तुषाराणां प्राप्तोपि प्रयत्नों धर्म आत्मनः । महिमा च प्रतिष्ठां च प्रोक्तोsयारः श्रमस्यहि ।। गायत्री का पाँचवाँ अक्षर ‘तु’ आपत्तियों और कठिनाईयों में धैर्य रखने की शिक्षा देता है— अर्थात- “आपत्तिग्रस्त होने पर भी सत्यता से प्रयत्न करना आत्मा का धर्म है। प्रयत्न की महिमा को जो जान जाते हैं, वही प्रतिष्ठा के हकदार होते हैं और कामयाबी का आन्नद लेते हैं।“ मित्रों, जीवन की आवश्यक वस्तुएं जब प्राप्त नही होती तब हम अधीर हो जाते हैं या कई बार किसी के चले जाने से हम विचलित हो जाते हैं। जिससे वर्तमान … [Read more...]
काम कराना है तो – Follow Up
शायद आपने Aristotle का ये कथन सुना होगा , “ मनुष्य एक सामजिक प्राणी है .” ,” Man is a social animal”, सच ही तो है ..हम सभी किसी न किसी समाज का हिस्सा हैं , और अपनी life normally जीने के लिए इस समाज के अन्य लोगों पर depend करते हैं . और ये dependency हर stage पे होती है , चाहे हम 5 साल के हों या पच्चीस साल के ..हमें अपना काम करने के लिए दूसरों की मदद की ज़रुरत पड़ती ही पड़ती है . हम कोई भी हेल्प directly लेते हैं या indirectly. For … [Read more...]
क्यों बचें Facebook से ? 7 reasons.
Facebook (Fb) world की दूसरी सबसे ज्यादा visit की जाने वाली site है …(पहली Google है ). इसे बनाने वाले दुनिया के youngest billionaire Mark Zukerberg ने भी कभी नहीं सोचा था की ये इतनी जल्दी इतनी popular हो जाएगी . In fact , अगर आप Fb पे नहीं हैं तो लोग आपको आश्चर्य से देखते हैं . ..” Fb पे नहीं है .............जी कैसे रहा है ...... :) !!!” and all that. आज Fb पे 1 billion+ registered user हैं, यानि दुनिया का हर सातवाँ आदमी Fb पे है and in … [Read more...]
स्वामी विवेकानंद की 150 वीं जयंती – 12 जनवरी 2013
जिन महान विभूतियों ने युग युग में जन्म लेकर मानवजाति के कल्याण हेतु कार्य किये हैं, उनके बचपन को यदि देखा जाए तो उनका बचपन असाधारण कार्यो का एहसास कर ही देता है। बचपन से ही माँ के मुख से रामायण एवं महाभारत की कहानियाँ सुनना नरेन्द्रनाथ(स्वामी जी के बचपन का नाम) को बहुत अच्छा लगता था। रामयण सुनते सुनते बालक नरेन्द्र का सरल शिशुह्रदय भक्तिरस से परिपूर्ण हो जाता था। रामायण से ही जुङी एक घटना एवं उनके बहादुरी के किस्से, आप सबसे share करना चाहते है। वैसे भी जन्मदिन पर हम सभी अपने बचपन को याद कर ही … [Read more...]
युगपुरुष स्वामी विवेकानंद का युवाओं को एक पत्र
युगपुरुष विवेकानंद जी का एक पत्र जिसमें उन्होंने भारतीय संस्कृति और धर्म का जन-जन में संचार करने के लिये युवाओं का आह्वान किया है। स्वामीजी ने अपने अल्प जीवन में धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र और प्रगतिशील समाज की परिकल्पना की थी। स्वामी जी ये पत्र 19 नवम्बर 1894 को न्युयार्क से भारत के श्रीयुत, आलासिंगा, पेरुमल आदि भक्तों को लिखे थे। ये पत्र उनकी भावनाओं-मान्यतओं और जीवन दर्शन का स्पष्ट प्रमाण है। मित्रों, उस पत्र का कुछ अंश आप सभी से share कर रहे हैं। हे वीर हद्रय युवकों, यह बङे संतोष की बात … [Read more...]
बनाएं इस साल को अपनी life का सबसे बड़ा साल
Friends, मैं चाहता हूँ आपका ये साल आपकी life का सबसे बड़ा साल हो . And believe me मैं पूरी sincerity के साथ ऐसा चाहता हूँ , मैं जानता हूँ आप इस बात को समझते हैं कि मैं GROWTH देखना चाहता हूँ …आपकी भी और अपनी भी . "बड़ा" का मतलब क्या है ? Hmmm , पहला काम यही है आपको अपने लिए इस “बड़ा ” को define करना होगा . ये ऐसा कुछ होगा जो शायद आप बहुत पहले से पाना चाहते होंगे , जिसके बारे में सोचते होंगे , but unfortunately उसे पा नहीं … [Read more...]
2012 की तीन घटनाएँ जो देती हैं ज़िन्दगी की सीख
कल साल 2012 का आखिरी दिन है , आमतौर पर इस वक़्त TV Channels और अखबारों में बीते हुए साल के important incidents पर रौशनी डाली जाती है …..मैंने भी कुछ दिनों पहले सोचा था की इस बार AKC पर कुछ ऐसा ही करूँगा …..मैं कुछ ऐसे घटनाक्रम चुनुगा जो important भी हों और हमें life की कुछ सीख भी देते हों . मेरे मन में सचिन तेंदुलकर और अन्ना हजारे से related दो चीजें दिमाग में थीं , पर जब कल का दैनिक भास्कर पढ़ा तो उसमे वैसा ही कुछ लिखा … [Read more...]
ज़िन्दगी में progress ना कर पाने की 5 वजहें ?
Friends, last Friday जब सुबह मैं office के gate से enter कर रहा था तब अचानक ही मेरी नज़र वहां काम कर रहे gatekeeper पर पड़ी , वैसे तो मैं उसे रोज देखता हूँ पर आज उसपर थोडा ध्यान दिया …. वो कोई 45-50 साल का व्यक्ति होगा , उसे देखकर मेरे मन में एक सवाल उठा ---आखिर बहुत सारे लोग क्यों अपनी life बस एक ही जैसी ज़िन्दगी जीने में बिता देते हैं , क्यों वे एक routine life के , भले वो घिसी - पिटी ही क्यों ना हो के इतना used to हो … [Read more...]
स्वार्थी नहीं सहयोगी बनें
मित्रों,संत कवि गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने महाकाव्य “श्रीरामचरितमानस” में लिखा है कि हमारा शरीर पांच तत्त्वों से बना है और वे तत्त्व हैं – क्षिति,जल,पावक,गगन,समीरा अर्थात् धरती, पानी, अग्नि, आकाश एवं वायु | ये पाँचों तत्त्व सदैव पारस्परिक सहयोग एवं सेवा भाव से कर्म करते हुए सृष्टि का संतुलन बनाए रखते हैं | इस तरह जगत् में जीवन के प्रादुर्भाव से पूर्व ही प्रकृति ने उसके लिए उचित क्षेत्र निर्माण कर रखा है जिसके माध्यम से प्राणियों का अस्तित्व बना रहता है और विकास होता रहता है |वस्तुतः, … [Read more...]
Best Motivational Video Ever For Success In Hindi
Best Motivational Video For Success In Hindi Friends, अगर कोई मुझसे पूछे कि AKC पर मुझे कौन सी post सबसे अच्छी लगती है तो मेरा जवाब होगा “ तीन कहानियाँ- जो बदल सकती हैं आपकी ज़िन्दगी !” , Steve Jobs की इस life changing speech ने मुझे बहुत प्रभावित किया है , मैं इसे कई बार पढ़ और सुन चुका हूँ, मैंने इससे बहुत कुछ सीखा है. और आज मैं आपके साथ इसी motivational speech का video Hindi में share कर रहा हूँ . ये करने का idea मुझे एक -दो महीने पहले आया था , … [Read more...]
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