बनारस में एक बड़े धनवान सेठ रहते थे। वह विष्णु भगवान् के परम भक्त थे और हमेशा सच बोला करते थे । एक बार जब भगवान् सेठ जी की प्रशंशा कर रहे थे तभी माँ लक्ष्मी ने कहा , " स्वामी , आप इस सेठ की इतनी प्रशंशा किया करते हैं , क्यों न आज उसकी परीक्षा ली जाए और जाना जाए कि क्या वह सचमुच इसके लायक है या नहीं ? " भगवान् बोले , " ठीक है ! अभी सेठ गहरी निद्रा में है आप उसके स्वप्न में जाएं और उसकी परीक्षा ले लें। " अगले ही क्षण सेठ जी को एक स्वप्न आया। स्वप्न मेँ धन की देवी लक्ष्मी उनके सामनेँ आई और … [Read more...]
एक कप कॉफ़ी | Hindi Story on Secret of Happiness
Hindi Story on Secret of Happiness ख़ुशी के रहस्य पर हिंदी कहानी जापान के टोक्यो शहर के निकट एक कस्बा अपनी खुशहाली के लिए प्रसिद्द था . एक बार एक व्यक्ति उस कसबे की खुशहाली का कारण जानने के लिए सुबह -सुबह वहाँ पहुंचा . कस्बे में घुसते ही उसे एक कॉफ़ी -शॉप दिखायी दी। उसने मन ही मन सोचा कि मैं यहाँ बैठ कर चुप -चाप लोगों को देखता हूँ , और वह धीरे -धीरे आगे बढ़ते हुए शॉप के अंदर लगी एक कुर्सी पर जा कर बैठ गया . कॉफ़ी-शॉप शहर के रेस्टोरेंटस की तरह ही थी , पर वहाँ उसे लोगों का व्यवहार कुछ अजीब … [Read more...]
परोपकार की ईंट | Hindi Story on Paropkar
Hindi Story on Paropkar परोपकार पर हिंदी कहानी बहुत समय पहले की बात है एक विख्यात ऋषि गुरुकुल में बालकों को शिक्षा प्रदान किया करते थे. उनके गुरुकुल में बड़े-बड़े रजा महाराजाओं के पुत्रों से लेकर साधारण परिवार के लड़के भी पढ़ा करते थे। वर्षों से शिक्षा प्राप्त कर रहे शिष्यों की शिक्षा आज पूर्ण हो रही थी और सभी बड़े उत्साह के साथ अपने अपने घरों को लौटने की तैयारी कर रहे थे कि तभी ऋषिवर की तेज आवाज सभी के कानो में पड़ी , "आप सभी मैदान में एकत्रित हो जाएं।" आदेश सुनते ही शिष्यों ने ऐसा ही … [Read more...]
सबसे बड़ा गुरू
गुरु द्रोणाचार्य, पाण्डवोँ और कौरवोँ के गुरु थे, उन्हेँ धनुर्विद्या का ज्ञान देते थे। एक दिन एकलव्य जो कि एक गरीब शुद्र परिवार से थे. द्रोणाचार्य के पास गये और बोले कि गुरुदेव मुझे भी धनुर्विद्या का ज्ञान प्राप्त करना है आपसे अनुरोध है कि मुझे भी आपका शिष्य बनाकर धनुर्विद्या का ज्ञान प्रदान करेँ। किन्तु द्रोणाचार्य नेँ एकलव्य को अपनी विवशता बतायी और कहा कि वे किसी और गुरु से शिक्षा प्राप्त कर लें। यह सुनकर एकलव्य वहाँ से चले गये। इस घटना के बहुत दिनों बाद अर्जुन और द्रोणाचार्य शिकार के लिये … [Read more...]
राजा और महात्मा
चंदनपुर का राजा बड़ा दानी और प्रतापी था , उसके राज्य में सब खुशहाल थे पर राजा एक बात को लेकर बहुत चिंतित रहा करता था कि धर्म व दर्शन पर लोगोँ के विचारोँ मेँ सहमति क्योँ नहीँ बनती। एक बार राजा ने विभिन्न धर्मोँ के उपदेशकोँ को आमंत्रित किया और एक विशाल कक्ष में सभी का एक साथ रहने का प्रबंध करते हुए कहा , " अब अगले कुछ दिनों तक आप सब एक साथ रहेंगे और आपस में विभिन्न धर्मो और दर्शनों पर विचार-विमर्श करेंगे। और जब आप सभी के विचार एक मत हो जायेंगे तो मैं आपको ढेरों उपहार देकर यहाँ से विदा करूँगा।" और … [Read more...]
साधु और नर्तकी
किसी गाँव मेँ एक साधु रहता था जो दिन भर लोगोँ को उपदेश दिया करता था। उसी गाँव मेँ एक नर्तकी थी, जो लोगोँ के सामनेँ नाचकर उनका मन बहलाया करती थी। एक दिन गाँव मेँ बाढ़ आ गयी और दोनोँ एक साथ ही मर गये। मरनेँ के बाद जब ये दोनोँ यमलोक पहूँचे तो इनके कर्मोँ और उनके पीछे छिपी भावनाओँ के आधार पर इन्हेँ स्वर्ग या नरक दिये जानेँ की बात कही गई। साधु खुद को स्वर्ग मिलनेँ को लेकर पुरा आश्वस्त था। वहीँ नर्तकी अपनेँ मन मेँ ऐसा कुछ भी विचार नहीँ कर रही थी। नर्तकी को सिर्फ फैसले का इंतजार था। तभी घोषणा हूई कि … [Read more...]
राजा की तीन सीखें Moral Stories in Hindi
Moral Tales in Hindi नैतिक शिक्षा देती कहानी बहुत समय पहले की बात है, सुदूर दक्षिण में किसी प्रतापी राजा का राज्य था. राजा के तीन पुत्र थे, एक दिन राजा के मन में आया कि पुत्रों को कुछ ऐसी शिक्षा दी जाये कि समय आने पर वो राज-काज सम्भाल सकें. इसी विचार के साथ राजा ने सभी पुत्रों को दरबार में बुलाया और बोला, “ पुत्रों, हमारे राज्य में नाशपाती का कोई वृक्ष नहीं है, मैं चाहता हूँ तुम सब चार-चार महीने के अंतराल पर इस वृक्ष की तलाश में जाओ और पता लगाओ कि वो कैसा होता है ?” राजा की आज्ञा पा कर … [Read more...]
जो चाहोगे सो पाओगे !
एक साधु था , वह रोज घाट के किनारे बैठ कर चिल्लाया करता था ,"जो चाहोगे सो पाओगे", जो चाहोगे सो पाओगे।" बहुत से लोग वहाँ से गुजरते थे पर कोई भी उसकी बात पर ध्यान नहीँ देता था और सब उसे एक पागल आदमी समझते थे। एक दिन एक युवक वहाँ से गुजरा और उसनेँ उस साधु की आवाज सुनी , "जो चाहोगे सो पाओगे", जो चाहोगे सो पाओगे।" ,और आवाज सुनते ही उसके पास चला गया। उसने साधु से पूछा -"महाराज आप बोल रहे थे कि 'जो चाहोगे सो पाओगे' तो क्या आप मुझको वो दे सकते हो जो मैँ जो चाहता हूँ?" साधु उसकी बात को सुनकर बोला - … [Read more...]
भिखारी का आत्मसम्मान
एक भिखारी किसी स्टेशन पर पेँसिलोँ से भरा कटोरा लेकर बैठा हुआ था। एक युवा व्यवसायी उधर से गुजरा और उसनेँ कटोरे मेँ 50 रूपये डाल दिया, लेकिन उसनेँ कोई पेँसिल नहीँ ली। उसके बाद वह ट्रेन मेँ बैठ गया। डिब्बे का दरवाजा बंद होने ही वाला था कि अधिकारी एकाएक ट्रेन से उतर कर भिखारी के पास लौटा और कुछ पेँसिल उठा कर बोला, "मैँ कुछ पेँसिल लूँगा। इन पेँसिलोँ की कीमत है, आखिरकार तुम एक व्यापारी हो और मैँ भी।" उसके बाद वह युवा तेजी से ट्रेन मेँ चढ़ गया। कुछ वर्षों बाद, वह व्यवसायी एक पार्टी मेँ गया। वह भिखारी … [Read more...]
तीन प्रश्न
मित्रों, विख्यात रूसी साहित्यकार “टालस्टाय” अपनी कहानी “तीन प्रश्न” में लिखते हैं कि किसी राजा के मन में तीन प्रश्न अक्सर उठा करते थे जिनके उत्तर पाने के लिए वह अत्यंत अधीर था इसलिए उसने अपने राज्यमंत्री से परामर्श किया और अपने सभासदों की एक बैठक बुलाई | राजा ने उस सभा में जो अपने तीनों प्रश्न सबके सम्मुख रखे ; वे थे --- 1. सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य क्या होता है ? 2. परामर्श के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति कौन होता है ? 3. किसी भी निश्चित कार्य को करने का महत्त्वपूर्ण समय कौन सा होता है? कोई … [Read more...]
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