एक बार दो गधे अपनी पीठ पर बोझा उठाये चले जा रहे थे, उनको काफी लंबा सफर तय करना था.. एक गधे की पीठ पर नमक की भारी बोरियां लदी हुई थीं तो एक की पीठ पर रूई की बोरियां लदी हुई थीं. जिस रास्ते से वो जा रहे थे उस बीच में एक नदी पड़ी, नदी के ऊपर रेत की बोरियों का कच्चा पुल बना हुआ था.. जिस गधे की पीठ पर नमक की बोरियां थीं, उसका पैर बुरी तरह से फिसल गया और वह नदी के अंदर गिर पड़ा.. नदी में गिरते ही नमक पानी में घुल गया और उसका वजन हल्का हो गया.. वह यह बात बड़ी प्रसन्नता से दुसरे को बताने लगा.. दुसरे गधे … [Read more...]
गेंहू के दाने
एक समय की बात है जब श्रावस्ती नगर के एक छोटे से गाँव में अमरसेन नामक व्यक्ति रहता था। अमरसेन बड़ा होशियार था, उसके चार पुत्र थे जिनके विवाह हो चुके थे और सब अपना जीवन जैसे-तैसे निर्वाह कर रहे थे परन्तु समय के साथ-साथ अब अमरसेन वृद्ध हो चला था ! पत्नी के स्वर्गवास के बाद उसने सोचा कि अब तक के संग्रहित धन और बची हुई संपत्ती का उत्तराधिकारी किसे बनाया जाये ? ये निर्णय लेने के लिए उसने चारो बेटों को उनकी पत्नियों के साथ बुलाया और एक-एक करके गेहूं के पाँच दानें दिए और कहा कि मै तीरथ पर जा रहा हूँ और … [Read more...]
किसान की सीख
बहुत ठण्ड पड़ रही थी । एक किसान रविवार के दिन मीलों चलकर पहाड़ी पर स्थित एक चर्च पर पहुंचा। चर्च का दरवाज़ा बंद था। किसान ऊँची आवाज़ में बोला , " अरे कोई है ?" पादरी बाहर आया , वह किसान को देखकर कुछ हैरान था, " आज ठण्ड बहुत है , मुझे तो उम्मीद ही नहीं थी कि आज की प्रार्थना में कोई आएगा, इसीलिए मैंने भी कोई तैयारी नहीं की , अब सिर्फ एक आदमी के लिए इतना सबकुछ करना ठीक रहेगा क्या ... क्यों ना हम आज पूजा रहने दें और अपने घरों में जाकर आराम करें ?", पादरी बोला। "साहब , मैं तो एक साधारण सा किसान हूँ … [Read more...]
नज़रिया
अर्जेंटीना के गोल्फर रॉबर्टो डी वीन्सेन्ज़ो अपने दौर के बहुत बड़े गोल्फ खिलाडी रहे हैं . उन्होंने अपने करियर के दौरान दुनिया भर में 230 से अधिक टूर्नामेंट्स जीते . पर वे सिर्फ अपने शानदार खेल के लिए ही नहीं बल्कि अपने पॉजिटिव ऐटिट्यूड के लिए भी जाने जाते हैं . आइये हम उनकी लाइफ से रिलेटेड एक दिल छू लेने वाले वाकये को देखते हैं . एक बार रॉबर्टो ने कोई टूर्नामेंट जीता , इनाम में मिले चेक को लेकर वे ड्रेसिंग रूम में चले गए और वहां काफी समय बिताया . जब वे बाहर निकले तो सब लोग जा चुके थे , वे आराम … [Read more...]
भगवान की खोज !
तेरहवीं सदी में महाराष्ट्र में एक प्रसिद्द संत हुए संत नामदेव। कहा जाता है कि जब वे बहुत छोटे थे तभी से भगवान की भक्ति में डूबे रहते थे। बाल -काल में ही एक बार उनकी माता ने उन्हें भगवान विठोबा को प्रसाद चढाने के लिए दिया तो वे उसे लेकर मंदिर पहुंचे और उनके हठ के आगे भगवान को स्वयं प्रसाद ग्रहण करने आना पड़ा। आज हम उसी महान संत से सम्बंधित एक प्रेरक प्रसंग आपसे साझा कर रहे हैं। एक बार संत नामदेव अपने शिष्यों को ज्ञान -भक्ति का प्रवचन दे रहे थे। तभी श्रोताओं में बैठे किसी शिष्य ने एक प्रश्न … [Read more...]
राजा भोज और सत्य
एक दिन राजा भोज गहरी निद्रा में सोये हुए थे। उन्हें उनके स्वप्न में एक अत्यंत तेजस्वी वृद्ध पुरुष के दर्शन हुए। राजन ने उनसे पुछा- “महात्मन! आप कौन हैं?” वृद्ध ने कहा- “राजन मैं सत्य हूँ और तुझे तेरे कार्यों का वास्तविक रूप दिखाने आया हूँ। मेरे पीछे-पीछे चल आ और अपने कार्यों की वास्तविकता को देख!” राजा भोज उस वृद्ध के पीछे-पीछे चल दिए। राजा भोज बहुत दान, पुण्य, यज्ञ, व्रत, तीर्थ, कथा-कीर्तन करते थे, उन्होंने अनेक तालाब, मंदिर, कुँए, बगीचे आदि भी बनवाए थे। राजा के मन में इन कार्यों के कारण … [Read more...]
खंडहरों का शहर
एक बार बुरी आत्माओं ने भगवान से शिकायत की कि उनके साथ इतना बुरा व्यवहार क्यों किया जाता है, अच्छी आत्माएं इतने शानदार महल में रहती हैं और हम सब खंडहरों में, आखिर ये भेदभाव क्यों है, जबकि हम सब आप ही की संतान हैं। भगवान ने उन्हें समझाया, " मैंने तो सभी को एक जैसा ही बनाया पर तुम ही अपने कर्मो से बुरी आत्माएं बन गयीं। पर भगवान के समझाने पर भी बुरी आत्माएं भेदभाव किये जाने की शिकायत करतीं रहीं। इसपर भगवान ने कुछ देर सोचा और सभी अच्छी-बुरी आत्माओं को बुलाया और बोले, “ बुरी आत्माओं के अनुरोध … [Read more...]
दो शब्द
बहुत समय पहले की बात है , एक प्रसिद्द गुरु अपने मठ में शिक्षा दिया करते थे। पर यहाँ शिक्षा देना का तरीका कुछ अलग था , गुरु का मानना था कि सच्चा ज्ञान मौन रह कर ही आ सकता है; और इसीलिए मठ में मौन रहने का नियम था । लेकिन इस नियम का भी एक अपवाद था , दस साल पूरा होने पर कोई शिष्य गुरु से दो शब्द बोल सकता था। पहला दस साल बिताने के बाद एक शिष्य गुरु के पास पहुंचा , गुरु जानते थे की आज उसके दस साल पूरे हो गए हैं ; उन्होंने शिष्य को दो उँगलियाँ दिखाकर अपने दो शब्द बोलने का इशारा किया। शिष्य बोला , " … [Read more...]
सबसे बड़ा धनुर्धर
बहुत सी तीरंदाजी प्रतियोगिताएँ जीतने के बाद एक नौजवान तीरंदाज खुद को सबसे बड़ा धनुर्धर मानने लगा । वह जहाँ भी जाता लोगों को उससे मुकाबला करने की चुनौती देता, और उन्हें हरा कर उनका मज़ाक उड़ाता । एक बार उसने एक प्रसिद्द ज़ेन मास्टर को चुनौती देने का फैसला किया और सुबह -सुबह पहाड़ों के बीच स्थित उनके मठ जा पहुंचा । "मास्टर मैं आपको तीरंदाजी मुकाबले के लिए चुनौती देता हूँ । ", नवयुवक बोला । मास्टर ने नवयुवक की चुनौती स्वीकार कर ली । मुक़ाबला शुरू हुआ । नवयुवक ने अपने पहले प्रयास में ही दूर रखे … [Read more...]
शिवाजी की सहनशीलता
एक बार छत्रपति शिवाजी महाराज जंगल में शिकार करने जा रहे थे। अभी वे कुछ दूर ही आगे बढे थे कि एक पत्थर आकर उनके सर पे लगा। शिवाजी क्रोधित हो उठे , और इधर-उधर देखने लगे , पर उन्हें कोई भी दिखाई नहीं दे रहा था , तभी पेड़ों के पीछे से एक बुढ़िया सामने आई और बोली , " ये पत्थर मैंने फेंका था !" "आपने ऐसा क्यों किया ?", शिवाजी ने पूछा। "क्षमा कीजियेगा महाराज , मैं तो आम के इस पेड़ से कुछ आम तोड़ना चाहती थी , पर बूढी होने के कारण मैं इस पर चढ़ नहीं सकती इसलिए पत्थर मारकर फल तोड़ रही थी , पर गलती से वो … [Read more...]
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