एक बौद्ध भिक्षुक भोजन बनाने के लिए जंगल से लकड़ियाँ चुन रहा था कि तभी उसने कुछ अनोखा देखा ,
“कितना अजीब है ये !”, उसने बिना पैरों की लोमड़ी को देखते हुए मन ही मन सोचा .
“ आखिर इस हालत में ये जिंदा कैसे है ?” उसे आशचर्य हुआ , “ और ऊपर से ये बिलकुल स्वस्थ है ”

वह अपने ख़यालों में खोया हुआ था की अचानक चारो तरफ अफरा – तफरी मचने लगी ; जंगल का रजा शेर उस तरफ आ रहा था . भिक्षुक भी तेजी दिखाते हुए एक ऊँचे पेड़ पर चढ़ गया , और वहीँ से सब कुछ देखने लगा .
शेर ने एक हिरन का शिकार किया था और उसे अपने जबड़े में दबा कर लोमड़ी की तरफ बढ़ रहा था , पर उसने लोमड़ी पर हमला नहीं किया बल्कि उसे भी खाने के लिए मांस के कुछ टुकड़े डाल दिए .
“ ये तो घोर आश्चर्य है , शेर लोमड़ी को मारने की बजाये उसे भोजन दे रहा है .” , भिक्षुक बुदबुदाया,उसे अपनी आँखों पर भरोसा नहीं हो रहा था इसलिए वह अगले दिन फिर वहीँ आया और छिप कर शेर का इंतज़ार करने लगा . आज भी वैसा ही हुआ , शेर ने अपने शिकार का कुछ हिस्सा लोमड़ी के सामने डाल दिया .
“यह भगवान् के होने का प्रमाण है !” भिक्षुक ने अपने आप से कहा . “ वह जिसे पैदा करता है उसकी रोटी का भी इंतजाम कर देता है , आज से इस लोमड़ी की तरह मैं भी ऊपर वाले की दया पर जीऊंगा , इश्वर मेरे भी भोजन की व्यवस्था करेगा .” और ऐसा सोचते हुए वह एक वीरान जगह पर जाकर एक पेड़ के नीचे बैठ गया .
पहला दिन बीता , पर कोई वहां नहीं आया , दूसरे दिन भी कुछ लोग उधर से गुजर गए पर भिक्षुक की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया . इधर बिना कुछ खाए -पीये वह कमजोर होता जा रहा था . इसी तरह कुछ और दिन बीत गए , अब तो उसकी रही सही ताकत भी खत्म हो गयी …वह चलने -फिरने के लायक भी नहीं रहा . उसकी हालत बिलकुल मृत व्यक्ति की तरह हो चुकी थी की तभी एक महात्मा उधर से गुजरे और भिक्षुक के पास पहुंचे .
उसने अपनी सारी कहानी महात्मा जी को सुनाई और बोला , “ अब आप ही बताइए कि भगवान् इतना निर्दयी कैसे हो सकते हैं , क्या किसी व्यक्ति को इस हालत में पहुंचाना पाप नहीं है ?”
“ बिल्कुल है ,”, महात्मा जी ने कहा , “ लेकिन तुम इतना मूर्ख कैसे हो सकते हो ? तुम ये क्यों नहीं समझे कि भगवान् तुम्हे उसे शेर की तरह बनते देखना चाहते थे , लोमड़ी की तरह नहीं !!!”
दोस्तों , हमारे जीवन में भी ऐसा कई बार होता है कि हमें चीजें जिस तरह समझनी चाहिए उसके विपरीत समझ लेते हैं. ईश्वर ने हम सभी के अन्दर कुछ न कुछ ऐसी शक्तियां दी हैं जो हमें महान बना सकती हैं , ज़रुरत हैं कि हम उन्हें पहचाने , उस भिक्षुक का सौभाग्य था की उसे उसकी गलती का अहसास कराने के लिए महात्मा जी मिल गए पर हमें खुद भी चौकन्ना रहना चाहिए की कहीं हम शेर की जगह लोमड़ी तो नहीं बन रहे हैं.
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Note: The inspirational story shared here is not my original creation, I have read it before and I am just providing a Hindi version of the same.

Stories likhna alag baat h par vyakti ka dyan akrshit karvana doosri baat
Story is interesting
Jaha par satch me jarurat hoti hai oha par esawar jarur pahuchata hai jab hame esawar ne kabil bana kar bheja hai to bar bar use kayo bulana
Very nice history. Apne vicharo ko aage badate rho..Maa bhagvti aap ko khus rkhe
Maine apni ak kavita hindi me photo ke sath bheji hai.uske kya hua kya mai jaan sakti hu ?mai kahaniya bhi bhejna chahti hu is liye kavita ke vishay me jaankari chah rHi hu .aapka site best hai mubarak ho.
Kripya punah behejein, waise aamtaur par main kavitaein nahi prakashit karta, kahaniyan behjein to behtar hoga.
Jin janvaro ko bolnabhi nahi aata o dusro ki problem ko samaj jata hai to inasan ke pas sab kuch hote hue bhi vo anjan kyo ban jata hai.gr
Great motivational story.thank you.
kash sab sher ban pate
INSAN KO DUSRON PR NIRBHR NHI RHNA CHAHIYE
JO APNE LIYE NIYM NHI BNATA HE USSE DUSRON KE BNAYE NIYMON PR CHALNA PRTA H
जब हमारी संघर्ष करने की इच्छा दम तोड़ने लगे एवँ हम स्वयँ मेहनत ना करके दूसरोँ से अपेक्षा करने लगे समझो कि हम अवनमन की ओर अग्रसर होँ रहेँ हैँ
Aatma aur man ek dusre ke dushman hai. Janha par aatma g hote hain vanha par man nahi hota hai. Aur janha par man hota hai wanha hamare aatma g nahi hote. Janha par aish ki bat hui wanha par man hua. Aur janha par man hoga wanha par Aatma g kanha rahenge. Jo vyakti apne aatma ko rakhta hai use jindagi mein sab kuchh hasil hota. Atanh sabh jagah par apna aatma lekar jana man nahi. Aur aish ki bat jindagi me kabhi mat sochna. Aap hamesha apne aatma ko khush karane wala karya karna phir dekhana tumhe jindagi me kya-kya hasil hogi. It’s written by me. Digvijay Patel, Sarangarh, Dist.-Raigarh (C.G.) please ise main story bana kar email karunga. Ise publish karna please.
ISWAR SAVI PAR NAJAR RAKHATE HAIN LEKIN MOTE TAJE LOG VI RUP BANAKAR DUNIYA WALE KO THAGATE HAIN ISILIE UNAKE SATH BURA HOTA RAHATA HAI.