नंबी नारायणन की जीवनी | Nambi Narayanan Biography Hindi

अनेक धर्मों को समाहित करने वाला “भारत” देश विज्ञान और कला के क्षेत्र में भी पीछे नहीं है. हम बड़े भाग्यशाली हैं कि ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, सतीश धवन, विक्रम साराभाई, यु.आर. राव और नंबी नारायणन जैसे कुशल वैज्ञानिकों ने हमारे देश में जन्म लिया. ऐसे ही कईं गुणी सज्जनों की बदौलत भारत आज महासत्ता बनने की डगर पर अग्रसर है, सायन्स और टेक्नोलॉजी ऐसे विषय है कि इनपर निरंतर शोध-खोज न कीए जाए तो राष्ट्र की समृद्धि और सुरक्षा पिछड़ जाती है, आज हम ऐरोस्पेस इंजीनियर और प्रसिद्ध वैज्ञानिक Nambi Narayan की Life Story पर बात करेंगे, इन्हें भारत सरकार वर्ष 2019 में “पद्मभूषण” अवार्ड दे चुकी है, लेकिन इससे पहले उनपे लगे देशद्रोह के आरोप, फिर दशकों की कानूनी लड़ाई और केस जीतने पर हर्जाना मिलना, यह सब घटनाएं हमें ज़रूर जाननी चाहिए. तो आइए शुरू करते हैं… (Nambi Narayanan Biography Hindi)
जन्म, अभ्यास, माता-पिता, जीवनसाथी, नेट वर्थ
परिचय : वैज्ञानिक नंबी नारायणन का जन्म 12 दिसंबर, 1941 (शुक्रवार) के दिन हुआ है. उनका जन्मस्थान केरला (भारत) है और मातृभूमि (Home Town) नागेरेकोली, तमिलनाडु (भारत) है. उन्होंने स्कूल का अभ्यास डी.वी.डी. हायर सेकंडरी स्कूल से किया है. इसके बाद थियागाराजर कॉलेज ऑफ इंजिनयरिंग, मदुरई और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी, न्यूजर्सी (USA) से कॉलेज की पढ़ाई पूर्ण की है. उनकी एजुकेशन डिग्री की बात करें तो वे मद्रास यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियर है.
परिवार : सी. वन्निया पेरुमल और एस. थंगम्माल के पुत्र “नंबी नारायणन” का विवाह मीना नारायणन से हुआ है, उनके 2 संतान है, बेटे का नाम संकारा कुमार नारायणन है वे पेशे से बिजनेसमैन है. बेटी का नाम गीता अरुणन है वे बंगलुरू में मोन्टेसोरी टीचर है.

पसंद-नापसंद : विज्ञान क्षेत्र में बहुमूल्य योगदान देने वाले नंबी नारायणन हिन्दू धर्म में गहरी आस्था रखते हैं. इन्हें लंबे सफर पर जाने का शौख है और किताबें पढ़ना भी खूब पसंद करते हैं. उनकी Net-Worth पर सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन उन्हें प्राप्त हर्जाने और उनके Job Profile से हुई कमाई मिला कर 1.7 करोड़ Net-Worth आंकी गई है. (Note : यह सिर्फ अनुमानित आंकड़ा है).
करियर की शुरुआत : युवा और जोशीले वैज्ञानिक नंबी नारायणन वर्ष 1966 में ISRO जॉइन करते हैं. वर्ष 1970 की शुरआत में वे लिक्विड फ्यूएल रोकेट टेक्नोलॉजी की शोध करते हैं. उन्हें मालूम था कि ISRO को आनेवाले समय में इस तकनीक की बेहद ज़रूरत होगी.
नंबी ने 600KG का थ्रस्ट एंजिन बनाया, जो लिक्विड प्रोपेलेंट मोटर्स बनाने की और एक बड़ा कदम था. इस काम में उनके साथी यु.आर. राव और ISRO के चेरमैन सतीश धवन ने साथ दिया था.
उन्हें क्रायोइंजिन डिवीजन का कार्यभार मिला था, जहाँ कम तापमान पर यंत्र का बर्ताव और उसकी कार्यदक्षता जांचना उनका काम था.
अपने 35 साल के “ISRO वैज्ञानिक” कार्यकाल में नंबी को ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, सतीश धवन, विक्रम साराभाई और यु.आर. राव जैसे विश्व प्रसिद्ध साइंटिस्ट के साथ काम करने का अवसर मिला.
जुठे आरोपों और सख्त जांच से गुस्साए नंबी का एलान
देश के लिए इतना कुछ करने के बाद भी गद्दारी के आरोप लगे तो कोई भी इन्सान अपना आपा खो देगा, नंबी के साथ भी वही हुआ, पूछताछ के समय एक दिन वे गुस्से में बोले, आप लोगों को इसका भुगतान करना पड़ेगा… तब एक जांच अधिकारी ने जवाब में कुछ ऐसा कहा…
“इंवेस्टिगेटिंग ऑफिसर : सर हम बस अपना काम कर रहे हैं, आप जो कह रहे हैं वो सत्य है, उसे आप साबित कर पा रहे हैं तो, आप अपने चप्पल से हमें जापड़ मार सकते हैं”
नंबी नारायणन के अलावा और 5 लोगों पर लगा आरोप

आरोपों की बात करें तो नंबी नारायणन के साथ साथ शशिकुमारन नाम के वैज्ञानिक को भी डिटेन किया गया था, इन दोनों पर ISRO की संवेदसनशील जानकारियां मिलियंस में बेचने के आरोप लगे थे.
जब तकलीफ आती है तो इन्सान अपनों से मदद की गुहार लगाता है, नाम्बि को भी ISRO से आस थी, लेकिन इस संस्था ने मदद का हाथ नहीं बढ़ाया, तब के ISRO चेरमैन कृष्णास्वामी कस्तूरीरंजन ने कहा था, जब मामला देश की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा हो तो ISRO कभी देश की खिलाफत नहीं कर सकता, यह क़ानूनी मसला है इसमें हमारी संस्था दखल नहीं देगी.
समाज, परिवार और देश-दुनियां में बेइज़ती झेलने के बाद, अपने स्वजनों की दुर्गति होने के बाद, खुद के 50 दिन जेल में टॉर्चर सेहने के बाद, आख़िरकार वर्ष1996 में CBI जांच रिपोर्ट आती है जिसमें Nambi बेकसूर पाए जाते हैं. उसके बाद वर्ष 1998 में सुप्रीम कोर्ट भी क्लीन चिट दे देता है.
सिस्टम से भिड़े नंबी नारायणन, वसूला हर्जाना
किसी की जिंदगी 360 डिग्री घुमा कर, उसे अंत में कह देना की आपकी तकलीफों के लिए हमें खेद है, ये कितना आसान है, लेकिन उस इन्सान और उसकी फैमिली ने जो नर्क झेला, उसका हिसाब कौन देगा?
नंबी नहीं चाहते थे की उन्हें जूठे केस में फ़साने वाले दरिंदे ऐसे ही आज़ाद रहे, उन्होंने कोर्ट में पिटीशन डाला, की जिन्होंने भी उनके साथ ऐसा दुर्व्यवहार किया, उन्हें कानून सजा दे, अपने साथ हुई घटना की भरपाई तो मुमकिन नहीं, फिर भी उन्होंने हर्जाना माँगा.
टॉर्चर के दौरान 30 घंटे खड़ा रखा गया, गले और नाक पर वार किए, सिर पर चोट पहुंचाई गई, गालियां दी, मैंटल टॉर्चर किया वो अलग, भारत की सुरक्षा सर्वोपरी है, लेकिन देश की तरक्की और सुरक्षा के लिए अपना जीवन लगा देनेवाला सायंटिस्ट ये सब डिजर्व नहीं करता था, और लगे हुए आरोपों में रत्ति भर सच्चाई थी तो सिस्टम साबित क्यों नहीं कर पाया, इस लिए निष्कर्ष यही निकलता है कि निर्दोष “नंबी” के साथ बुरा हुआ.
वर्ष 2012 में हाई कोर्ट ने कहा की नंबी नारायणन को जो जूठा मुकद्दमा झेलना पड़ा, उसके लिए केरला राज्य सरकार उसे 10 लाख का मुआबजा दे, लेकिन स्टेट गवर्नमेंट ने बेशर्मी दिखाते हुए, कोर्ट का मान भी नहीं रखा.
केंद्र, फिल्मजगत और मीडिया नंबी के सपोर्ट में आ गए

वर्ष 2017 में उनकी ऑटोबायोग्राफी “Ormakalude Bhramanapatham” रिलीजी हुई, जिसमें इस किस्से को वर्णित किया गया. इस देशद्रोही के केस में 5 अन्य लोगों पर गाज गिरी थी, डी. शशिकुमारन, एस. के. शर्मा (ISRO के एक ठेकेदार), रशियन स्पेस एजेंसी के ऑफिसर के. चंद्रशेखर और मालदीव की 2 महिलाऐं फौज़िया हसन और मरियम रशीदा.
वर्ष 2018 में चीफ जस्टिस “दीपक मिश्रा” द्वारा लीड की जा रही बैंच ने कहा, हम पीड़ित नंबी नारायणन को सीधे मुआबजा देने की हिदायत देते हैं, की स्टेट गवर्नमेंट कॉन्सपिरेसी करने वाले ऑफिशल्स की प्रॉपर्टी बिकवा कर रकम वसूले. उनकी वजह से वादी को पीड़ा हुई है, अब वो लोग ही अपनी संपत्ति बेच कर भरपाई करे.
Lesser Known Facts (नंबी नारायणन)
नंबी नारायणन की व्यथा : मेरी पत्नी ऑटो से उतार दी जाती है क्यों की मेरे ऊपर पाकिस्तान के लिये मुखबिरी करने के आरोप थे.
लोग मुझे गद्दार और देशद्रोही पुकार रहे थे, घर पर पत्थर फेंके रहे थे, पता नहीं कब बेकाबू भीड़ अंदर घुस कर हमें मार दे, वो मंज़र याद कर के आज भी मेरी रूह कांप जाती है.
मेरे बच्चे खौफ़ में जिए, मेरी पत्नी गहरे तनाव में चली गई, उसने बोलना तक बंद कर दिया, बरसों की मेरी कमाई इज़्ज़त मिट्टी में मिल गई, शरीर, मन और आत्मा से मैं टूट गया.
सच्चाई की जीत हुई…केरला सरकार को लगी फटकार
अंत में न्याय हुआ, केरला सरकार को अपने लचर सिस्टम के कारण नंबी नारायणन को 75 लाख रुपयों का हर्जाना देना पड़ा, इस निर्दोष वैज्ञानिक ने कानूनी लड़ाई करीब दो दशकों तक लड़ी, यह आदेश जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने सुनाया था.
सायंटिस्ट नंबी नारायणन से जुड़ा विवाद “संक्षिप्त में”
बंटवारे के बाद से ही भारत-पाक रिश्ते अच्छे नहीं रहे. ऐसे में अगर किसी वैज्ञानिक पर खुफिया जानकारी-दस्तावेज दुश्मन देश को बेचने या मदद मुहैया कराने का आरोप लगे, तो परिणाम गंभीर ही होंगे.
वर्ष 1994 में नंबी पर कुछ ऐसे ही संगीन आरोप लगे, एजेंसिज ने उन्हें 50 दिन अरेस्ट कर के गहन पूछताछ की, लेकिन 2 साल बाद वर्ष 1996 में CBI ने सारे आरोप गलत पाए.
फिर वर्ष 1998 में सुप्रिम कोर्ट ने भी कहा कि नंबी नारायणन का कोई पाकिस्तान कनेक्शन नहीं है वे, पूरी तरह से निर्दोष है.
पूछताछ के दौरान नंबी को फिजिकली, इमोशनली और मेंटली टॉर्चर किया गया था, जिसके लिए 2 ऑफिशल्स के विरुद्ध इस वैज्ञानिक ने कोर्ट में पिटिशन भी फाइल किया था, के उन्हें जानबूझ कर जुठे केस में फ्रेम किया गया है.
उपलब्धियां और सम्मान

वर्ष 2019 में नंबी नारायणन को भारत का तीसरा सर्वोच्च सम्मान “पद्मभूषण” मिला, (पूर्व भारतीय प्रेसीडेंट रामनाथ कोविंद के हाथों से).
उनकी कहानी को Bollywold ने भी चित्रित किया है, वर्ष 2018 में साऊथ के एक्टर R. Madhvan नंबी नारायणन का रोल निभाने की हामी भरते हैं, Film का नाम The Rocketry: The Namby Effect रखा जाता है, जिसे 1 जुलाई 2022 को सिनेमाघरो में प्रकाशित किया जाता है, आज देश-दुनियां जानते हैं कि नंबी कौन है और उसने क्या सहा था और देश के लिए उ का क्या योगदान रहा है.
QNA (नंबी नारायणन की लाइफ स्टोरी)
Q – नंबी नारायणन कौन है?
A – वे भारत के प्रसिद्ध “ऐरोस्पेस इंजीनियर” है.
Q – नंबी नारायणन की जीवनी पर बनी फिल्म का नाम क्या था? उसमें Hero कौन थे?
A – फिल्म का नाम “रॉकेट्री: द नांबी इफ़ेक्ट” था और
साऊथ के एक्टर R.madhvan नायक बने थे.
Q – भारत सरकार की तरफ से नंबी नारायणन को कौनसा सम्मान मिला है?
A – वर्ष 2019 में Govt of India ने उन्हें “पद्मभूषण” अवार्ड दिया है. यह सम्मान उन्हें तब के भारतीय प्रेसीडेंट रामनाथ कोविंद के हाथों मिला.
Q – नंबी नारायणन के पेरेंट्स का नाम बताएं?
A – उनके पिता का नाम सी. वन्निया पेरुमल था, और उनकी माँ का नाम एस. थंगम्माल था.
Q – वैज्ञानिक नंबी नारायणन ISRO संस्था से कब जुड़े थे?
A – वे वर्ष 1966 में Indian Space Research Organisation (ISRO) से जुड़े थे.
Q – नंबी नारायणन पर कौनसा गंभीर आरोप लगा था?
A – उनपर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने और उन्हें ख़ुफ़िया दस्तावेज मुहैया कराने का संगीन आरोप लगा था, जो गलत साबित हुआ.
Q – नंबी नारायणन ने कितने वर्ष ISRO में सेवाएं दी?
A – उन्होंने 35 वर्ष ISRO में सेवाएं दी है और सतीश धवन, यू.आर. राव, विक्रम साराभाई और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे महान वैज्ञानिकों के साथ काम किया.
Q – नंबी नारायणन के साथ और किस वैज्ञानिक पर ISRO की खुफिया जानकारियां पाकिस्तान को बेचने का आरोप लगा था?
A – नंबी नारायणन और शशिकुमारन पर ISRO के कोफिडेंशल डॉक्युमेंट्स पैसे ले कर बेचने का आरोप लगा था.
Q – नंबी नारायणन ने क्या पढाई की है?
A – वे एरोस्पेस इंजिनयरिंग की पढ़ाई कर चुके हैं.
Q – नंबी नारायणन की एक प्रसिद्ध शोध बताएं?
A – उन्होंने वर्ष 1970 में लिक्विड फ्यूअल रॉकेट टेक्नोलॉजी की शोध की है.
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