बहुत समय पहले की बात है , किसी गाँव में एक किसान रहता था . उसके पास बहुत सारे जानवर थे , उन्ही में से
एक गधा भी था . एक दिन वह चरते चरते खेत में बने एक पुराने सूखे हुए कुएं के पास जा पहुचा और अचानक ही उसमे फिसल कर गिर गया . गिरते ही उसने जोर -जोर से चिल्लाना शुरू किया -” ढेंचू-ढेंचू ….ढेंचू-ढेंचू ….”

उसकी आवाज़ सुन कर खेत में काम कर रहे लोग कुएं के पास पहुचे, किसान को भी बुलाया गया .
किसान ने स्थिति का जायजा लिया , उसे गधे पर दया तो आई लेकिन उसने मन में सोचा कि इस बूढ़े गधे को बचाने से कोई लाभ नहीं है और इसमें मेहनत भी बहुत लगेगी और साथ ही कुएं की भी कोई ज़रुरत नहीं है , फिर उसने बाकी लोगों से कहा , “मुझे नहीं लगता कि हम किसी भी तरह इस गधे को बचा सकते हैं अतः आप सभी अपने-अपने काम पर लग जाइए, यहाँ समय गंवाने से कोई लाभ नहीं.”
और ऐसा कह कर वह आगे बढ़ने को ही था की एक मजदूर बोला, ” मालिक , इस गधे ने सालों तक आपकी सेवा की है , इसे इस तरह तड़प-तड़प के मरने देने से अच्छा होगा की हम उसे इसी कुएं में दफना दें .”
किसान ने भी सहमती जताते हुए उसकी हाँ में हाँ मिला दी.
” चलो हम सब मिल कर इस कुएं में मिटटी डालना शुरू करते हैं और गधे को यहीं दफना देते हैं”, किसान बोला.
गधा ये सब सुन रहा था और अब वह और भी डर गया , उसे लगा कि कहाँ उसके मालिक को उसे बचाना चाहिए तो उलटे वो लोग उसे दफनाने की योजना बना रहे हैं . यह सब सुन कर वह भयभीत हो गया , पर उसने हिम्मत नहीं हारी और भगवान् को याद कर वहां से निकलने के बारे में सोचने लगा ….
अभी वह अपने विचारों में खोया ही था कि अचानक उसके ऊपर मिटटी की बारिश होने लगी, गधे ने मन ही मन सोचा कि भले कुछ हो जाए वह अपना प्रयास नहीं छोड़ेगा और
आसानी से हार नहीं मानेगा। और फिर वह पूरी ताकत से उछाल मारने लगा .
किसान भी औरों की तरह मिटटी से भरी एक बोरी कुएं में झोंक दी और उसमे झाँकने लगा , उसने देखा की जैसे ही मिटटी गधे के ऊपर पड़ती वो उसे अपने शरीर से झटकता और उचल कर उसके ऊपर चढ़ जाता .जब भी उसपे मिटटी डाली जाती वह यही करता ….झटकता और ऊपर चढ़ जाता …. झटकता और ऊपर चढ़ जाता ….
किसान भी समझ चुका था कि अगर वह यूँही मिटटी डलवाता रहा तो गधे की जान बच सकती है .
फिर क्या था वह मिटटी डलवाता गया और देखते-देखते गधा कुएं के मुहाने तक पहुँच गया, और अंत में कूद कर बाहर आ गया.
मित्रों, हमारी ज़िन्दगी भी इसी तरह होती है , हम चाहे जितनी भी सावधानी बरतें कभी न कभी मुसीबत रुपी गड्ढे में गिर ही जाते हैं .पर गिरना प्रमुख नहीं है, प्रमुख है संभलना . बहुत से लोग बिना प्रयास किये ही हार मान लेते हैं , पर जो प्रयास करते हैं भगवान् भी किसी न किसी रूप में उनके लिए मदद भेज देता है। यदि गधा लगातार बचने का प्रयास नहीं करता तो किसान के दिमाग में भी यह बात नहीं आती को उसे बचाया जा सकता है … इसलिए जब अगली बार आप किसी मुसीबत में पड़ें तो कोशिश करिए कि आप भी उसे झटक कर आगे बढ़ जाएं।
——————-
इन कहानियों को भी ज़रूर पढ़ें:
Note: The inspirational story shared here is not my original creation, I have read it before and I am just providing a Hindi version of the same with some modifications.

bht hi achhi story h .
Jo khud ki madat karta hai bhagwan bhi usi ki madat karta hai
Bahut Achchha Bataya, Kisi Bhi Pareshani Me Apni Buddhi Ka Santulan Na Kho Kar Pareshani Ka Hal Dhhoondhhne Se Hi Kam Banata Hai.
Jitendra Mehta
Nice one……..
बहुत सटीक कहानी, अपने को दफनाने की मिट्टी से ही उन्नति की राह खोजें हम।
एक रोचक एवं प्रेरक कथा | धैर्य, मानसिक-संतुलन, साहस, जीने की चाह और इच्छा-शक्ति –दरअसल,ये ही तो हुआ करते हैं मानव के शस्त्र, के जिनके सदुपयोग से वह मुसीबतों का डटकर सामना करता है बजाय उनसे भागने के |
आभार
रजनी सडाना
Prerna Daayak kahani.
Mr. Ganesh Ji’s is absoulutly right , प्रत्येक समस्या कुछ न कुछ सिखाती अवश्य है यदि तुम उनसे डर जाऔगे तो वे और ज्यादा भयंकर रुप रखकर तुम्हैं परेशान करेगी और यदि तुम उनका मुकावला दिलेरी से करोगे तो तुम्है कुछ न कुछ सीखने को मिलेगा.
Note :- Lambe samay se Aadrniya ANITA SHARMA & RAJNI SADANA ji ko padhne ka avsar nahin mila. Mera unse punai aagrah hai ki kuchha Prerna dayak avm Gyanvardhak article Parsharit karain……….
सच ही कहा है कि जो खुद की मदद करता है प्रभु भी उसी की मदद करते हैं । मैरा मानना है कि यदि प्रभु ने हमें मानव बनाया है तो परेशानियाँ तो आएगी ही औऱ जब ये आनी ही हैं तो फिर इनसे घवड़ाना क्या जो परेशानियाँ आऐ उनका मुकावला डटकर करों तुम हमेशा उन्हैं पार कर लोगे यह निश्चित है कि प्रत्येक समस्या कुछ न कुछ सिखाती अवश्य है यदि तुम उनसे डर जाऔगे तो वे और ज्यादा भयंकर रुप रखकर तुम्हैं परेशान करेगी और यदि तुम उनका मुकावला दिलेरी से करोगे तो तुम्है कुछ न कुछ सीखने को मिलेगा जो तुम्हारी शुद्ध आय होगी।
Dear Gyanesh Ji .
Plz do not put your blog links in your comments as you already give it with your name.
really we should solve the problem not to give up
Musibato se darne k bajay unhe solv karna chahiya.