बहुत समय पहले की बात है , एक प्रसिद्द गुरु अपने मठ में शिक्षा दिया करते थे। पर यहाँ शिक्षा देना का तरीका कुछ अलग था , गुरु का मानना था कि सच्चा ज्ञान मौन रह कर ही आ सकता है; और इसीलिए मठ में मौन रहने का नियम था । लेकिन इस नियम का भी एक अपवाद था , दस साल पूरा होने पर कोई शिष्य गुरु से दो शब्द बोल सकता था। पहला दस साल बिताने के बाद एक शिष्य गुरु के पास पहुंचा , गुरु जानते थे की आज उसके दस साल पूरे हो गए हैं ; उन्होंने शिष्य को दो उँगलियाँ दिखाकर अपने दो शब्द बोलने का इशारा किया। शिष्य बोला , " … [Read more...]
सबसे बड़ा धनुर्धर
बहुत सी तीरंदाजी प्रतियोगिताएँ जीतने के बाद एक नौजवान तीरंदाज खुद को सबसे बड़ा धनुर्धर मानने लगा । वह जहाँ भी जाता लोगों को उससे मुकाबला करने की चुनौती देता, और उन्हें हरा कर उनका मज़ाक उड़ाता । एक बार उसने एक प्रसिद्द ज़ेन मास्टर को चुनौती देने का फैसला किया और सुबह -सुबह पहाड़ों के बीच स्थित उनके मठ जा पहुंचा । "मास्टर मैं आपको तीरंदाजी मुकाबले के लिए चुनौती देता हूँ । ", नवयुवक बोला । मास्टर ने नवयुवक की चुनौती स्वीकार कर ली । मुक़ाबला शुरू हुआ । नवयुवक ने अपने पहले प्रयास में ही दूर रखे … [Read more...]
शिवाजी की सहनशीलता
एक बार छत्रपति शिवाजी महाराज जंगल में शिकार करने जा रहे थे। अभी वे कुछ दूर ही आगे बढे थे कि एक पत्थर आकर उनके सर पे लगा। शिवाजी क्रोधित हो उठे , और इधर-उधर देखने लगे , पर उन्हें कोई भी दिखाई नहीं दे रहा था , तभी पेड़ों के पीछे से एक बुढ़िया सामने आई और बोली , " ये पत्थर मैंने फेंका था !" "आपने ऐसा क्यों किया ?", शिवाजी ने पूछा। "क्षमा कीजियेगा महाराज , मैं तो आम के इस पेड़ से कुछ आम तोड़ना चाहती थी , पर बूढी होने के कारण मैं इस पर चढ़ नहीं सकती इसलिए पत्थर मारकर फल तोड़ रही थी , पर गलती से वो … [Read more...]
मेंढक का रखवाला
एक राजा अपनी वीरता और सुशासन के लिए प्रसिद्द था। एक बार वो अपने गुरु के साथ भ्रमण कर रहा था, राज्य की समृद्धि और खुशहाली देखकर उसके भीतर घमंड के भाव आने लगे , और वो मन ही मन सोचने लगे , " सचमुच, मैं एक महान राजा हूँ , मैं कितने अच्छे से अपने प्रजा देखभाल करता हूँ !" गुरु सर्वज्ञानी थे , वे तुरंत ही अपने शिष्य के भावों को समझ गए और तत्काल उसे सुधारने का निर्णय लिया। रास्ते में ही एक बड़ा सा पत्थर पड़ा था , गुरु जी ने सैनिकों को उसे तोड़ने का निर्देश दिया। जैसे ही सैनिकों ने पत्थर के दो … [Read more...]
आखिरी सन्देश
ऋषिकेश के एक प्रसिद्द महात्मा बहुत वृद्ध हो चले थे और उनका अंत निकट था . एक दिन उन्होंने सभी शिष्यों को बुलाया और कहा , " प्रिय शिष्यों मेरा शरीर जीर्ण हो चुका है और अब मेरी आत्मा बार -बार मुझे इसे त्यागने को कह रही है , और मैंने निश्चय किया है कि आज के दिन जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर जाएगा तब मैं इहलोक त्याग दूंगा ." गुरु की वाणी सुनते ही शिष्य घबड़ा गए , शोक -विलाप करने लगे , पर गुरु जी ने सबको शांत रहने और इस अटल सत्य को स्वीकारने के लिए कहा . कुछ देर बाद जब सब चुप हो गए तो एक शिष्य ने … [Read more...]
सौ ऊंट | समस्या हल करने की सीख देती कहानी
अजय राजस्थान के किसी शहर में रहता था . वह ग्रेजुएट था और एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता था . पर वो अपनी ज़िन्दगी से खुश नहीं था , हर समय वो किसी न किसी समस्या से परेशान रहता था और उसी के बारे में सोचता रहता था. एक बार अजय के शहर से कुछ दूरी पर एक फ़कीर बाबा का काफिला रुका हुआ था . शहर में चारों और उन्ही की चर्चा थी , बहुत से लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके पास पहुँचने लगे , अजय को भी इस बारे में पता चला, और उसने भी फ़कीर … [Read more...]
फाइव मंकीज एक्सपेरिमेंट
एक बार कुछ scientists ने एक बड़ा ही interesting experiment* किया .उन्होंने 5 बंदरों को एक बड़े से cage में बंद कर दिया और बीचों -बीच एक सीढ़ी लगा दी जिसके ऊपर केले लटक रहे थे . जैसा की expected है जैसे ही एक बन्दर की नज़र केलों पर पड़ी वो उन्हें खाने के लिए दौड़ा , पर जैसे ही उसने कुछ सीढ़ियां चढ़ीं उसपर ठण्डे पानी की तेज धार डाल दी गयी और उसे उतर कर भागना पड़ा . पर experimenters यहीं नहीं रुके , उन्होंने एक बन्दर के किये गए की सजा बाकी बंदरों को भी दे डाली और सभी को ठन्डे पानी से भिगो दिया . बेचारे … [Read more...]
तीन गांठें – भगवान् बुद्ध प्रेरक प्रसंग
भगवान बुद्ध अक्सर अपने शिष्यों को शिक्षा प्रदान किया करते थे। एक दिन प्रातः काल बहुत से भिक्षुक उनका प्रवचन सुनने के लिए बैठे थे । बुद्ध समय पर सभा में पहुंचे, पर आज शिष्य उन्हें देखकर चकित थे क्योंकि आज पहली बार वे अपने हाथ में कुछ लेकर आए थे। करीब आने पर शिष्यों ने देखा कि उनके हाथ में एक रस्सी थी। बुद्ध ने आसन ग्रहण किया और बिना किसी से कुछ कहे वे रस्सी में गांठें लगाने लगे । वहाँ उपस्थित सभी लोग यह देख सोच रहे थे कि अब बुद्ध आगे क्या करेंगे ; तभी बुद्ध ने सभी से एक प्रश्न किया, ‘ मैंने इस … [Read more...]
दूसरा दीपक
Chanakya Niti Story in Hindi चाणक्य नीति पर हिंदी कहानी एक बार की बात है , मगध साम्राज्य के सेनापति किसी व्यक्तिगत काम से चाणक्य से मिलने पाटलिपुत्र पहुंचे । शाम ढल चुकी थी , चाणक्य गंगा तट पर अपनी कुटिया में, दीपक के प्रकाश में कुछ लिख रहे थे। कुछ देर बाद जब सेनापति भीतर दाखिल हुए, उनके प्रवेश करते ही चाणक्य ने सेवक को आवाज़ लगायी और कहा , " आप कृपया इस दीपक को ले जाइए और दूसरा दीपक जला कर रख दीजिये।" सेवक ने आज्ञा का पालन करते हुए ठीक वैसा ही किया। जब चर्चा समाप्त हो गयी तब सेनापति ने … [Read more...]
इलेक्ट्रिक शॉक
Friends, AKC पर published पिछली कहानी "खाली डिब्बा" में मैंने आपसे out of the box या creative thinking से related बात की थी . इस story को पढ़ने के बाद हमें एक reader Mr. Mohammad Aadil ने अपनी life से related इसी तरह की एक और real story share की जो हमें problem solving के लिए creative approach apply करने की सीख देती है। आइये जानते हैं उनकी कहानी। इलेक्ट्रिक शॉक Friends, मैं Mechanical Engineer हूँ और एक private company में जॉब करता हूँ . ये कुछ वर्ष पहले की बात है , मैं जहाँ काम करता हूँ … [Read more...]
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