सेल्फ-हेल्प गुरु रॉबिन शर्मा की The Greatness Guide 2 बुक में चैप्टर नंबर. 77 का टाइटल है – गो परपेंडीकुलर.

Perpendicular यानी सीधा. आम तौर पर सबसे पहले ये शब्द हम मैथ्स की क्लास में सुनते हैं… लेकिन आज ये वर्ड हम ज़िन्दगी की क्लास में यूज कर रहे हैं.
रॉबिन बताते हैं कि लाइफ में कुछ GREAT करना है तो perpendicular जाइए… जैसे पहली बार क्रिस्टोफर कोलंबस गया था… जब उसने अमेरिका की खोज की थी. उस समय कोई भी नाविक अनंत समुद्र में जाने से डरता था… और बस उतना ही आगे बढ़ता था जहाँ से उसे जमीन नज़र आ सके…. उसके बाद वो जमीन के parallel चलता था…लेकिन कोलंबस ने हिम्मत दिखाई और वो अपना जहाज parallel नहीं perpendicular लेकर गया…. और इतिहास रच डाला.
- क्या आप अपनी लाइफ में कभी पप्पप गए हैं?
- क्या आपने कभी अपना सुरक्षा घेरा तोड़ा है?
- क्या आप कभी “unknown” की तरफ कदम बढ़ाने की हिम्मत दिखा पाए हैं?
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दोस्तों, मैं अपनी लाइफ में कई बार perpendicular गया हूँ…
➡ पहली बार जब मैंने खुद निश्चय किया था कि मुझे Engineering नहीं करनी…
➡ दूसरी बार against family अपना life-partner चुनने में…
➡ तीसरी बार जब मैंने अपना मन का काम, यानी AchhiKhabar.Com को रन करने के लिए अपनी MNC job छोड़ दी थी…
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अगर आप भी perpendicular गए हैं … अगर आपने भी लाइफ में रिस्क लिए हैं तो यकीन जानिये आपने अच्छा किया… चाहे उसका नतीजा जो भी रहा हो… और नहीं गए हैं तो इस बात को समझ लीजिये कि इस दुनिया को वही बदलते हैं जो dare करते हैं… जो लीक से हट कर चलने का साहस दिखाते हैं… और यही लोग वास्तव में अपने full potential को realize करते हैं.
अगर कोलंबस किनारा छोड़ने का साहस नहीं दिखाता…अगर राईट ब्रदर्स हवा में उड़ने की हिम्मत नहीं करते… अगर धीरुभाई अम्बानी पेट्रोल पंप की नौकरी नहीं छोड़ते…अगर शाहरुख़ खान दिल्ली का आराम छोड़ कर मुम्बई की सड़कों पर नहीं भटकते…अगर मैरी कॉम चूल्हा-चौका छोड़कर बॉक्सिंग ग्लव्स नहीं पहनती…तो क्या उनकी ज़िन्दगी बदलती… तो क्या वे इस दुनिया को वो दे पाते जो उन्होंने दिया है?
नहीं दे पाते न!
इसीलिए लाइफ में अगर कभी कुछ बहुत अपीलिंग लगे..लगे कि यही वो चीज है जो मुझे करनी चाहिए तो don’t stop yourself…. go perpendicular.
ज्यादा से ज्यादा क्या होगा? आप फेल होंगे ? लेकिन अगर आपने ऐसा नहीं किया तो आप फेल होंगे नहीं आप fail हैं!
एक चीज समझ लीजिये आज से बीस साल बाद आपको चीजें करने का नहीं… चीजें छोड़ने का अधिक अफ़सोस होगा.
इसलिए जो precautions लेने हैं लीजिये…जितने दिन का खाना नाव पर रख सकते हैं रखिये…पर अपनी ज़मीन को जकड़े मत रहिये… हिम्मत दिखाइए… perpendicular जाइए!
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wah! bahut accha article likha aapne…..apne dil ki sunkar hi koi vtakti aage badh sakta hai…..jeevan me success samajhdari se liye gaye risk se hi milti hai….
सर आपका ब्लॉग बहुत अच्छा है। में आपके ब्लॉग पे हररोज पड़ता हूं। आप बहुत अच्छी इंफॉर्मेशन शेयर करते है। आपकी advice मुझे बहुत काम आती है। Thank You sir
Aap itni achhi achhi bate batate ho ki aapka blog chodne ka man hi nahin karta lagta hai ki bas padhte hi jaun.
Sir bhut hi achchhi or prernadayak post hai apki or me apki sbhi post pdhta hu me 2013 se apse judha hu ap aise hi likhte rhiye
Mai bhi kuch aisa hi kar raha hu last ke 6-7 years se aur mai khush hu ki maine dusron ki sunne ki bajaye apne dil ki suni.
जीवन जीने का सही तरीका यही है कि हम वो करें जो हमारा दिल कहता है, इसके लिए कठोर फैसले लेने पड़ते हैं,पर सफलता भी तभी आगे बढ़ कर स्वागत करती है| प्रेरणादायक लेख
very nice… bahut khub
bahut acha likha aapne sir ji.. maza aa gaya.
Bahut Acha sir……..
very nice… padkar bahut accha laga