प्रतीक स्वामी विवेकानंद (Youth Day Article in Hindi)
- युगपुरुष स्वामी विवेकानंद का युवाओं को एक पत्र
- स्वामी विवेकानंद की 150 वीं जयंती – 12 जनवरी 2013
- स्वामी विवेकानंद का युवाओं को संदेश
I am grateful to Anita Ji for sharing this Hindi article on Swami Vivekanada Life in Hindi with AKC. Thanks.

swami vivekannd ek maha purs the
Manav ki seva he bhagwan ki seva hai ‘ yes ‘ aur ma isko he true manta hu” swami vivekanand ji is a great leader of india ” i am proud of vivekanand ” ma unko DIL SE PRNAM KARTA HU ………………
Swami vivekanand ka charittra yuvayo ke lite prenadayi hai
Swami vivekanand is a great leader of India . Who has very intelligen man .mai unko tahe dil se pranam karta hun ki we america me 7 din zero par bhasan diye the jiska man kuch nahi hai . Thanx
मै बहुत सौभाग्ययशाली हुँ कि मैने ऐसे देश मे जन्म लिया है जहाँ स्वामी जी जैसे महापुरुषों ने जन्म लिया था
swami ji lived in our hearts for thousand years .they make us feel proud in this world .we have to follow his lessons
Swami Vivekanand is a great leader of the india.
I am proud of Vivekanand.
Mai unako pranam karata hoo.
Utho jaago aur chalte raho jab tak manjil prapta na ho jaaye.
Give the energy ot me and i inmplement in my life immediate.
Regards
Ranjeet
swami vivekananda is idol of lakhs of young generation of nt only india but from all world. he is my god, I wants to spread the great thoughts of swami vivekanandas all over universe.
swami Vivekananda’s is most powerful man in this world .His personality so dashing. Like the Rama .I am proud to be an Indian cause swami Ji born in India .I love Swami Ji .
i impressed from this brief story.I hope all readers would like this story.