किसी शहर से कुछ दूर एक किसान अपने गाँव में रहता था । वैसे तो वह संपन्न था पर फिर भी वो अपने जीवन से खुश नहीं था । एक दिन उसने निश्चय किया कि वो अपनी सारी ज़मीन -जायदाद बेच कर किसी अच्छी जगह बस जाएगा ।

अगले ही दिन उसने एक जान -पहचान के रियल एस्टेट एजेंट को बुलाया और बोला , ” भाई , मुझे तो बस किसी तरह ये जगह छोड़नी है, बस कोई सही प्रॉपर्टी दिल दो तो बात बन जाए !”
“क्यों , क्या दिक्कत हो गयी यहाँ आपको ?”, एजेंट ने पुछा ।
“आओ मेरे साथ “, किसान बोला , ” देखो कितनी समस्याएं हैं यहाँ पर , ये उबड़-खाबड़ रास्ते देखो , और ये छोटी सी झील देखो , इसके चक्कर में पूरा घूम कर रास्ता पार करना पड़ता है। ।। इन छोटे -छोटे पहाड़ों को देखो , जानवरों को चराना कितना मुश्किल होता है … और ये देखो ये बागीचा , आधा समय तो इसकी सफाई और रख-रखाव में ही चला जाता है … क्या करूँगा मैं ऐसी बेकार प्रॉपर्टी का…”
एजेंट ने घूम -घूम कर इलाके का जायजा लिया और कुछ दिन बाद किसी ग्राहक के साथ आने का वादा किया ।
इस घटना के एक – दो दिन बाद किसान सुबह का अखबार पढ़ रहा था कि कहीं किसी अच्छी प्रॉपर्टी का पता चल जाए जहाँ वो सब बेच -बाच कर जा सके ।
तभी उसकी नज़र एक आकर्षक ऐड पर पड़ी , ” लें सपनो का घर , एक शांत सुन्दर जगह , प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर, सुन्दर झील और पहाड़ियों के बीच , शहर की भीड़ -भाड़ से उचित दूरी पर बसाएं एक स्वस्थ -सुन्दर आशियाना । संपर्क करें -XXXXXXX”
किसान को ये ब्यौरा बहुत पसंद आया , वो बार-बार उस ऐड को पढ़ने लगा , पर थोड़ा ध्यान देने पर उसे लगा कि ये तो उसी की प्रॉपर्टी का ऐड है , इस बात की पुष्टि करने के लिए उसने दिए हुए नंबर पर फ़ोन लगाया और सचमुच ये उसी की प्रॉपर्टी का ऐड था ।
तब किसान को एहसास हुआ कि वो वाकई में अपनी मनचाही जगह पर रहता है और ये उसकी गलती थी कि उसने अपनी ही चीजों को हमेशा गलत ढंग से देखा । अब किसान वहीँ रहना चाहता था ; उसने तुरंत अपने एजेंट को कॉल किया और इस ऐड को हटाने को कहा ।
Friends, इस किसान की तरह ही कई बार हमें भी अपनी life से बहुत complaints होती हैं , लगता है कि हमारा जीवन ही सबसे बेकार है , हमारी नौकरी में ही सबसे ज्यादा प्रेशर है , हमारी पर्सनालिटी ही सबसे unattractive है…
पर क्या आपने कभी दूसरों की नज़र से अपनी life को देखने की कोशिश की है ?
क्या वाकई आपकी लाइफ इतनी problematic है या आपने खुद ज़रुरत से ज्यादा उसे ऐसा बना रखा है ?
कहीं किसान की तरह आप भी अपने जीवन के सौंदर्य को अनदेखा तो नहीं कर रहे हैं ?
कहीं आपको भी आपकी खुशियां गिनाने के लिए किसी paper-advertisement की ज़रुरत तो नहीं ?
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This story is Inspired from: The Unhappy Farmer – A Story About Contentment
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Thanks sir for share this story
अतयंत प्रेरणादायक कहानी ।
बहुत बढ़िया ! आपका नया आर्टिकल बहुत अच्छा लगा http://www.gyanipandit.com की और से शुभकामनाये !
hamare pas jo hai, uska hame value samjhe cahye, yahi sikh de rahi ye kahani
Jindagi Jarurat Ke Mutabik Jiyo,
Na ki Khwayisho Ke Mutabik,
Kyuki Jarurat To Fakiro Ke Bhi Poore Ho Jate Hai,
Aur Khwayishe Badsaho ke Bhi Adhoore Reh Jate Hai.
Nice story.
प्रिय गोपाल जी जिन्दगी में हम चाहे कितने भी बेहतरीन स्तर पर क्यों नहीं हो लेकिन हम स्थायित्व को प्राप्त नहीं कर सकते और यह एक मानवीय वृत्ति है कुछ ही दिनों में हमारे लिए बदलाव पुराने हो जाते है और हमे बदलाव ही पसंद आते है जबकि यह भी एक विवादित सत्य है अगर हम स्थायित्व प्राप्त करने की सोचे तो हमारी प्रगति रुक जाती है लेकिन अधिक से अधिक हम अति की अवस्था को रोक सकते है कि वो हम पर हावी नहीं हो |
Thank you for such an eye opening story!
I WAS also going through almost the same felings as this farmer till the time i read this story.
Thank you once again for helping me count my blessings which i overlooked.
Warm regards
Vinod
Res,Sir
Sach bahut khub likha hai aapne khud main hi itna presaaan rhte hai ki kbhi dekha hi nh or kitne lig hai jo hmse bahut jyada presaan hai, dukhi hai hm to phir bhi bahut khus hai, hmsa hr kisi ki jindgi dusro se behtar hi hoti hai,
Thnx a lot
Nice story gopal ji