एक दिन राजा भोज गहरी निद्रा में सोये हुए थे। उन्हें उनके स्वप्न में एक अत्यंत तेजस्वी वृद्ध पुरुष के दर्शन हुए। राजन ने उनसे पुछा- “महात्मन! आप कौन हैं?” वृद्ध ने कहा- “राजन मैं सत्य हूँ और तुझे तेरे कार्यों का वास्तविक रूप दिखाने आया हूँ। मेरे पीछे-पीछे चल आ और अपने कार्यों की वास्तविकता को देख!” राजा भोज उस वृद्ध के पीछे-पीछे चल दिए। राजा भोज बहुत दान, पुण्य, यज्ञ, व्रत, तीर्थ, कथा-कीर्तन करते थे, उन्होंने अनेक तालाब, मंदिर, कुँए, बगीचे आदि भी बनवाए थे। राजा के मन में इन कार्यों के कारण … [Read more...]
महान वैज्ञानिक मैडम मैरी क्युरी का प्रेरणादायी जीवन
भारत में एवं विश्व के अनेक देशो में अनगिनत महिलाओं ने अपनी उपलब्धियों से अपने देश का नाम रौशन किया है। कुछ महिलाएं अपने कार्य तथा अपनी सोच के कारण हर किसी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। जनहित और राष्ट्र कल्याण के लिए अपने प्राणों की भी परवाह न करने वाली मैडम क्युरी समस्त विश्व के लिए एक आर्दश उदाहरण हैं। लिंग और सिमाओं से परे हर किसी के लिए मैरी क्युरी प्रेरणा स्रोत हैं। मैडम क्युरी एक रशियन महिला थीं। उनका जन्म वारसा (पोलैंड) में 7 नवंबर 1867 को हुआ था। माता पिता सुयोग्य अध्यापक थे। माँ … [Read more...]
खंडहरों का शहर
एक बार बुरी आत्माओं ने भगवान से शिकायत की कि उनके साथ इतना बुरा व्यवहार क्यों किया जाता है, अच्छी आत्माएं इतने शानदार महल में रहती हैं और हम सब खंडहरों में, आखिर ये भेदभाव क्यों है, जबकि हम सब आप ही की संतान हैं। भगवान ने उन्हें समझाया, " मैंने तो सभी को एक जैसा ही बनाया पर तुम ही अपने कर्मो से बुरी आत्माएं बन गयीं। पर भगवान के समझाने पर भी बुरी आत्माएं भेदभाव किये जाने की शिकायत करतीं रहीं। इसपर भगवान ने कुछ देर सोचा और सभी अच्छी-बुरी आत्माओं को बुलाया और बोले, “ बुरी आत्माओं के अनुरोध … [Read more...]
स्वाइन फ्लू से बचने के आयुर्वेदिक उपाय
Swine Flu Ayurvedic Treatment in Hindi स्वाइन फ्लू से बचने के आयुर्वेदिक उपाय स्वाइन फ्लू श्वसन प्रणाली (रेस्पिरेटरी सिस्टम ) से सम्बंधित वायरस से फ़ैलाने वाली एक गंभीर बीमारी है। इसके वायरस का नाम h१n१ है। आज सम्पूर्ण मानव जाति इससे त्रस्त है। इस बीमारी से बचना ही सबसे बेहतर उपाय है। रोग का प्रचार - जब कोई व्यक्ति खांसता या छींकता है तो उसके मुहं से कफ के छोटे छोटे कण निकलते हैं इन्ही कफ के कणों में वायरस छिपे रहते हैं जब कोई स्वस्थ व्यक्ति इन कफ की बूंदो के संपर्क में आता है तो वह इन वायरस … [Read more...]
दो शब्द
बहुत समय पहले की बात है , एक प्रसिद्द गुरु अपने मठ में शिक्षा दिया करते थे। पर यहाँ शिक्षा देना का तरीका कुछ अलग था , गुरु का मानना था कि सच्चा ज्ञान मौन रह कर ही आ सकता है; और इसीलिए मठ में मौन रहने का नियम था । लेकिन इस नियम का भी एक अपवाद था , दस साल पूरा होने पर कोई शिष्य गुरु से दो शब्द बोल सकता था। पहला दस साल बिताने के बाद एक शिष्य गुरु के पास पहुंचा , गुरु जानते थे की आज उसके दस साल पूरे हो गए हैं ; उन्होंने शिष्य को दो उँगलियाँ दिखाकर अपने दो शब्द बोलने का इशारा किया। शिष्य बोला , " … [Read more...]
सबसे बड़ा धनुर्धर
बहुत सी तीरंदाजी प्रतियोगिताएँ जीतने के बाद एक नौजवान तीरंदाज खुद को सबसे बड़ा धनुर्धर मानने लगा । वह जहाँ भी जाता लोगों को उससे मुकाबला करने की चुनौती देता, और उन्हें हरा कर उनका मज़ाक उड़ाता । एक बार उसने एक प्रसिद्द ज़ेन मास्टर को चुनौती देने का फैसला किया और सुबह -सुबह पहाड़ों के बीच स्थित उनके मठ जा पहुंचा । "मास्टर मैं आपको तीरंदाजी मुकाबले के लिए चुनौती देता हूँ । ", नवयुवक बोला । मास्टर ने नवयुवक की चुनौती स्वीकार कर ली । मुक़ाबला शुरू हुआ । नवयुवक ने अपने पहले प्रयास में ही दूर रखे … [Read more...]
शिवाजी की सहनशीलता
एक बार छत्रपति शिवाजी महाराज जंगल में शिकार करने जा रहे थे। अभी वे कुछ दूर ही आगे बढे थे कि एक पत्थर आकर उनके सर पे लगा। शिवाजी क्रोधित हो उठे , और इधर-उधर देखने लगे , पर उन्हें कोई भी दिखाई नहीं दे रहा था , तभी पेड़ों के पीछे से एक बुढ़िया सामने आई और बोली , " ये पत्थर मैंने फेंका था !" "आपने ऐसा क्यों किया ?", शिवाजी ने पूछा। "क्षमा कीजियेगा महाराज , मैं तो आम के इस पेड़ से कुछ आम तोड़ना चाहती थी , पर बूढी होने के कारण मैं इस पर चढ़ नहीं सकती इसलिए पत्थर मारकर फल तोड़ रही थी , पर गलती से वो … [Read more...]
मेंढक का रखवाला
एक राजा अपनी वीरता और सुशासन के लिए प्रसिद्द था। एक बार वो अपने गुरु के साथ भ्रमण कर रहा था, राज्य की समृद्धि और खुशहाली देखकर उसके भीतर घमंड के भाव आने लगे , और वो मन ही मन सोचने लगे , " सचमुच, मैं एक महान राजा हूँ , मैं कितने अच्छे से अपने प्रजा देखभाल करता हूँ !" गुरु सर्वज्ञानी थे , वे तुरंत ही अपने शिष्य के भावों को समझ गए और तत्काल उसे सुधारने का निर्णय लिया। रास्ते में ही एक बड़ा सा पत्थर पड़ा था , गुरु जी ने सैनिकों को उसे तोड़ने का निर्देश दिया। जैसे ही सैनिकों ने पत्थर के दो … [Read more...]
‘ध्यान’– क्यों और कैसे
Note: सुनील जी की इस पोस्ट को पब्लिश करने के बाद कई लोगों ने कमेन्ट से बताया कि ये संदीप माहेश्वरी जी के विडियो से ली गयी है. इसलिए मैं उनका मैडिटेशन से related video यहाँ embed कर रहा हूँ: आज योग और ध्यान (Meditation) बहुत ही सामान्य शब्द हो गए हैं । हम सभी इससे भली भांति परिचित हैं और हममें से काफी लोग योग करते भी है । टी.वी. और इंटरनेट ने इसमें काफी सहायता की है । पर अक्सर यही देखने मे आता है कि हम इसकी शुरुआत तो जोर-शोर से करते हैं पर धीरे-धीरे इस उत्साह में कमी होती जाती है ओर हम इसे … [Read more...]
सफलता पाने के 5 सूत्र
सफलता मात्र असफलता का विरोधाभास नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के मन में दबी हुई इच्छाओं का एक ऐसा मोती है, जिसे हर कोई अपनी हथेली में रखना चाहता है। इसे पाने की प्रबल प्रेरणा व्यक्ति को सिफर से शिखर तक पहुँचा देती है। असंख्य लोग दिन-प्रतिदिन सफलता प्राप्त करते हैं, पर क्या कारण है कि उन असंख्य लोगों में हमारी गिनती नहीं होती? हम सफलता से इतने दूर क्यों है? इसके लिए मन में विजेता बनने का निश्चय करना जरुरी है। सूरज को जिस तरह से रोशनी देने से कोई रोक नहीं सकता, उसी तरह आपको भी कोई सफल होने से रोक … [Read more...]
- « Previous Page
- 1
- …
- 65
- 66
- 67
- 68
- 69
- …
- 125
- Next Page »









